उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट परीक्षा में मातृभाषा हिंदी में ही सवा दो लाख परीक्षार्थी फेल हो गये। 2008 की इंटरमीडिएट परीक्षा में सूबे में 17 लाख 4 हजार 660 परीक्षार्थी शामिल हुये थे। इनमें 11 लाख 68 हजार 889 उत्तीर्ण हुये। इस प्रकार 5 लाख 71 हजार 771 परीक्षार्थी फेल हो गये।
इंटरमीडिएट में हिंदी दो विषयों 'हिंदी' व 'सामान्य हिंदी' के रूप में पढ़ाई जाती है। सामान्य हिंदी विज्ञान व वाणिज्यिक वर्ग में तथा अन्य वर्गो में हिंदी का पर्चा होता है। इस वर्ष हिंदी में 3 लाख 98 हजार 877 छात्र शामिल हुए थे। इनमें से 3 लाख 4895 सफल रहे। 5 लाख 76 हजार 713 छात्राओं ने परीक्षा दी जिनमें 5 लाख 11 हजार 311 सफल रहीं। छात्राओं का पास प्रतिशत 91. 07 रहा तो छात्र उनसे पीछे रहे। दोनों को मिलाकर 9 लाख 60 हजार 290 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें 8 लाख 16 हजार 206 ने सफलता पाई। इस प्रकार 1 लाख 44 हजार 84 परीक्षार्थी फेल हो गये। सामान्य हिंदी में भी छात्राएं आगे रहीं। उनका पास प्रतिशत 94.49 प्रतिशत रहा जबकि छात्र 87.30 प्रतिशत ही पास हो सके। सामान्य हिंदी में शामिल होने वाले छात्र छात्राओं की संख्या 6 लाख 73 हजार 300 थी। इनमें 5 लाख 96 हजार 952 पास हुये। हिंदी व सामान्य हिंदी दोनों में मिला कर कुल 2 लाख 20 हजार 132 परीक्षार्थी फेल हुए। हिंदी का 84.99 व सामान्य हिंदी का 88.70 प्रतिशत रहा है।
दैनिक जागरण के अनुसार, गुरुनानक इंटर कालेज के हिंदी प्रवक्ता अखिलेश कुमार शुक्ला कहते हैं, 'अंग्रेजी तो विदेशी भाषा है परंतु अपनी भाषा में इतनी संख्या में छात्र-छात्राओं का अनुत्तीर्ण होना दुर्भाग्यपूर्ण है। बोर्ड को पाठ्यक्रम, शिक्षण विधि, शिक्षकों की उपलब्धता आदि की समीक्षा कर इसके कारण तलाश कर हल निकालना चाहिये।' दूसरी भारतीय भाषाओं की सफलता का आकलन करें तो हिंदी व संस्कृत से भी बढ़कर पंजाबी भाषा का परिणाम सर्वाधिक रहा है। अच्छी बंगला जानने वालों में छात्राएं आगे हैं। छात्राएं शत प्रतिशत सफल रहीं तो छात्र 44 प्रतिशत ही सफल हुए।
भारत की तलाश
Tuesday, May 27, 2008
दो लाख से ज़्यादा परीक्षार्थी हिंदी में फेल हो गए, उत्तरप्रदेश में!
Monday, May 12, 2008
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को भूली सरकार
विदेशियों के शासन के खिलाफ 1857 में शुरू हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को 150 साल खामोशी के साथ पूरे हो गए। 1857 में भड़की आजादी की पहली लड़ाई के 150 वें वर्ष की शुरूआत में तो कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ था साथ ही पूरे वर्ष कार्यक्रमों का सिलसिला चलने का एलान हुआ था। सरकारी स्तर पर १० मई के दिन किसी बड़े कार्यक्रम का आयोजन नहीं हुआ। आज जब 150 वर्ष पूरे हुए तो किसी को आजादी के उन परवानों की याद नहीं आई जिन्होंने पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को झकझोर कर रख दिया था। ब्रिटिश हुकूमत ने इसी संग्राम की दहशत में कंपनी शासन का अंत कर सम्राट का सिक्का चलाना शुरू किया था। उत्तर प्रदेश प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बहुत बड़ा केंद्र रहा था लेकिन वहां की सरकार ने भी १० मई के दिन कुछ खास नहीं किया।
उत्तर प्रदेश जो कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बहुत बड़ा केंद्र रहा था और आज के दिन अवध में इस लड़ाई का बिगुल बजा था और सबसे भयंकर संग्राम चला था। जिसकी मूक गवाह रेजीडेंसी आज भी है जहां एक हजार से अधिक अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया था। लखनऊ ही वह शहर है जहां गली गली मोर्चे बने थे और ब्रिटिश फौजों को आलमबाग से रेजीडेंसी तक का सफर तय करने में कई दिन लग गये थे और वहां पर उन्हें पराजय हाथ लगी थी। 10 मई की तारीख स्वाधीनता संग्राम के इतिहास की सर्वाधिक महत्वपूर्ण तारीख है क्योंकि आज ही के दिन 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ योजनाबद्ध ढंग से लड़ाई शुरू होनी थी। हालांकि मंगल पांडे और ईश्वरी प्रसाद ने इस तय तारीख से काफी पहले ही मार्च और अप्रैल महीने में आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया था लेकिन लखनऊ योजनाबद्ध संग्राम की शुरूआत की तारीख 10 मई को ही तोपों को दागकर की गई थी।
आज हमें आजाद हुए 60 साल पूरे हो चुके हैं इतने कम समय में हम तरक्की के नये कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं लेकिन जरा सोचिए जब देश आजाद हुआ तब हमारे पास क्या था सिर्फ आजादी को छोड़कर। देश का निर्माण तो बाद में हुआ। लेकिन यदि हमें प्रगति की निरन्तरता को बनाए रखना है तो हमें अपने इतिहास को संजो कर रखना होगा ताकि हमें खुशी देने के लिए कफन आ॓ढ़ लेने वालों के प्रति हम अपने कर्तव्य को निभा सकें उन्हें नमन कर सकें।
इतिहासकार मालती मलिक का कहना है कि 10 मई की तारीख स्वाधीनता संग्राम के इतिहास की सर्वाधिक महत्वपूर्ण तारीख है, क्योंकि आज ही के दिन 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ योजनाबद्ध ढंग से लड़ाई शुरू हुई थी। मंगल पांडे और ईश्वरी प्रसाद ने हालांकि 1857 के मार्च और अप्रैल महीने में ही आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया था लेकिन योजनाबद्ध संग्राम की शुरुआत की तारीख 10 मई मानी जाती है। मेरठ, झांसी, लखनऊ और कानपुर इस संग्राम के बहुत बड़े केंद्र थे लेकिन आज के दिन उत्तरप्रदेश सरकार ने भी कोई खास आयोजन नहीं किया। मलिक ने कहा कि 10 मई की तारीख देश के गौरव का दिन है लेकिन इसे भुला देना शर्म की बात है। 10 मई को भड़की चिनगारी दिल्ली तक पहुंची थी और आजादी के मतवालों ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे, लेकिन अंग्रेजों की कुटिल नीति और अपनों की ही दगाबाजी से यह आंदोलन सफल नहीं हो पाया।
Thursday, May 8, 2008
चार साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट
पुलिस जांच के मामलों को कितनी गंभीरता से अंजाम देती है, इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब एक चार साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट लगा दिया गया। पुलिस प्रशासन ने ऐसा करने वाले इंस्पेक्टर तथा एक अन्य पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है।
उत्तरप्रदेश में सुलतानपुर के हलियापुर थाना की पुलिस ने गत 20 अप्रैल को जमीनी विवाद में चार साल के एक बच्चे पर गुंडा एक्ट लगा दिया। इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक डीसी मिश्र ने इंस्पेक्टर तथा एक अन्य पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया। उत्तरप्रदेश राज्य पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल के पहले सप्ताह में गांव झाऊ का पुरवा में शांति भंग का मामला दर्ज किया गया था जिसमें इंस्पेक्टर हरेन्द्र प्रताप सिंह ने बिना सत्यता की जांच किए ही अदालत में धारा 110 के तहत कार्रवाई की रिपोर्ट भेज दी। हालांकि बाद में अदालत को यह भी बताया गया कि रिपोर्ट गलती से भेजी गयी है। इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जाए। पुलिस अधीक्षक ने इस गलती को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर और कांस्टेबल तजमूल हुसैन को निलंबित कर दिया।
Sunday, May 4, 2008
ट्रक ड्राइवर के बेटे ने जीता अमेरिकी टैलंट हंट
फिल्म 'नमस्ते लंदन' में तो अक्षय कुमार ने विरोधी पक्ष के छक्के छुड़ा दिए थे, बेसबाल के खेल में। वास्तविकता के धरातल पर उत्तर प्रदेश के ट्रक ड्राइवर के बेटे और अंग्रेजी न बोल सकने वाले रिंकू ब्रह्मादीन सिंह ने बेसबाल के एक Talent Hunt में ऐसा जोश दिखाया कि उन्होंने न सिर्फ इस प्रतियोगिता को जीता, बल्कि इस खेल की बारीकियों की बेहतर समझ के लिए वह अमेरिका रवाना हो रहे हैं।
एक अमेरिकी खेल कंपनी ने भारत के 30 शहरों में टैलंट हंट कराकर 30 हजार युवाओं के बीच से रिंकू और दिनेश कुमार पटेल को चुना है। दोनों युवा खिलाड़ियों को सैन फ्रैंसिस्को के जानेमाने प्रशिक्षकों से एक साल की ट्रेनिंग दी जाएगी। अगर इन्होंने ट्रेनिंग के दौरान उम्दा प्रदर्शन किया तो 2009 के सत्र में इन्हें मेजर बेसबॉल टीम में शामिल होने का मौका मिल सकता है।
मिलियन डॉलर आर्म हंट में रिंकू ने 89 मील प्रति घंटे की रफ्तार से बेसबॉल थ्रो करके सबसे तेज थ्रोअर के रूप में पहचान बनाई और एक लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 40 लाख रु.) का पुरस्कार भी जीता। इस हंट में दिनेश दूसरे नंबर पर रहे। अमेरिकी राजदूत डेविड सी. मलफर्ड ने इनके चयन पर बधाई देते हुए कहा कि इन दोनों युवा खिलाड़ियों के लिए यह सुनहरा मौका तो है ही, Major Leauge Baseball के लिए भी यह अनोखा मौका है। इस लीग में दुनियाभर के कई खिलाड़ी चुने जाते हैं, लेकिन भारत से कोई खिलाड़ी इसमें हिस्सा नहीं ले रहा था।
Monday, March 31, 2008
७२ घंटे: ३६ कर्मचारी
सिर्फ 72 घंटे के लिए गए एक अधिकारी ने 18 लोगों को नौकरी दे दी और 18 लोगों का निलम्बन समाप्त कर दिया। अपने इस निर्णय को यह अफसर यह कहकर सही ठहरा रहे हैं कि उन्होंने जो कुछ किया न्याय संगत किया। इसमें गलत कुछ भी नहीं है। लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है। नियुक्तियां इतनी हड़बड़ी में की गईं कि जाति और शिक्षा प्रमाण पत्रों का सत्यापन तक नहीं हो सका। अब कुछ अभ्यर्थी इधर-उधर भाग रहे हैं और उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही है।
हिन्दुस्तान टाइम्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तरप्रदेश महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में निदेशक पद पर बीते चार मार्च को आवास विभाग के विशेष सचिव राम बहादुर का तबादला किया गया। उन्होंने पांच मार्च से काम शुरू किया। छह मार्च को शिवरात्रि की छुट्टी पड़ गई और सात मार्च को उनका तबादला लखनऊ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष पद पर हो गया। लेकिन रामबहादुर इन दोनों पदों पर एक साथ 13 मार्च तक काम करते रहे। ऐसी परम्परा है कि तबादला होने के बाद अधिकारी बड़े निर्णय नहीं लेते। लेकिन इस विभाग में नए अफसर के आने का इंतजार नहीं किया गया।
विभाग में विभिन्न पदों पर बैकलॉग की भर्ती की प्रक्रिया चल रही थी। कार्मिक नियमावली के मुताबिक प्रमाणपत्रों के बिना सत्यापन कराए नियुक्ति नहीं की जा सकती। लेकिन न तो अभ्यर्थियों की जाति प्रमाणपत्रों की जांच पड़ताल कराई गई और न ही उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। प्रमाणपत्रों की जांच के निर्णय को नजरंदाज करते हुए विभिन्न पदों पर 18 कर्मचारियों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए। इसी दौरान 18 निलम्बित कर्मचारियों को बहाल करने के आदेश भी जारी किए गए। इनमें किसी पर पुष्टाहार बेचने का आरोप था तो किसी को रिश्वत लेते पकड़ा गया था। कुछ को जिलाधिकारी स्तर पर निलम्बित किया गया था।
इन कर्मचारियों को विभाग ने आरोप पत्र जारी किया और पर्याप्त उत्तर न मिल पाने के कारण मामले विचाराधीन थे। लेकिन रामबहादुर ने निलम्बित कर्मचारियों को बहाल कर दिया। दलील थी कि किसी भी कर्मचारी को लम्बे समय तक निलम्बित नहीं रखा जा सकता, या तो कर्मचारी को बहाल किया जाए अथवा उसे सेवा मुक्त किया जाए।