मशीन पर बैठिए, बटन दबाइए और अपनी मेमोरी तेज बनाइए। यह कैसे हो सकता है? लेकिन लखनऊ स्थित सिटी इंटरनेशनल कालेज में स्थापित की जा रही मेमोरी लैब से सम्भव होने जा रहा है। यह तरीका पढ़ाई में कमजोर स्मरण शक्ति के कारण अवसाद झेल रहे बच्चों के लिए ढूंढ़ निकाला गया है। यहां इस प्रयोगशाला को विशेष रूप से विश्वरुप रायचौधरी ने तैयार किया है, जिन्होंने स्मरण शक्ति बढ़ाने के तमाम तरीकों को एक पुस्तक में लिखकर अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाड्र्स में दर्ज कराया है।
दरअसल पढ़ाई को लेकर बढ़ रहे मानसिक अवसाद और स्मरण शक्ति में कमजोर होने की वजह से हीनता का शिकार हो रहे बच्चों के कारण विद्यालय ऐसे ही किसी तरीके की तलाश में था। शोध और तमाम शिक्षाविदों से विचार-विमर्श के बाद कालेज प्रशासन ने इसके लिए विश्वरुप रायचौधरी से संपर्क किया और उसके बाद इस प्रयोगशाला का खाका तैयार किया गया। सिटी इंटरनेशनल कालेज की प्रधानाचार्य सुनीता गांधी ने इस अनोखी प्रयोगशाला के बारे में बताया कि बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने का यह तरीका अदभुत है। इस प्रयोगशाला में बच्चों की कल्पना शक्ति बढ़ाने के लिए कई उपकरण विशेष प्रकार से डिजाइन किए गए हैं। यह सिस्टम चुंबकीय और तकनीकी पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि ग्रीक और रोमन पद्धति से तैयार की गई इस तकनीक में अगर बच्चे इसको पूरी तरह से अपना लेंगे, तो उनकी स्मरण क्षमता इतनी प्रबल हो जाएगी कि वह आठ घंटे की पढ़ाई केवल दो घंटे में ही कर लेंगे। इस प्रयोगशाला का सबसे पहला आधार यह है कि इंसान जिस चीज को देखता है, वह उसे जल्द याद हो जाती है। लिहाजा इस तकनीक में चित्रों व कल्पना को बहुत महत्व दिया जा रहा है। इस तरीके को इतिहास और गणित में बेहद कारगर माना गया है।
स्मरण शक्ति बढ़ाने का यह तरीका पांच हजार साल पुराना है। विश्व में निजी क्षेत्र में छह ऐसे केन्द्र हैं, जहां इस तरीके से स्मरण शक्ति बढ़ाने के उपाय बताए जाते हैं। लेकिन प्रयोगशाला के रूप में किसी स्कूल में यह पहली बार स्थापित किया गया है। सुनीता गांधी के अनुसार अभी से बच्चे इस प्रयोगशाला में काफी आनंद उठा रहे हैं। नये सत्र से इसमें काम शुरू हो जाएगा।
भारत की तलाश
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Monday, April 21, 2008
अवसादग्रस्त बच्चों के लिए अनोखी प्रयोगशाला
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