भारत की तलाश

 
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Tuesday, November 10, 2009

करदातायों से 3 साल में 30 मंत्रियों ने 300 करोड़ रुपए खर्च करवाए, अपनी देशी-विदेशी यात्रायों पर

एक कार्यकर्ता एस सी अग्रवाल द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में कैबिनेट सचिवालय ने यह जानकारी दी है कि पिछली सरकार में कैबिनेट मंत्रियों के विदेश व घरेलू दौरे ने विदेश और घरेलू यात्राओं पर पिछले तीन साल में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। कैबिनेट सचिवालय द्वारा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2006-07 और 2008-09 की अवधि में कैबिनेट मंत्रियों ने विदेश यात्रा पर 137 करोड़ रुपये से अधिक रकम खर्च किए। वित्त वर्ष 2007-08 में सर्वाधिक 115 करोड़ रुपये खर्च किए गए। दिलचस्प बात यह है कि उक्त अवधि में मंत्रियों का घरेलू यात्रा पर खर्चा विदेश यात्रा पर व्यय की गई राशि से ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि तीन साल की अवधि के दौरान मंत्रियों ने घरेलू यात्रा पर 163 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए।


संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के पहले कार्यकाल में कैबिनेट स्तर के 30 मंत्री थे। मंत्रियों द्वारा 2008-09 में घरेलू यात्रा पर 94.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो इससे पूर्व दो वर्ष में खर्च की गई कुल राशि के मुकाबले 38 फीसदी ज्यादा है। कैबिनेट सचिवालय द्वारा दिए गए जवाब में यह भी कहा गया है कि राज्यमंत्रियों ने उस अवधि (2006-07 से 2008-09) के दौरान अपनी विदेश यात्राओं पर लगभग 21 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि इसी अवधि में घरेलू यात्राओं पर 27 करोड़ रुपये व्यय किए।

इसी प्रकार, केंद्रीय मंत्रियों ने विदेश और घरेलू यात्राओं पर वित्त वर्ष 2008-09 में 127 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि 2007-08 और 2006-07 के दौरान खर्च की गई राशि क्रमश: 138.7 करोड़ रुपये और 82.3 करोड़ रुपये है।

कैबिनेट सचिवालय के जवाब में यह नहीं बताया गया कि विभिन्न मंत्रियों ने कितनी राशि खर्च की क्योंकि इस संबंध में आंकड़ा विभिन्न मंत्रियों के पैसा निकालने और वितरण से संबद्ध अधिकारियों (डीडीओ) के पास है। कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय के वरिष्ठ एकाउंट अधिकारी जे एल खुराना ने कहा कि यह कार्यालय हर मंत्रालय के इस तरह के खर्चो का अलग-अलग हिसाब नहीं रखता, बल्कि उन्हें एक साथ एक ही मद में डाल दिया जाता है।

प्राप्ति और अदायगी के मौजूदा नियम के मुताबिक इस तरह का अलग-अलग हिसाब संबद्ध मंत्रालय का डीडीओ ही रखता है।

Thursday, June 12, 2008

रेलवे के यात्रा कूपन लेते हैं, जेल में बंद विधायक

विधायक महोदय जेल में बंद हैं तो क्या हुआ, उन्हें यात्रा कूपन तो चाहिए! बात सुनने में अटपटी लगती है लेकिन यह सच है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के दो सदस्य जेल में बंद होने के बावजूद रेलवे के यात्रा कूपन लेते हैं। चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में अमरमणि त्रिपाठी चार साल से जेल में बंद हैं। जेल में रहते हुए वे महाराजगंज जिले की लक्ष्मीपुर सीट से 2007 का विधानसभा चुनाव जीते हैं। जब विधानसभा का सत्र चलता है तो वे इसमें भाग लेने के लिए पुलिस हिरासत में जेल से विधानसभा आते हैं। उधर मुख्तार अंसारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में लगभग डेढ़ साल से जेल में हैं। वे भी मऊ जिले की मऊ सदर सीट से जेल में रहते हुए विधानसभा के लिए चुनकर आए हैं।

विधानसभा का पिछला सत्र 11 फरवरी से 17 मार्च के बीच आहूत हुआ था। इसमें मुख्तार अंसारी और अमरमणि त्रिपाठी दोनों भाग लेने आए थे। इस दौरान दोनों ने पटल कार्यालय जाकर दस-दस हजार रूपये के रेलवे यात्रा कूपन लिए। इंडो-एशियन न्यूज सर्विस द्वारा इस बारे में पूछे जाने पर विधानसभा के प्रमुख सचिव राजेन्द्र प्रसाद पांडेय ने बताया कि जेल में हो या कहीं और, विधायक को सभी सुविधाएं अनुमन्य हैं। जेल में है तो फिर यात्रा कहां और कैसे होगी, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह एक अलग मुद्दा है, फिर भी नियम के तहत विधायक कूपन ले सकता है।

उत्तर प्रदेश राज्य विधान मंडल (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) अधिनियम 1980 एवं तध्दीन बनाई गई नियमावली के तहत विधायक प्रदेश के भीतर अथवा बाहर रेल यात्रा के लिए प्रतिवर्ष बीस हजार रुपये के कूपन ले सकते हैं। बहरहाल विधानसभा के माननीय सदस्य जेल में बंद होने के बावजूद इस सुविधा का लाभ उठाने से चूकना नहीं चाहते।

Saturday, April 19, 2008

मंत्री जी ने बिना टिकट यात्रा के आरोप पर जुर्माना भरा

ट्रेन के टीटी को जुर्माना नहीं देने पर मंत्री जी को गाजियाबाद स्टेशन पर उतरा गया, आई कार्ड देकर परिचय देने के बावजूद उन्हें जुर्माना भरना पड़ा। उनके साथ एक अटेंडेंट भी यात्रा कर रहा था। रेल यात्रा नियमों की अनदेखी वक्फ राज्यमंत्री सहजल इस्लाम अंसारी को महंगी पड़ी। लखनऊ शताब्दी एसी स्पेशल की एग्जीक्यूटिव श्रेणी में टिकट की फोटो कापी लेकर बरेली से दिल्ली की यात्रा के दौरान अंसारी पर 2980 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अमर उजाला में आए समाचार के अनुसार, 2003 ए लखनऊ-दिल्ली एसी शताब्दी स्पेशल शुक्रवार को नई दिल्ली जा रही थी। ट्रेन के एग्जीक्यूटिव डिब्बे में बर्थ संख्या 37 और 38 पर वक्फ राज्यमंत्री सहजल इस्लाम अंसारी अपने एक अटेंडेंट के साथ यात्रा कर रहे थे। उनका रिजर्वेशन बरेली से नई दिल्ली तक का था। एचओआर कोटा पर जारी टिकट का पीएनआर 261-0574841 था। जानकारी मुताबिक जब टीटी ने मंत्री जी से टिकट मांगा तो उन्होंने मूल टिकट नहीं दिखाया बल्कि टिकट की फैक्स कापी थमा दी। टीटी ने कहा फैक्स या टिकट की फोटो कापी को यात्रा अधिकार पत्र के रूप में रेलवे की ओर से मान्यता नहीं दी गई है, ऐसे में आपको जुर्माना भरना पड़ेगा।

मंत्री जी ने टीटी के सामने प्रदेश सरकार में अपना रुतबा बताया और जुर्माना नहीं देने की जिद पर अड़ गए टीटी ने तत्काल मामले की सूचना कंट्रोल को दी। कंट्रोल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गाजियाबाद आरपीएफ और टिकट निरीक्षकों की टीम को मंत्री जी का चालान काटने का निर्देश जारी कर दिया। दोपहर 1:20 पर ट्रेन गाजियाबाद पहुंची तो टीम आरपीएफ के जवानों के साथ मंत्री जी के पास पहुंच गई। जानकारी के मुताबिक मंत्री फिर भी नहीं माने। ऐसे में उन्हें गाजियाबाद स्टेशन पर उतार लिया गया। मंत्री ने फोन करना शुरू किया। खुद को घिरते देख मंत्री का गुस्सा शांत हो गया। बढ़ते दबाव के आगे राज्यमंत्री ने आखिरकार 2980 रुपये बतौर जुर्माना भर दिया। जुर्माना भरने के बाद उन्हें ईएमयू से नई दिल्ली के लिए रवाना किया गया।