भारत की तलाश

 

Thursday, April 10, 2008

४७ करोड़ का नुकसान, फैसला १७ वर्ष में: सजा? १ वर्ष की कैद!

बंबई उच्च न्यायालय ने शेयर दलाल केतन पारेख और हितेन दलाल के अलावा पांच अन्य लोगों को 1992 के 47 करोड़ रूपये से अधिक के बहुचर्चित प्रतिभूति घोटाले के सिलसिले में मंगलवार, 1 अप्रैल को सिर्फ एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनायी है, जबकि दो अन्य लोगों को छह महीने के कारावास की सजा सुनायी गयी है।
विशेष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीएम कनाडे ने कहा कि सभी अभियुक्तों की जमानत की अवधि हालांकि 31 जुलाई तक मान्य होगी। पारेख के अलावा जिन अन्य लोगों को अदालत 14 मार्च को दोषी पाया।

अदालत ने कहा कि इन लोगों ने आपराधिक षड्यंत्र किया है। बेंगलुरू स्थित कैन बैंक फाइनेंशियल सर्विसेज को इस घोटाले से नुकसान हुआ। कैन बैंक फाइनेंशियल केनरा बैंक की सहायक कंपनी है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि कैनफिना के धन को कैन बैंक म्यूचुअल फंड के मुंबई स्थित खातों में हस्तांतरित किया गया। कैनफिना को धन वापस देने की बजाय कैन बैंक म्यूचुअल फंड ने इसे पारेख और अन्य शेयर दलालों के खातों में हस्तांतरित कर दिया। धोखाधड़ी का यह मामला अक्टूबर 1991 और जनवरी 1992 में हुआ। इससे कैनफिना को क्रमश: 47 करोड़ रूपये और 70 लाख का नुकसान हुआ था।

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