कोई जरूरी नहीं कि परदे पर दिखायी जाने वाली घटनाएँ काल्पनिक हों, वह भी समाज से ली गयी रहतीं हैं. धारावाहिक 'आफिस-आफिस' में आपने देखा होगा कि किसी भी कार्य की फाइल कई वर्षो तक इधर से उधर घूमती रहती है, लेकिन निर्णय कुछ नहीं निकल पाता। जवानी में किसी समस्या के निस्तारण की मांग करने वाला व्यक्ति सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाते-लगाते बूढ़ा हो जाता है। कुछ ऐसा ही मामला हो रहा है दिल्ली से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बीएन गुप्ता के साथ। श्री गुप्ता ने अपने आवास के सामने दीवार हटवाने के लिए 25 साल पहले जीडीए में प्रार्थना पत्र दिया था। उस समय उनकी उम्र 44 साल थी। लेकिन अब तक दीवार नहीं टूटी और इस लड़ाई को लड़ते-लड़ते उनकी उम्र लगभग 70 साल हो चुकी है। इस दौरान दीवार तोड़ने के संबंध में वे प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं।
दैनिक जागरण में आए समाचार के अनुसार श्री गुप्ता ने राजनगर में 1/13 भूखंड रीसेल में खरीदा था। वर्ष 1983 में उन्होंने इस भूखंड पर भवन बना लिया। लेकिन भवन बनने के बाद पता चला कि उनके मकान के सामने वाली रोड जो आरडीसी को जानने वाली थी, उसे जल निगम ने बीच में रोक दिया और उनके घर के सामने दीवार खड़ी कर दी। जिससे उनके आवास की न केवल लुक खराब हो गई, बल्कि उन्हें सड़क की मिलने वाली सुविधा से भी महरूम होना पड़ा। उन्होंने इसकी शिकायत जीडीए में की। उनका कहना है कि जीडीए द्वारा तैयार ले आउट प्लान में उनके आवास के सामने 60 फिट चौड़ी सड़क थी, जो ग्रीन बेल्ट में होते हुए आरडीसी कालोनी तक होनी चाहिए। लेकिन इस बीच जल निगम ने ग्रीन बेल्ट में न केवल कालोनी बना दी, बल्कि दीवार भी खड़ी कर दी। श्री गुप्ता की शिकायत पर जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने दीवार को हटाने के निर्देश दिए, लेकिन दीवार नहीं हटाई गई। इसके बाद श्री गुप्ता समय-समय पर इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री, जीडीए, जल निगम में विभिन्न माध्यमों से शिकायत करते रहे, लेकिन अब तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो सका है। उनके पास विभिन्न मंत्रालयों, विभागों के आदेश की मोटी फाइल बन चुकी है। इस दौरान श्री गुप्ता के आवास के बाहर नाला और बना दिया गया, जिससे उनके आवास के आस-पास बदबू फैली रहती है। इससे श्री गुप्ता बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि वह उस घड़ी को पछता रहे हैं, जब उन्होंने यह भूखंड खरीदा था। उनका कहना है कि वह अपनी शिकायत प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक जा चुके हैं। जीडीए के चक्कर लगाते-लगाते थक गए है लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो सका। अब वह आखिर कहां जाएं?
भारत की तलाश
Thursday, May 8, 2008
25 साल बाद भी नहीं हटी घर के आगे से दीवार
Monday, April 28, 2008
प्रधानमंत्री अंधेरे में रहे, और विद्युत आपूर्ति का उद्घाटन किया!
ऐसा कारनामा तो मेरे इंडिया में ही हो सकता है, जहाँ जनता के लिए रोशनी का इंतजाम करते वक्त प्रधान मंत्री को अंधेरे में रखा जाए! हुया यह कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पिछले दिनों अपने झारखंड दौरे के दौरान बोकारो जिले के दस गांवों में विद्युत आपूर्ति योजना का शुभारंभ कर गए थे लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि पांच दिन बीत जाने के बाद भी इन दस में से आठ गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। प्रधानमंत्री तो विद्युत आपूर्ति योजना का शुभारंभ कर चले गए लेकिन अब इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन दस गांवों में विद्युत आपूर्ति योजना का शुभारंभ उन्होंने किया था उनमें से आठ गांवों में विद्युतीकरण का काम ही पूरा नहीं हुआ है। इस खुलासे से अचंभित झारखंड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब किया है।
प्रधानमंत्री ने 22 अप्रैल को इन दस गांवों में विद्युत आपूर्ति योजना का शुभारंभ किया था। राज्य सरकार ने दावा किया था कि केंद्रनीत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत इन गांवों के विद्युतिकरण का काम पूरा हो गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक इन दस में से सिर्फ दो ही गांवों में विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ था। शेष आठ गांवों का विद्युतीकरण ही नहीं हुआ। अलबत्ता प्रधानमंत्री के शुभारंभ के पांच दिन बाद भी इन आठ गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। दरअसल, प्रधानमंत्री को अंधेरे में रख इन गांवों में विद्युत आपूर्ति योजना का शुभारंभ करवा दिया गया।
जिन आठ गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है वे हैं मूगा सरला, काटमकुल्ही, ओरमो, बेरोटांड, बेमरोटांड, अरारायी, तांतेबेरा और रूकाम। मूंगा सरला गांव के निवासी भुवनेश्वर राजवार ने बताया, ''बिजली विभाग के अधिकारी हमारे गांव आए और कह गए कि 21 अप्रैल तक विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया जायेगा। लेकिन आज तक हम इसी इंतजार में हैं कि कब हमारे घर बिजली से रोशन होंगे।''
खबरों के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। यहां तक कि राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी भी इस खुलासे से आश्चर्यचकित हैं। रजी ने राज्य सरकार से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। उन्होंने राज्य सरकार से पूछा है कि बिना विद्युतीकरण के क्यों इस योजना का शुभारंभ किया गया। ज्ञात हो कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत राज्य सरकार को केंद्र से लगभग तीन अरब रुपये की राशि मिली थी।
