उसने दोनों बेटों की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों बेटों को नौ-नौ महीने कोख में रखा, जन्म दिया, उंगली पकड़कर चलना सिखाया। लेकिन उन्हीं बेटों ने उसे दर-दर की ठोकरें खाने के लिए बेघर कर दिया। आज ये माँ खुद को भी ठीक से नहीं संभाल सकती। वक्त और उम्र की मार ने तो केवल उसके शरीर को कमजोर किया, लेकिन उसका कलेजा छलनी किया उसके दोनों बेटों के व्यवहार ने। आजकल ये माँ, फीनो, तख्त श्री केसगढ़ साहिब में सेवादारों के रहमोकरम पर जी रही है।
फीनो के नाम अमृतसर में कई एकड़ जमीन थी, लेकिन बेटों ने सारी जमीन अपने नाम करवाकर फीनो को घर से निकाल दिया। फीनो का एक बेटा बटाला में और दूसरा अमेरिका में रहता है। फीनो का एक पोता तरसेम सिंह अजनाला में सीआईडी इंस्पेक्टर है। घर से निकाले जाने के बाद फीनो इधर-उधर भटकती रही। कई माह पहले जालंधर रेलवे स्टेशन पर अधमरी हालत में पड़ी फीनो पर एक दिन हेल्प लाइन संस्था की नजर पड़ी। इस संस्था की सदस्य बीबी राजिंदर कौर ने बताया कि हेल्प लाइन संस्था ने फीनो की सेवा की व उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। उसका पूरी तरह इलाज करवाया। जब समाचार पत्रों में फीनो के बारे में खबर छपी तो उसका पोता उसे अपने घर ले गया। लेकिन कुछ समय बाद ही उसे फिर घर से निकाल दिया गया।
जागरण में आयी ख़बर के मुताबिक, हाल ही में तख्त श्री केसगढ़ साहिब माथा टेकने आई बीबी राजिंदर कौर ने जब फीनो को यहां देखा तो वह हैरान रह गई। उन्हें पता चला कि फीनो यहां कई सप्ताह से रह रही है। तख्त श्री केसगढ़ साहिब के मैनेजर ने बताया कि यह औरत अपने आप को भी नहीं संभाल पाती है और जगह-जगह गंदगी फैला देती है। औरत होने के नाते सेवादारों को भी उसकी देखभाल करने में मुश्किलें पेश आती हैं। हालांकि सेवादार अपने तरफ से उसका पूरा खयाल रखते हैं, लेकिन फीनो को अपनों का साथ नहीं मिला और उम्र के इस पड़ाव पर वह अपनी जिंदगी इसी बदहाली में गुजारने पर मजबूर है। तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी त्रिलोचन सिंह ,समेत अनेक गणमान्यों ने कहा कि जन्म देने वाली मां के साथ इस तरह का बर्ताव करने वाले कुपुत्रों का सामाजिक बायकाट कर देना चाहिए।
भारत की तलाश
Sunday, July 27, 2008
एक बेटा बटाला में, दूसरा अमेरिका में, पोता CID इंसपेक्टर: माँ गुरूद्वारे में, अधमरी, बेसहारा
Sunday, May 4, 2008
ट्रक ड्राइवर के बेटे ने जीता अमेरिकी टैलंट हंट
फिल्म 'नमस्ते लंदन' में तो अक्षय कुमार ने विरोधी पक्ष के छक्के छुड़ा दिए थे, बेसबाल के खेल में। वास्तविकता के धरातल पर उत्तर प्रदेश के ट्रक ड्राइवर के बेटे और अंग्रेजी न बोल सकने वाले रिंकू ब्रह्मादीन सिंह ने बेसबाल के एक Talent Hunt में ऐसा जोश दिखाया कि उन्होंने न सिर्फ इस प्रतियोगिता को जीता, बल्कि इस खेल की बारीकियों की बेहतर समझ के लिए वह अमेरिका रवाना हो रहे हैं।
एक अमेरिकी खेल कंपनी ने भारत के 30 शहरों में टैलंट हंट कराकर 30 हजार युवाओं के बीच से रिंकू और दिनेश कुमार पटेल को चुना है। दोनों युवा खिलाड़ियों को सैन फ्रैंसिस्को के जानेमाने प्रशिक्षकों से एक साल की ट्रेनिंग दी जाएगी। अगर इन्होंने ट्रेनिंग के दौरान उम्दा प्रदर्शन किया तो 2009 के सत्र में इन्हें मेजर बेसबॉल टीम में शामिल होने का मौका मिल सकता है।
मिलियन डॉलर आर्म हंट में रिंकू ने 89 मील प्रति घंटे की रफ्तार से बेसबॉल थ्रो करके सबसे तेज थ्रोअर के रूप में पहचान बनाई और एक लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 40 लाख रु.) का पुरस्कार भी जीता। इस हंट में दिनेश दूसरे नंबर पर रहे। अमेरिकी राजदूत डेविड सी. मलफर्ड ने इनके चयन पर बधाई देते हुए कहा कि इन दोनों युवा खिलाड़ियों के लिए यह सुनहरा मौका तो है ही, Major Leauge Baseball के लिए भी यह अनोखा मौका है। इस लीग में दुनियाभर के कई खिलाड़ी चुने जाते हैं, लेकिन भारत से कोई खिलाड़ी इसमें हिस्सा नहीं ले रहा था।