भारत की तलाश

 
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Thursday, December 3, 2009

केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री के पांच सितारा होटल का बिल 37 लाख रुपए

तृणमूल कांग्रेस कोटे से केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुल्तान अहमद को पांच सितारा होटल खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। वे छह माह से अशोका होटल में हैं और उनका 37 लाख रुपए तक पहुंच गया है।

केंद्रीय मंत्री के एक करीबी ने बताया है कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने उनसे कहा है कि वे होटल का बिल चुकाएं। अहमद पहली बार सांसद बने हैं और उन्हें मंत्री वाला बंगला अलॉट हुआ है। सीपीडब्लूडी ने उसे तैयार नहीं करवाया है इसलिए वे उसमें जा नहीं पा रहे।

मंत्री बनने से पहले वे आईटीडीसी के सम्राट होटल में एक माह रहे थे। अहमद ने बताया कि उन्हें अभी तक बिल नहीं मिला है।

Saturday, April 25, 2009

महाराष्ट्र के मंत्री को प्रेमिका संग पकड़ा बीबी ने, दोनों की की पिटाई

महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री को उनकी पत्नी ने दूसरी महिला के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया। मंत्री की पत्नी ने न केवल उस महिला की चुटिया खींची , बल्कि अपने पति की भी जमकर धुनाई की। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में आजकल यह मुद्दा चुनाव जितना ही गर्म बना हुआ है।

खबरों के अनुसार यह घटना दक्षिणी मुंबई के मनोरा विधायक होस्टल में हुई, जब उनकी पत्नी ने होस्टल में प्रवेश किया तो मंत्री और उनकी महिला मेहमान प्रथम मंजिल के एक कमरे में थे। अपने पति को दूसरी महिला के साथ देखकर मंत्री की पत्नी का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा और उन्होंने उसकी धुनाई कर दी। यहां तक कि उन्होंने अपने पति को भी नहीं बख्शा। इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं दर्ज की गई है।खबरों में यह भी बताया गया है कि मंत्री विदर्भ क्षेत्र से आते हैं और अशोक चव्हाण सरकार में उन्हें हाल ही में शामिल किया है।

मंत्री की पत्नी नागपुर में थी और उन्हें अगले दिन मुंबई पहुंचना था। मंत्री की पत्नी को कहीं से इसकी भनक लग गई थी कि उनके पति क्या गुल खिलाने वाले हैं और उसके बाद वह अंतिम उड़ान पकड़ कर अचानक मुंबई पहुंच गई।

वह ख़बर यहाँ देखी जा सकती है।

Tuesday, June 17, 2008

मंत्री जी ने झूठा शपथ पत्र दिया

मध्य प्रदेश के गृह राज्य मंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री - पशुपालन मंत्री द्वय के बाद अब तक खुद को बीए पास बताने वाले भाजपा विधायक व उडीसा के वाणिज्य व परिवहन मंत्री जयनारायण मिश्र का कारनामा सामने आया हैउपजिलाधीश कैलाश साहू की जांच रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि उन्होंने वर्ष 1984 में न तो बीए परीक्षा दी थी और न ही पास हुए थे। डीएम पीके पटनायक ने इस रिपोर्ट को राज्य चुनाव आयोग के पास भेज दिया है। अब मंत्री का भविष्य चुनाव आयोग के फैसले पर टिका है। इस आरोप में उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है।

मंत्री जयनारायण मिश्र की योग्यता पर संबलपुर विकास मंच ने सवालिया निशान लगाते हुए सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी। मंच ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिला अपने नामांकन पत्र में जयनारायण मिश्र ने गलत जानकारी दी थी। वर्ष 1984 में बीए पास नहीं करने के बावजूद उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता बीए बताई थी। मंच की ओर से जयनारायण मिश्र के शिक्षा योग्यता के बारे में जानकारी लिए बुर्ला नगर निकाय कालेज से भी सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी गई थी, लेकिन वहां से मिली जानकारी अधूरी थी।

इसके बाद संबलपुर विश्वविद्यालय से इस आशय की जानकारी मागी गई थी। विश्वविद्यालय की ओर से यह सब जानकारी इस मामले की जांच कर रहे उपजिलाधीश को दी गई है, जिसमें साफ बताया गया है कि वर्ष 1984 में बुर्ला नगर निकाय कालेज से जयनारायण मिश्र नाम से किसी परीक्षार्थी ने परीक्षा नहीं दी थी। उधर, इस मामले पर मंत्री जयनारायण मिश्र का रवैया अब भी पूर्ववत बना हुआ है। इतनी चर्चा के बाद भी जयनारायण मिश्र ने अब तक अपनी डिग्री प्रस्तुत नहीं की है। उन्होंने फिर से दोहराया है कि समय आने पर ही वह अपना पत्ता खोलेंगे।

Sunday, June 15, 2008

हम किसी से कम हैं क्या !?

लगता है आजकल मध्यप्रदेश को ख़बरों के मध्य रखा जाना भा रहा है! आईपीएल के दौरान चीयर गर्ल्स का मुखर विरोध करने वाली सरकार के दो मंत्री शुक्रवार, १३ जून को बालाघाट में लगे एक सर्कस में पहुँचे, जहाँ कला के नाम पर महिलाओं का अश्लील नृत्य चल रहा था। वे यहाँ लोक कल्याण शिविर में हिस्सा लेने पहुँचे थे। इतना बता दें कि यह ख़बर और विवरण पीटीआई-भाषा द्वारा जारी की गयी है।

मंत्रीजी के अलावा पार्टी के कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस आयोजन में शामिल हुए थे। मौका था वन विभाग द्वारा लोक वानिकी योजना के हितग्राहियों को राशि के वितरण का। इसके बाद वन विभाग ने सर्कस के एक मुफ्त शो का आयोजन किया था। इस आयोजन में राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री चौधरी चंद्रभानसिंह और पशुपालन मंत्री रमाकांत तिवारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मौजूद थे। सर्कस में विभिन्न कलाबाजियों के अलावा महिलाओं का एक ऐसा भौंडा और अश्लील नृत्य का आयोजन किया गया था, जिसे आमतौर पर परिवार के साथ कोई भी बैठकर देखना पसंद न करे, लेकिन संस्कृति बचाने की वकालत करने वाले सरकार के ये दो मंत्री शायद इस आयोजन में इतने मशगूल हो गए थे कि यहाँ कला के नाम पर चल रही अश्लीलता उन्हें दिखाई नहीं दी।

बाद में संवाददाताओं द्वारा पूछे जाने पर बालाघाट के प्रभारी मंत्री चन्द्रभानसिंह ने स्वीकार किया कि उन्हें सर्कस में नहीं आना चाहिए था, लेकिन उनका कहना था कि जैसे ही अश्लील नृत्य होते देखा तो वे उठकर चले आए थे। उन्होंने माना कि परिवार और छोटे बच्चों की उपस्थिति में होने वाले आयोजन में ऐसा भौंडा प्रदर्शन सही नहीं है। दूसरी तरफ पशुपालन मंत्री रमाकांत तिवारी ने इस मामले में पूछे जाने पर कहा कि यह तो कला प्रदर्शन है। कला में प्रतिबंध लगाना सर्वथा अनुचित है और लगाया भी नहीं जा सकता है।

Saturday, April 19, 2008

मंत्री जी ने बिना टिकट यात्रा के आरोप पर जुर्माना भरा

ट्रेन के टीटी को जुर्माना नहीं देने पर मंत्री जी को गाजियाबाद स्टेशन पर उतरा गया, आई कार्ड देकर परिचय देने के बावजूद उन्हें जुर्माना भरना पड़ा। उनके साथ एक अटेंडेंट भी यात्रा कर रहा था। रेल यात्रा नियमों की अनदेखी वक्फ राज्यमंत्री सहजल इस्लाम अंसारी को महंगी पड़ी। लखनऊ शताब्दी एसी स्पेशल की एग्जीक्यूटिव श्रेणी में टिकट की फोटो कापी लेकर बरेली से दिल्ली की यात्रा के दौरान अंसारी पर 2980 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अमर उजाला में आए समाचार के अनुसार, 2003 ए लखनऊ-दिल्ली एसी शताब्दी स्पेशल शुक्रवार को नई दिल्ली जा रही थी। ट्रेन के एग्जीक्यूटिव डिब्बे में बर्थ संख्या 37 और 38 पर वक्फ राज्यमंत्री सहजल इस्लाम अंसारी अपने एक अटेंडेंट के साथ यात्रा कर रहे थे। उनका रिजर्वेशन बरेली से नई दिल्ली तक का था। एचओआर कोटा पर जारी टिकट का पीएनआर 261-0574841 था। जानकारी मुताबिक जब टीटी ने मंत्री जी से टिकट मांगा तो उन्होंने मूल टिकट नहीं दिखाया बल्कि टिकट की फैक्स कापी थमा दी। टीटी ने कहा फैक्स या टिकट की फोटो कापी को यात्रा अधिकार पत्र के रूप में रेलवे की ओर से मान्यता नहीं दी गई है, ऐसे में आपको जुर्माना भरना पड़ेगा।

मंत्री जी ने टीटी के सामने प्रदेश सरकार में अपना रुतबा बताया और जुर्माना नहीं देने की जिद पर अड़ गए टीटी ने तत्काल मामले की सूचना कंट्रोल को दी। कंट्रोल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गाजियाबाद आरपीएफ और टिकट निरीक्षकों की टीम को मंत्री जी का चालान काटने का निर्देश जारी कर दिया। दोपहर 1:20 पर ट्रेन गाजियाबाद पहुंची तो टीम आरपीएफ के जवानों के साथ मंत्री जी के पास पहुंच गई। जानकारी के मुताबिक मंत्री फिर भी नहीं माने। ऐसे में उन्हें गाजियाबाद स्टेशन पर उतार लिया गया। मंत्री ने फोन करना शुरू किया। खुद को घिरते देख मंत्री का गुस्सा शांत हो गया। बढ़ते दबाव के आगे राज्यमंत्री ने आखिरकार 2980 रुपये बतौर जुर्माना भर दिया। जुर्माना भरने के बाद उन्हें ईएमयू से नई दिल्ली के लिए रवाना किया गया।

Friday, April 4, 2008

मंत्री जी पूछते हैं: बच्चे क्या सरकार ने पैदा किए?

छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री श्री अजय चंद्राकर ने एक भीड़भरी कांफ्रेंस में, गुरूवार ३ मार्च को अपने अंदाज में कहा ‘लोग यह समझते हैं कि बच्चों के लिए पढ़ाई का इंतजाम करना केवल सरकार की जिम्मेदारी है। क्या बच्चे भी सरकार ने पैदा किए हैं? शिक्षा विभाग का पूरा अमला यहां है। मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि कर्मचारी समझते हैं कि सरकार का काम तनख्वाह बांटना और उनका काम लेना है। इसके बीच पीढ़ी (बच्चों) के लिए उनके क्या कर्तव्य हैं?’

शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को शामिल करने और इसके लिए दिशाएं तय करने बुलाई गई वर्कशाप में विभागीय मंत्री अजय चंद्राकर की इस टिप्पणी पर बवाल मच गया है। एसएफआई ने बयान के कुछ देर बाद ही बैठक स्थल पर प्रदर्शन कर दिया। युवक कांग्रेसियों ने इस बयान पर जयस्तंभ चौक में शिक्षामंत्री का पुतला फूंका। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि इस मुद्दे पर माफी मांगी जानी चाहिए। श्री जोगी ने मांग की कि मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री के इस टिप्पणी के लिए बच्चों और उनके पालकों से क्षमा याचना करें। श्री जोगी ने यह भी कहा कि पीपीपी योजना की आड़ में सरकार प्रदेश के स्कूलों की बेशकीमती जमीन धनाढ्यों को सौंप देना चाहती है।

युवक कांग्रेसियों ने रात जयस्तम्भ चौक पर श्री चंद्राकर का पुतला जलाने के पहले स्कूली छात्रों से मंत्री के पुतले को पिटवाया। स्टूडेंट फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) के राज्य महासचिव ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को उद्योगपतियों और दलालों को बेचने पर आमादा है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। सरकार अपनी जिम्मेदारी से भागकर शिक्षा को दलालों को सौंपना चाहती है। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष, ग्रामीण जिला अध्यक्ष आदि ने शिक्षामंत्री के बयान को ओछी मानसिकता का प्रतीफ करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार तो स्कूलों की दशा सुधाने की बजाए निजीकरण में लग गई है।