जबलपुर का एक किस्सा सामने आया है जिसमें कार में रंगरेलियां मनाने से मना करने पर गुस्साए छात्र-छात्रा ने एक पुलिसकर्मी की कार से कुचलकर हत्या कर दी। कैंट थाना इंचार्ज अखिल वर्मा ने मीडिया को बताया कि 2 सितम्बर की रात गोलछा कम्पाउंड के पास एक कार काफी देर से खड़ी थी जिसमें एक युवक और युवती रंगरेलियां मना रहे थे। कैंट थाने में तैनात देवीसिंह परोहा ने युवक-युवती से कार में रंगरेलियां करने से मना किया तो युवक नाराज हो गया और उसने पुलिसकर्मी को कार से कुचल दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने कार लेकर भाग रहे युवक-युवती को पीछा कर उन्हें बेलबाग थाना क्षेत्र में पकड़ लिया। छात्र की पहचान हितकारणी इंजीनियरिंग कालेज के थर्ड ईयर में पढ़ने वाले के रुप में हुई है। वह गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है जबकि युवती की पहचान होम साइंस कालेज में सेकंड ईयर में पढ़ने वाली के रुप में हुई है। वह हॉस्टल में रहकर पढ़ रही है। युवक-युवती को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।
भारत की तलाश
Thursday, September 3, 2009
रंगरेलियां मनाने से मना किया तो छात्र-छात्रा ने पुलिस वाले को कार से कुचल कर मार डाला
Wednesday, September 10, 2008
शराब पीकर नाच रहा था क्रिकेटर, पुलिस उपाधीक्षक और उसकी आईपीएस पत्नी के साथ!?
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक शॉपिंग मॉल में स्थित डिस्कोथेक में कुछ वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तथा एक अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेटर द्वारा कथित रुप से शराब पीकर डांस करने के मामले की रिपोर्ट मंगाई है। पुलिस महानिदेशक द्वारा मंगाई गई इस रिपोर्ट के साथ अपेक्षा की गई है कि सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी हरकतें नहीं होनी चाहिए।
उच्च पदस्थ पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस महानिदेशक ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया। उन्होंने इस मामले में कैमरे में कैद तस्वीरों का भी संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के लिए यह और शर्म की बात है कि केन्द्र में प्रतिनियुक्ति, लेकिन यहां तैनात एक पुलिस उपाधीक्षक और उसकी आईपीएस पत्नी भी इसमें शामिल थी। 'वार्ता' की ख़बर है कि भारतीय क्रिकेट टीम का एक तेज गेंदबाज भी इस “एल्कोहल पार्टी” में शामिल था।
इस मामले में पड़े छापे का नेतृत्व करने वाले सहायक पुलिस अधीक्षक सुभाष चन्द्र दुबे ने ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि छापे के दौरान वहां मौजूद लोगों के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि उन्होंने कोई कानून तोड़ा था या इस डिस्कोथेक में शराब परोसे जाने का समय क्या है।
Sunday, June 29, 2008
१ अरब की रिश्वत, तय बज़ट से अधिक
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के रहन-सहन के स्तर को सुधारने के लिए सरकार जितना बजट तय करती है, उससे कहीं अधिक, ये गरीब उन सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए रिश्वत के रूप में खर्च कर देते हैं। भारत में भ्रष्टाचार के स्तर पर अध्ययन करने वाली एक संस्था द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की मानी जाए तो, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों ने गत एक वर्ष में सरकारी सेवा प्रदान करने वाले विभागों को 900 करोड़ रूपए सिर्फ रिश्वत के रूप में दे दिए। मजे की बात तो यह है कि गरीबों ने गरीबी का प्रमाण लेने के लिए ही बाबुओं को करोड़ों रूपए का चाय-पान करा दिया।
स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा भारत को भ्रष्टतम देशों की सूची में दो पायदान आगे बढ़ने की खबर जारी करने के दूसरे ही दिन संस्था की भारतीय शाखा ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया ने अपने चौंकाने वाले आंकड़ों में यह खुलासा किया है। अकेले गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों ने वर्ष 2007-08 में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, बैंकिंग सहित तमाम सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए नौ सौ करोड़ रूपए अधिकारियों की जेब गर्म करने में खर्च कर दिए। सरकारी सेवा प्रदान करने वाले विभागों में प्रतिवर्ष की भांति पुलिस महकमा सबसे भ्रष्ट विभाग साबित हुआ है। संस्था द्वारा विभागों को आधारभूत सेवा व आवश्यकता आधारित सेवा के आधार पर बांट कर राष्ट्रीय स्तर पर किए गए अध्ययन के अनुसार गत वर्ष बीपीएल के 5.6 करोड़ लोगों का वास्ता पुलिस से पड़ा जिसमें से ढाई करोड़ लोगों को विभिन्न कामों को कराने के लिए 215 करोड़ रूपए बतौर रिश्वत खर्च करने पड़े। अध्ययन में शामिल लोगों में से 90 प्रतिशत लोगों ने चिकित्सा संबंधी कामकाज के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को रिश्वत देने की बात स्वीकार की है। दस लाख लोगों को चिकित्सा सेवा से इसलिए मरहूम होना पड़ा क्योंकि उनके पास कर्मचारियों को चाय पानी कराने के लिए पैसे नहीं थे। गरीबों ने भूमि रिकार्ड व पंजीकरण सेवाओं के लिए 122.4 करोड़ रूपए बतौर ‘सेवा-कर’ बाबुओं को चुकाए।
देश में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी जम चुकी हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चाहे बिजली का कनेक्शन लेना हो या खराब मीटर ठीक कराना हो उपभोक्ताओं को विघुत विभाग के अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ती है। विद्यालय की सुविधा प्राप्त करने के लिए गरीब परिवारों को 1.20 करोड़ रूपए की रिश्वत देनी पड़ी। राजधानी में एक सादे समारोह में उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट ‘भारत में भ्रष्टाचार अध्ययन-2007’ के अनुसार देश के एक तिहाई गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बिजली एवं पानी आपूर्ति, रोजगार गारंटी योजना, जमीन रिकार्ड, पंजीकरण, वन, आवास, बैंक एवं पॉलिसी सेवा जैसे 11 सरकारी सेवाओं को प्राप्त करने के लिए रिश्वत देनी पड़ी।
Wednesday, June 18, 2008
गरीब युवक को पढ़ा रही है इंदौर पुलिस
पुलिस ने एक बेरोजगार की जिन्दगी बदलने की ठानी है। इंदौर पुलिस ने भेरू को पहले दुकान और अब पढ़ाई का इंतजाम करके यह बता दिया है कि वह भी जरूरतमंदों की मदद के लिए किसी से पीछे नहीं हैं। पुलिस का जिक्र आते ही अपराध, अपराधी और प्रताड़ना की तस्वीर उभर आती है। मगर इंदौर की पुलिस इस तस्वीर को झुठला देने वाली हैं।
मूसा खेड़ी इलाके में रहने वाले 17 वर्षीय भेरू यादव की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह रोजगार की तलाश में था। इसी दौरान उसकी मुलाकात संयोगिता गंज क्षेत्र की नगर पुलिस अधीक्षक इरबिन शाह से हुई। शाह ने भेरू की तकदीर ही बदलने की ठान ली। उन्होंने लगभग एक माह पहले संयोगिता गंज थाना परिसर में संजीवनी संस्था के माध्यम से भेरू के लिए चाय की दुकान खुलवाई। भेरू को जगह तो थाने में मिल गई मगर जरूरी वस्तुओं के लिए उसके पास रकम नहीं थी। पुलिस ने ही पैसे जुटाकर उसकी चाय की दुकान शुरू कराई।
आज वह दिन भर में 100 से 150 रुपए तक कमा लेता है। उसने कुछ पैसा जमा करना भी शुरू कर दिया है। भेरू की बीते दिनों पढ़ने की इच्छा जागी। उसने इसके लिए इरबिन शाह से मदद मांगी। शाह ने थाना परिसर में ही चलने वाले स्कूल की पांचवी कक्षा में दाखिला दिला दिया और पुस्तकें भी उपलब्ध करा दी। भेरू दिन में दो घंटे स्कूल में जाकर पढ़ता हैं और शेष वक्त में पुलिस को चाय पिलाने का काम करता है। इरबिन शाह बताती हैं कि पिछले दिनों अतिक्रमण हटाया गया था उसमें कुछ गुमटियां भी थाने तक पहुंची थी, उन्हीं में से एक गुमटी को सुधार कर भेरू के लिए तैयार किया गया।
Thursday, June 12, 2008
क्या इन्हें आप अबला नारी कहेंगे!?
राजधानी के मयूर विहार इलाके में दो बहनों ने अपनी जान की बाजी लगाकर दो चेन स्नैचरों का मुकाबला किया और एक को धर दबोचा। झपटमार ने उन पर गोली चलाई। जख्मी होने के बावजूद दोनों ने दबोचे गए बदमाश को नहीं छोड़ा। इतने में भीड़ जमा हो गई, जिसने इस लुटेरे को जमकर पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। दूसरा लुटेरा भाग निकलने में कामयाब रहा।
बड़ी बहन को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसकी हालत स्थिर है। मयूर विहार इलाके के चिल्ला गांव में संतोष (35) छोटी बहन सुदेश (20) के साथ घर से थोड़ी दूर स्थित रोड के किनारे उपले थापने गई थी। सुबह करीब 6:30 बजे दोनों घर से सौ कदम की दूरी पर स्थित बिजली घर के पास ही पहुंची थी कि पल्सर मोटरसाइकिल सवार दो युवक वहां आए।। संतोष को काफी गहने पहने देख कर युवक वहां रूक गए। एक युवक ने संतोष के गले से सोने की चेन झपट ली तथा अन्य गहने भी झपटने लगा। इस पर दोनों बहनें बदमाश से भिड़ गईं।
काफी कोशिशों के बाद भी बदमाश जब खुद को उनके चंगुल से नहीं छुड़ा सका तो उसने अपने साथी से गोली चलाने के लिए कहा। बदमाश ने लड़कियों को डराने के लिए दो गोलियां जमीन की तरफ चलाईं, लेकिन दोनों ने उसके साथी को नहीं छोड़ा। इस पर उसने संतोष की तरफ निशाना साधते हुए गोली चला दी। गोली संतोष के कंधे के पास लगी। गोली के छर्रे छोटी बहन के हाथ और मुंह पर लगे। दोनों बहनों का शोर सुनकर लड़की के चाचा विनोद और संजय अन्य लोगों के साथ घटनास्थल की तरफ दौड़े। लोगों को आते देख एक बदमाश अपनी बाइक से भाग निकला।
बताते हैं कि एक रिक्शे वाले ने अपना रिक्शा अड़ाकर उसे रोकने की कोशिश भी की। दूसरे को लोगों ने दबोच लिया और जमकर धुनाई की। सूचना मिलते ही मयूर विहार थाने के एसएचओ राजेंद्र गौतम और इंस्पेक्टर अनिल कुमार शर्मा अन्य स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बदमाश को हिरासत में लेकर तलाशी ली तो उसके पास से तीन कारतूस और मोबाइल फोन बरामद हुए। उसका नाम उमेश बताया गया है। संतोष को इलाज के लिए लालबहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे होली फैमिली अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि उमेश से दूसरे साथी के बारे में पूछताछ की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि संतोष शादीशुदा है और उसके पति गजराज सेना में कार्यरत हैं। इस समय अपने तीन बच्चों के साथ मायके आई हुई है। सुदेश ने बताया कि सुबह-सुबह अचानक हुई इस घटना से एक पल के लिए तो मैं सहम गई थी लेकिन मैंने फौरन होश संभाला और बदमाश से भिड़ गई। इलाके की महिलाओं का कहना है कि चेन झपटने की घटनाएं यहां पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन अब शायद कोई बदमाश यहां इतनी हिम्मत शायद ही जुटा सके। पूरा गांव दोनों बहनों की इस बहादुरी पर नाज कर रहा है और हर एक की जुबान पर यही बात है कि जान की परवाह किए बगैर दोनों ने बदमाश को धर दबोचा।
पुलिस भी संतोष और सुदेश की बहादुरी की दाद दे रही है।
Sunday, June 8, 2008
ये हमारा आज है, कल हम भी ऐसे ही होंगें
बात सिर्फ राजधानी की ही नहीं है। बेशक अपवाद मिलेंगे लेकिन कमोबेश यह स्थिति हर जगह है। एक राष्ट्रीय समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के 52 प्रतिशत बुजुर्गों के साथ उनके बच्चे व बहुएं गाली गलौज व मारपीट तक करते हैं। वे बुजुर्गों को संपत्ति अपने नाम करवाने के लिए उन पर दबाव डालते हैं। यही नहीं, जब किसी बिल्डर या कंस्ट्रक्शन कंपनी की नजर बुजुर्गों की जायदाद पर पड़ती है, तो अक्सर कई मामलों में ये लोग नए हथकंडे अपनाकर उन्हें अपनी जायदाद कम कीमत पर बेचने के मजबूर करते हैं। पुलिस या तो तमाशबीन बनी रहती है या अक्सर इनसे मिलकर बुजुर्गों को मामला निपटाने के लिए कहती है।
जैसा कि दैनिक हिन्दुस्तान लिखता है, Help Age India द्वारा किए गए सर्वे से यह भी सामने आया है कि संपत्ति के मामले में सबसे ज्यादा बुजुर्गों का उत्पीड़न राजधानी के बसंत विहार, ग्रेटर कैलाश, गुलमोहर पार्क, चित्तरंजन पार्क, फ्रैन्ड्स कालोनी, हौजखास, ग्रीन पार्क, लाजपत नगर, डिफेंस कालोनी जैसे पॉश इलाकों में होता है। दक्षिण दिल्ली के इलाकों में करीब 42 प्रतिशत बुजुर्ग उत्पीड़न के शिकार हैं। इन इलाकों के बेटे व बेटियां अपनी शानदार लाइफ स्टाइल के लिए बुजुर्गों से लगातार पैसों की मांग करती हैं। बुढ़ापे में बच्चों पर निर्भर होने के कारण लोग उनकी मांगों को ठुकारने में असमर्थ रहते हैं। उत्पीड़न के शिकार बुजुर्गों में 49 प्रतिशत पुरुष तथा 28 प्रतिशत महिलाएं हैं।
सर्वे के अनुसार उत्पीड़न के शिकार 44 प्रतिशत बुजुर्गों ने अपने उत्पीड़न की शिकायत पुलिस से की। शेष बुजुर्गों ने पुलिस व कानून पद्धति पर विश्वास न होने, बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव व परिवार की इज्जत आदि के कारण शिकायत नहीं की। मारपीट के अलावा बुजुर्गों के उत्पीड़न में और भी कई तरीके अपनाए जाते हैं। मसलन, उन्हें मित्रों, रिश्तेदारों से अलग-थलग कर दिया जाता है। अगर उनसे मिलना चाहें तो कह दिया जाता है कि वे बोल नहीं सकते। बुजुर्गों को पोते-पोतियों से मिलने नहीं दिया जाता। बुजुर्गों को बाहर निकल कर उनकी आयु के लोगों से मिलने-जुलने या घूमने नहीं दिया जाता।
Wednesday, May 21, 2008
महिला ने बीच बाजार कपड़े उतार कर विरोध प्रदर्शन किया: क्या इसे गांधीगिरी कहेंगे?
बलात्कार की शिकार एक महिला ने पंजाब पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ रिपोर्ट न लिखने के कारण अर्धनग्न होकर विरोध प्रर्दशन किया जिसके कारण पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पीड़ित ने सोमवार, 19 मई को अपने कपड़े उतार दिए और भीड़-भाड वाले फिरोजपुर-लुधियाना राजमार्ग पर पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर चिल्ला-चिल्लाकर विरोध प्रदर्शन किया। रास्ते पर चलने वाले लोग इस तरह के विरोध को देखकर हतप्रभ रह गए।
पुलिस थाने से केवल सौ मीटर की दूरी पर पीड़िता ने विरोध प्रदर्शन किया। एक राहगीर ने इसकी सूचना थाने में दी। थोड़ी देर में ही पुलिस ने महिला को पुलिस हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के लिए किसी महिला पुलिस को नहीं बुलाया गया था। इस घटना से शर्मसार पुलिस ने घोषणा की कि उसने पीड़ित महिला के बयान को लिख लिया है और उसने दो लोगों के खिलाफ कथित रूप से बलात्कार का मामला दर्ज किया है। जिला पुलिस प्रमुख अशोक भट्ट ने कहा कि महिला के विरोध प्रदर्शन से पहले ही मामला दर्ज कर लिया गया था। हालांकि उन्होंने कहा कि महिला द्वारा शिकायत करने के बाद कुछ देरी जरूर हुई क्योंकि पुलिस उस दौरान मामले की जांच कर रही थी।
इस महिला का आरोप है कि उसकी बेटी के सामने ही उसके दो रिश्तेदारों ने उसके साथ बलात्कार किया। इसकी शिकायत लेकर जब वह पुलिस के पास गई तो उसकी शिकायत दर्ज करने के बजाए उसे भगा दिया गया। इस घटना के बाद वह मोगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में भी गई लेकिन वहां भी उसकी शिकायत नहीं सुनी गई। मजबूर होकर इस महिला ने मोगा की बाजार के बीच में खड़े होकर अपने कपड़े उतारकर और अपना सीना पीट-पीटकर लोगों को अपनी आप बीती सुनानी लगी।
Saturday, May 17, 2008
तीन साल के बच्चे ने गोली चलायी!?
हमारी पुलिस तो है ही कमाल की, चाहे वह मध्यप्रदेश की पुलिस हो या उत्तर प्रदेश की पुलिस। उसके लिए कुछ भी असम्भव नहीं हैं। तभी तो उसने बगैर कुछ सोचे विचारे महज तीन साल के मासूम को भी गोली चलाने का आरोपी बना डाला।
मामला मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के नौगांव थाने का है। घटना कोई तीन माह पुरानी है। वीरपुरा गांव में 7 फरवरी को हरिहरण गंगेले पर जान लेवा हमला होता है। उन पर गोली चलाई जाती हैं, मगर वे बच जाते हैं। उनकी रिपोर्ट पर नौगांव पुलिस प्रताप सिंह राय, सुघर सिंह, राघवेन्द्र सिंह और राघवेन्द्र के छोटे भाई (मृगेन्द्र) को आरोपी बना देती हैं। इस मामले के तीन दिन बाद ही प्रताप सिंह की गिरफ्तारी हो जाती हैं और शेष तीन लोग फरार घोषित कर दिए जाते हैं।
दैनिक देशबंधु की ख़बर है कि, घटना के 90 दिन बाद नौगांव के न्यायालय में चालान पेश किया जाता है। राघवेन्द्र जब अपने भाई मृगेन्द्र के साथ न्यायालय में पेश होता है तो सभी हतप्रभ रह जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस ने जिस मृगेन्द्र को हत्या के प्रयास का आरोपी बनाया है, उसकी उम्र महज 3 साल ही हैं। न्यायालय ने मृगेन्द्र पर कार्रवाई करने की बजाए उसे कोर्ट से ले जाने के आदेश दिए। मजे की बात हैं कि पूरे 90 दिन में पुलिस ने प्रकरण की जांच की और चालान न्यायालय में पेश कर दिया। पुलिस ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि आरोपी कौन हैं और उनकी उम्र क्या हैं। इस सम्बन्ध में छतरपुर के पुलिस अधीक्षक डीं श्रीनिवास वर्मा का कहना है कि यह गड़बड़ी विवेचना करने वाले अधिकारी से हुई हैं। उसने पूरे प्रकरण और आरोपियों के बारे में ज्यादा खोज खबर नहीं की। इतना ही नहीं उसने विवेचना पूरी कर ली और न्यायालय में चालान पेश कर दिया। इस प्रकरण ने पुलिस के उस चेहरे को बेनकाब करने का काम किया है जिसे कम लोगों ने देखा हैं। साथ ही पुलिस को अपना वह चेहरा भी दिख गया, जिसे उसने खुद कम देखा है।
Friday, May 16, 2008
लखपति वृद्धा की मौत का इन्तजार कर रहे घरवाले
इस मां का भरा-पूरा परिवार है, बावजूद इसके उसे दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हुए हैं। जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी इस मां से बेटे-बहू और पोतों ने मुंह मोड़ लिया है। वे इसकी कोई सुध नहीं लेते, खाना देना तो दूर की बात है। पड़ोसियों की कृपा दृष्टि के सहारे वह अपने दिन काट रही है। यह हालत तब है जब यह महिला लाखों की संपत्ति की मालकिन है। थक-हार कर महिला ने पिछले महीने पुलिस को लिखित शिकायत भी दी थी लेकिन जनता की ‘हमदर्द’ पुलिस ने भी उसकी कोई सुध नहीं ली।
यह दर्दभरी व्यथा है नांगलोई स्थित जनता मार्केट के वाई ब्लॉक में रहने वाली 75 वर्षीय लीला देवी की। लाखों की संपत्ति की वारिस इस वृद्धा का एक बेटा है, जो अपनी पत्नी के साथ पास ही के एक अन्य मकान में रहता है। जबकि दो शादीशुदा पोते हैं। इनमें अचल नामक पोता अपनी पत्नी के साथ बुजुर्ग महिला के दो मंजिला मकान में रहता है, वहीं दूसरा अपने मां-बाप के साथ। वृद्धा के बेटे व पोतों का अपना बिजनेस है। 26 साल पहले वृद्धा के पति ने पचास हजार कीमत का एक प्लाट यहां खरीदा था। बाद में अपनी खून-पसीने की कमाई लगा उस प्लॉट को एक आशियाने का रूप दिया। करीब आठ माह पूर्व इनके पति प्रभु दयाल(80) का देहान्त हो गया और तब से ही इस अभागी मां का जीवन बद से बदतर होता चला गया। अब उसे यही डर सताता है कि जिस तरह उसके पति का देहान्त तड़प-तड़प कर हुआ, कहीं उसे भी वह दिन न देखना पड़ जाए।
जब ‘राष्ट्रीय सहारा’ ने जब लीलादेवी से बातचीत की तो उन्होंने ‘बाप बड़ा न भईया सबसे बड़ा रूपैया’ वाली कहावत को दोहरा कर अपना हाल बयां किया। उन्होंने बताया कि मुझे कई महीनों से सिर्फ एक वक्त का खाना दिया जा रहा है। वो भी मिला तो ठीक वरना दूध-ब्रेड ही सहारा है। पड़ोसी ही मेरा हालचाल पूछते हैं और मुझे खाना देते हैं। मेरे परिवार वाले मेरी संपत्ति को हड़पने के लिए लालयित है। विशेषकर मेरा इकलौता बेटा व बड़ा पोता। मेरे परिवार के लोग सिर्फ अब मेरी अर्थी के उठने की बाट जोह रहे हैं। यही कारण है कि आए दिन किसी न किसी बात को लेकर बेटे-बहू के साथ पोता तक ताने मारता है। बकौल लीला देवी, पोते की बहू तो ठीक है लेकिन उसकी ज्यादा चलती नहीं है। अंत में अभागी वृद्धा ने यही कहा कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। जैसा मेरे साथ व्यवहार हो रहा है, उन्हें भी यह दिन देखने को जरूर मिलेंगे।
Thursday, May 8, 2008
चार साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट
पुलिस जांच के मामलों को कितनी गंभीरता से अंजाम देती है, इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब एक चार साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट लगा दिया गया। पुलिस प्रशासन ने ऐसा करने वाले इंस्पेक्टर तथा एक अन्य पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है।
उत्तरप्रदेश में सुलतानपुर के हलियापुर थाना की पुलिस ने गत 20 अप्रैल को जमीनी विवाद में चार साल के एक बच्चे पर गुंडा एक्ट लगा दिया। इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक डीसी मिश्र ने इंस्पेक्टर तथा एक अन्य पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया। उत्तरप्रदेश राज्य पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल के पहले सप्ताह में गांव झाऊ का पुरवा में शांति भंग का मामला दर्ज किया गया था जिसमें इंस्पेक्टर हरेन्द्र प्रताप सिंह ने बिना सत्यता की जांच किए ही अदालत में धारा 110 के तहत कार्रवाई की रिपोर्ट भेज दी। हालांकि बाद में अदालत को यह भी बताया गया कि रिपोर्ट गलती से भेजी गयी है। इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जाए। पुलिस अधीक्षक ने इस गलती को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर और कांस्टेबल तजमूल हुसैन को निलंबित कर दिया।
Wednesday, April 30, 2008
दूल्हे का एक जाम, डेढ़ लाख का
कन्नौज के शाहपुर निवासी और रिटायर्ड टीचर सत्य प्रकाश श्रीवास्तव की बेटी संध्या और कानपुर के रावतपुर निवासी विजय श्रीवास्तव की शादी हो रही थी, लेकिन वहां एक अजीबोगरीब हंगामा खड़ा हो गया। शहर के कल्याणपुर थाना इलाके में दूल्हे को मंच पर अपने दोस्तों के साथ जाम टकराना महंगा पड़ गया।
जयमाला तक तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा, लेकिन इसके बाद दूल्हे को मंच पर अपने दोस्तों के साथ जाम टकराना महंगा पड़ गया। इस हरकत पर जब लड़की वालों ने ऐतराज किया, तो दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि नशे में धुत्त दूल्हे ने अपने होने वाले ससुर का धक्का दे दिया और गालियां बक दीं।
बात जब दुल्हन के कानों तक पहुंची, तो उसने शादी करने से ही इनकार कर दिया। और तो और लड़की वालों ने दूल्हे और उसकी बहन सहित करीब डेढ़ दर्जन बरातियों को बंधक बना लिया। मामला पुलिस तक पहुंचा, तो शादी तोड़ने पर समझौता हुआ। लड़के वालों ने हर्जाने के तौर लड़की वालों को डेढ़ लाख रुपये देकर जान छुड़ाई।
Sunday, April 6, 2008
यहाँ भारत में भी एक 'कश्मीर' है, लेकिन भारतीय है!
इसे बुरी तरह यातना दी गई। वो कहां से आया , कहां का रहने वाला है पूरी तरह भूल चुका है। कोई अपराधी भी नहीं है। अपनी याददाश्त पूरी तरह खो चुका है। इसकी फाइल खो गई है। अदालत के आदेश के बाद राजस्थान पुलिस जेल से 34 साल बाद छूटने वाले प्रभुनाथ नाम के एक व्यक्ति को लेकर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के गांव-गांव में भटक रही है। पुलिस प्रभुनाथ को वापस उसका परिवार दिलाना चाहती है। लेकिन प्रभुनाथ के परिवार का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि प्रभुनाथ जेल में रहकर अपनी याददाश्त पूरी तरह खो चुका है।
प्रभुनाथ कोई अपराधी भी नहीं है, उसकी गलती तो सिर्फ इतनी थी कि वह रोजी-रोटी की तलाश में राजस्थान गया और फिर किसी तरह भारत-पाक सीमा पर पहुंच गया। वहीं श्रीगंगानगर पुलिस ने गिरफ्तार करके उसे 14 मई 1974 को जेल भेज दिया। प्रभुनाथ पर पाकिस्तान का जासूस होने का शक किया जाने लगा। जेल में पूछताछ के दौरान इसे बुरी तरह यातना दी गई।
IBN7 के अनुसार, कुछ दिनों तक तो पेशी होती रही लेकिन कुछ दिनों बाद इसकी फाइल खो गई। फिर तो प्रभुनाथ का वजूद भी जेल में खो गया। आखिरकार पुरानी फाइलों की निपटाने के दौरान किसी के हाथ प्रभुनाथ की फाइल भी लग गई। बात अदालत तक पहुंची और प्रभुनाथ को रिहा करने का आदेश दिया गया। यही नहीं अदालत ने प्रशासन को यह आदेश भी दिया कि प्रभुनाथ का घर ढूंढकर उसे उसके परिवार से मिलाया जाए। लेकिन ये काम पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया, क्योंकि प्रभुनाथ अब सिर्फ एक ही शब्द बोलता है ‘बस्ती’। बहरहाल राजस्थान पुलिस ने पुरानी फाइलों के आधार पर प्रभुनाथ का घर ढूंढना शुरु कर दिया है।
लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है जितना पुलिस समझ रही थी। बस्ती जिला बंटकर तीन जिलों में बदल गया है। बहुत से थानों के नाम बदल चुके हैं। शायद गांवों के नाम भी अब वो नहीं रहे।
Thursday, March 20, 2008
डा. कलाम ट्रैफिक जाम में फँसे, पैदल चले
बुधवार, १९ मार्च की शाम करीब छह बजे दिल्ली के सीरीफोर्ट सभागार में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की पुस्तक 'माई कंट्री माई लाइफ' का विमोचन समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति डा। कलाम थे। समारोह में दर्जनों वीवीआईपी भी आमंत्रित थे। अनुमान है कि करीब 2000 कारों से लोग यहां आए। समारोह स्थल पर आने के लिए शाम चार बजे के बाद से ही सीरीफोर्ट जाने वाला अगस्त क्रांति मार्ग वाहनों से अट गया।
साढ़े पांच बजे के बाद यहां से वीवीआईपी काफिला गुजरने लगा। यातायात पुलिस इन लोगों को रास्ता ही मुहैया नहीं करा पा रही थी। इसी दौरान पूर्व राष्ट्रपति डा। एपीजे अब्दुल कलाम भी अगस्त क्रांति मार्ग पर जाम में फंस गए। पूर्व राष्ट्रपति ने करीब 25 मिनट तक जाम खुलने का इंतजार किया। जब घड़ी की सुई शाम छह बजे को पार करने लगी तो वे कार से उतर पड़े। यह देख कमांडो दस्ते ने उन्हें घेर लिया। उनसे आग्रह किया कि वह गाड़ी में ही बैठे रहें, लेकिन पहले से काफी विलंब हो चुके डा. कलाम ने प्रोटोकॉल को दरकिनार कर पैदल ही चलना शुरू कर दिया। करीब आधा किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद वे कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
जब इसकी जानकारी पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को मिली तो उन्हें बहुत दुख हुआ और वे लगभग भागते हुए सभागार से बाहर निकले। कुछ दूर पैदल चलने के बाद वे डा. कलाम के पास पहुंचे और उन्हें साथ लेकर सभागार में आए।