भारत की तलाश

 
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Tuesday, June 17, 2008

मंत्री जी ने झूठा शपथ पत्र दिया

मध्य प्रदेश के गृह राज्य मंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री - पशुपालन मंत्री द्वय के बाद अब तक खुद को बीए पास बताने वाले भाजपा विधायक व उडीसा के वाणिज्य व परिवहन मंत्री जयनारायण मिश्र का कारनामा सामने आया हैउपजिलाधीश कैलाश साहू की जांच रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि उन्होंने वर्ष 1984 में न तो बीए परीक्षा दी थी और न ही पास हुए थे। डीएम पीके पटनायक ने इस रिपोर्ट को राज्य चुनाव आयोग के पास भेज दिया है। अब मंत्री का भविष्य चुनाव आयोग के फैसले पर टिका है। इस आरोप में उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है।

मंत्री जयनारायण मिश्र की योग्यता पर संबलपुर विकास मंच ने सवालिया निशान लगाते हुए सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी। मंच ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिला अपने नामांकन पत्र में जयनारायण मिश्र ने गलत जानकारी दी थी। वर्ष 1984 में बीए पास नहीं करने के बावजूद उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता बीए बताई थी। मंच की ओर से जयनारायण मिश्र के शिक्षा योग्यता के बारे में जानकारी लिए बुर्ला नगर निकाय कालेज से भी सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी गई थी, लेकिन वहां से मिली जानकारी अधूरी थी।

इसके बाद संबलपुर विश्वविद्यालय से इस आशय की जानकारी मागी गई थी। विश्वविद्यालय की ओर से यह सब जानकारी इस मामले की जांच कर रहे उपजिलाधीश को दी गई है, जिसमें साफ बताया गया है कि वर्ष 1984 में बुर्ला नगर निकाय कालेज से जयनारायण मिश्र नाम से किसी परीक्षार्थी ने परीक्षा नहीं दी थी। उधर, इस मामले पर मंत्री जयनारायण मिश्र का रवैया अब भी पूर्ववत बना हुआ है। इतनी चर्चा के बाद भी जयनारायण मिश्र ने अब तक अपनी डिग्री प्रस्तुत नहीं की है। उन्होंने फिर से दोहराया है कि समय आने पर ही वह अपना पत्ता खोलेंगे।

Friday, May 16, 2008

दो जानों की क़ीमत, दो रुपए!?

यह घटना किसी एक व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत पर सवाल उठाती है कि क्या कोई इंसान इतना संवेदनहीन भी हो सकता है। उड़ीसा में एक बस कंडक्टर ने सिर्फ़ दो रुपए के लिए एक बाप-बेटी को चलती बस से धक्का दे दिया और वे दोनों ही चलती बस के पहिये के नीचे आ गए और अपनी जान से हाथ धो बैठे। वह बेचारा चार साल की अपनी मासूम बेटी को लेकर किसी मंज़िल की ओर निकला था लेकिन मौत ने कंडक्टर का रूप धारण करके उन्हें मंज़िल की तरफ़ बढ़ने ही नहीं दिया।

35 वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति सनीचर टोप्पो तलपतिया नामक स्थान पर बस पर चढ़ा था लेकिन उसके पास किराए के पूरे पैसे नहीं थे, सिर्फ़ दो रुपए कम पड़ रहे थे। कंडक्टर ने सनीचर की यह फ़रियाद बिल्कुल अनसुनी कर दी कि सचमुच में ही उसके पास दो रुपए नहीं हैं। उसकी यात्रा का पूरी किराया बनता था दस रुपए, यानी उसके पास आठ रुपए तो थे लेकिन दो रुपए नहीं थे। बस में बैठे अनेक यात्रियों ने कंडक्टर की बेरहमी को देखते हुए पेशकश भी की कि सनीचर के दो रुपए उनमें से कोई भी दे देगा लेकिन कंडक्टर किसी की भी सुनने को तैयार नहीं था।

झगड़ा बढ़ा तो कंडक्टर ने सनीचर और उसकी चार साल की बेटी को एक साथ बस से कथित रूप से धक्का दे दिया। उस समय वह बस राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 पर चल रही थी। बाद में उस कंडक्टर और चालक को गिरफ़्तार कर लिया गया। बस में सवार यात्रियों और स्थानीय लोगों ने बस को आग लगा दी और सड़क को भी कुछ देर के लिए जाम कर दिया।

और हाँ, राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक कुछ ज्यादा उदार दिखे और इन दो जानों की कीमत एक लाख लगायी । मतलब, निकट संबंधियों को एक लाख रुपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

Thursday, May 8, 2008

एक बार में एक किलो मिर्च खा जाती हैं, दो बच्चियां

उड़ीसा के जगतसिंहपुर जिले के छोटे से गांव की दो लड़कियां इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। ये लड़कियां मिलकर एक बार में एक किलो हरी मिर्च खा जाती हैं। तुनि और पुनीता नामक इन बच्चियों के पिता शशांक सेन बताते हैं कि उनकी बेटियां शुरू से ही ऐसा करती आ रही हैं। गौरतलब है कि गांव के लोगों का सामान्य भोजन हरी मिर्च और प्याज के साथ चावल है इसलिए और लोगों की तरह सेन भी अपने खेत में मिर्च उगाते हैं।

आईएएनएस से समाचार है कि उनकी बेटियां पौधों से मिर्च तोड़ने में अपने मां-बाप की मदद करती हैं और साथ-साथ उन्हें खाती भी जाती हैं। शुरुआत में तो वे 20 से 50 मिर्च ही रोज खाती थीं लेकिन बाद में उनकी मात्रा बढ़ती गई। सेन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी बच्चियां जल्दी ही मिर्च खाने का रिकार्ड कायम करेंगी।

इस संबंध में बात करने पर एक शिशु रोग विशेषज्ञ गदाधर सारंगी ने कहा, ''अगर वे मिर्च खाती रहें तो इससे उनको कोई नुकसान तो नहीं होगा लेकिन किसी भी बात की अति बुरी होती है। मां-बाप को अपाने बच्चों को ज्यादा मात्रा में मिर्च खाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।''