मध्य प्रदेश के गृह राज्य मंत्री व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री - पशुपालन मंत्री द्वय के बाद अब तक खुद को बीए पास बताने वाले भाजपा विधायक व व उडीसा के वाणिज्य व परिवहन मंत्री जयनारायण मिश्र का कारनामा सामने आया है। उपजिलाधीश कैलाश साहू की जांच रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि उन्होंने वर्ष 1984 में न तो बीए परीक्षा दी थी और न ही पास हुए थे। डीएम पीके पटनायक ने इस रिपोर्ट को राज्य चुनाव आयोग के पास भेज दिया है। अब मंत्री का भविष्य चुनाव आयोग के फैसले पर टिका है। इस आरोप में उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है।
मंत्री जयनारायण मिश्र की योग्यता पर संबलपुर विकास मंच ने सवालिया निशान लगाते हुए सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी। मंच ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिला अपने नामांकन पत्र में जयनारायण मिश्र ने गलत जानकारी दी थी। वर्ष 1984 में बीए पास नहीं करने के बावजूद उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता बीए बताई थी। मंच की ओर से जयनारायण मिश्र के शिक्षा योग्यता के बारे में जानकारी लिए बुर्ला नगर निकाय कालेज से भी सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी गई थी, लेकिन वहां से मिली जानकारी अधूरी थी।
इसके बाद संबलपुर विश्वविद्यालय से इस आशय की जानकारी मागी गई थी। विश्वविद्यालय की ओर से यह सब जानकारी इस मामले की जांच कर रहे उपजिलाधीश को दी गई है, जिसमें साफ बताया गया है कि वर्ष 1984 में बुर्ला नगर निकाय कालेज से जयनारायण मिश्र नाम से किसी परीक्षार्थी ने परीक्षा नहीं दी थी। उधर, इस मामले पर मंत्री जयनारायण मिश्र का रवैया अब भी पूर्ववत बना हुआ है। इतनी चर्चा के बाद भी जयनारायण मिश्र ने अब तक अपनी डिग्री प्रस्तुत नहीं की है। उन्होंने फिर से दोहराया है कि समय आने पर ही वह अपना पत्ता खोलेंगे।
भारत की तलाश
Tuesday, June 17, 2008
मंत्री जी ने झूठा शपथ पत्र दिया
Thursday, April 3, 2008
एक ग्रेजुएट वाहन चोर, १०० रूपये में वाहन लौटाता है: गिनीज बुक में जायेगा
दुपहिया वाहनों को चुराने का माहिर कोदंदरमैया अन्य चोर उचक्कों से जरा हट के है। वह चुराए गए वाहनों को बेचता नहीं है, बल्कि उनके मालिकों का पता लगाकर उन्हें फोन पर सूचित करता है कि उनका वाहन उसने ही चुराया है।
साथ ही वह यह कहता है कि वह मात्र पचास से सौ रुपए के बदले उन्हें उनका वाहन लौटा देगा। कई दफे ऐसा भी हुआ कि जब वह वाहन के मालिक का पता नहीं लगा पाया और उसने वाहन पुलिस थाने को सौंप दिया। अब सवाल यह उठता है कि जब वह इन वाहनों को बेचकर मोटी रकम कमा सकता है तो आखिर वह उन्हें उनके मालिकों को क्यों लौटाता है। कोदंदरमैया बड़े गुरूर के साथ कहता है, ‘मैं कोई अपराधी थोड़े ही हूं। मैं तो केवल दो जून की रोटी का इंतजाम करने के लिए ऐसा करता हूं। मुझे वाहन मालिकों से पैसा मिलता है उससे मैं अपना खाना खरीदता हूं। लेकिन जब मेरे पास पैसे नहीं होते हैं तो मैं चुराए हुए वाहन के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देता हूं। मुझे जेल भेज दिया जाता है, जहां मेरे खाने-पीने का इंतजाम हो जाता है।’
आंध्र प्रदेश पुलिस का रिकार्ड बताता है कि उसने पिछले बीस साल के दौरान 298 अपराध किए और इसके लिए कई बार जेल की हवा खाई। यह किसी एक व्यक्ति द्वारा राज्य में सबसे अधिक अपराध करने का रिकार्ड है। वह गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में आसानी से जगह पा सकता है।
इस शख्स के बारे में दिलचस्प बात यह भी है कि वह एक ग्रेजुएट है और उसने कभी एक उद्यमी बनने का सपना पाला था। लेकिन उसे किस्मत ने धोखा दे दिया जब उसके पिता का अचानक निधन हो गया और भाइयों ने उसे घर से निकाल दिया।