अदालत के हुक्म पर पचास लाख रुपए का जुर्माना भुगत चुकी वोडाफोन कंपनी अब सीधे सीधे लड़कियों की दलाली पर उतर आई है। हजारों लड़कियां और गृहणियां हैं जिन्हें दिन में तीन घंटे कहीं से भी आने वाले फोन पर हर तरह की बातें करने के बदले पचास रुपए रोज दिए जाते हैं ... एक लड़की को तीन हजार रुपए महीने मिलते हैं और उसके लिए तीन घंटे रोज बात करना अनिवार्य है। वोडाफोन हर कॉल का दो रुपए प्रति मिनट लेता है यानी तीन घंटे में छत्तीस सौ रुपए कमाता है। मतलब साफ है कि इन गरीब लड़कियों से भी वोडाफोन छह सौ रुपए महीना कमा रहा ...
भारत की तलाश
Friday, September 18, 2009
वोडाफोन अब लड़कियों की दलाली पर उतर आई!!
Saturday, March 28, 2009
स्कूलों में फीस वृद्धि का मामला तूल पकड़ने लगा
छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के बहाने स्कूलों में फीस वृद्धि के प्रयास के खिलाफ भारत के अभिभावक संघ लामबंद हो रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर जनहित याचिका दायर होने के बाद अब देश के बाकी राज्यों में भी अभिभावक अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बीच सत्र में फीस बढ़ाए जाने पर कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत की ओर से फीस वृद्धि पर एतराज जाहिर करने के बाद देश भर में स्कूलों के खिलाफ धरने-प्रदर्शनों का दौर भी शुरू हो गया है।
दैनिक भास्कर में अमित सिंह की रिपोर्ट है कि दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर जनहित याचिका दाखिल करने वाले एडवोकेट अशोक अग्रवाल से, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब और गोवा समेत देश के कई शहरों के अभिभावक उनके संपर्क कर रहे हैं। दिल्ली में दायर जनहित याचिका को इन शहरों में फीस वृद्धि का विरोध कर रहे लोगों को भेजा जा रहा है। इस आधार पर जल्द ही वहां भी लोग अदालत की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
Wednesday, April 9, 2008
सिगरेट जलईले, हम अदालत तक गए थे ना!
हर दिन कोई न कोई ऐसी बात सामने आ जाती है, जो कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख देती है। इसी का एक जीता-जागता उदाहरण है बिहार के सीतामढ़ी जिले की एक घटना, जिसमें वहां के स्थानीय सांसद के रिश्तेदारों ने एक शिक्षक को सिगरेट से तब-तक दागा जब तक वह बेहोश होकर गिर नहीं गया।
इस शिक्षक का नाम विमलेश है। उसका गुनाह सिर्फ इतना है कि उसने सांसद सीताराम यादव के रिश्तेदारों के खिलाफ अदालत जाने की हिम्मत जुटाई थी। दरअसल विमलेश की बहन की अपने कालेज में किसी बात को लेकर एक लड़की से कहा-सुनी हो गई। यह लड़की सांसद की रिश्तेदार थी। इसलिए सांसद के रिश्तेदारों ने मिलकर विमलेश की बहन की पिटाई कर दी।
इस बात को लेकर विमलेश ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन मामला जब आगे नहीं बढ़ा तो विमलेश इस शिकायत को लेकर अदालत चला गया। सांसद के रिश्तेदारों को विमलेश का अदालत जाना पसंद नहीं आया।
उन लोगों ने पहले तो विमलेश से मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव डाला। जब विमलेश नहीं माना तो इन रिश्तेदारों ने विमलेश को एक दिन पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की।
उन लोगों का इससे भी दिल नहीं भरा तो उन्होंने विमलेश के मुंह में कपड़ा ठूस कर उसके हाथ को सिगरेट से जलाना शुरु किया। इन बदमाशों ने विमलेश के साथ इस तरह की हैवानियत तब तक की जब तक वह बेहोश होकर गिर नहीं पड़ा। सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब इस शिकायत को लेकर विमलेश पुलिस थाने पहुंचा तो इसकी मदद करने के बजाए पुलिस ने उसे वहां से भाग जाने के लिए कहा। बाद में पुलिस ने किसी तरह से यह मामला दर्ज भी किया लेकिन इस मामले में किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की गई है।
Sunday, April 6, 2008
यहाँ भारत में भी एक 'कश्मीर' है, लेकिन भारतीय है!
इसे बुरी तरह यातना दी गई। वो कहां से आया , कहां का रहने वाला है पूरी तरह भूल चुका है। कोई अपराधी भी नहीं है। अपनी याददाश्त पूरी तरह खो चुका है। इसकी फाइल खो गई है। अदालत के आदेश के बाद राजस्थान पुलिस जेल से 34 साल बाद छूटने वाले प्रभुनाथ नाम के एक व्यक्ति को लेकर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के गांव-गांव में भटक रही है। पुलिस प्रभुनाथ को वापस उसका परिवार दिलाना चाहती है। लेकिन प्रभुनाथ के परिवार का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि प्रभुनाथ जेल में रहकर अपनी याददाश्त पूरी तरह खो चुका है।
प्रभुनाथ कोई अपराधी भी नहीं है, उसकी गलती तो सिर्फ इतनी थी कि वह रोजी-रोटी की तलाश में राजस्थान गया और फिर किसी तरह भारत-पाक सीमा पर पहुंच गया। वहीं श्रीगंगानगर पुलिस ने गिरफ्तार करके उसे 14 मई 1974 को जेल भेज दिया। प्रभुनाथ पर पाकिस्तान का जासूस होने का शक किया जाने लगा। जेल में पूछताछ के दौरान इसे बुरी तरह यातना दी गई।
IBN7 के अनुसार, कुछ दिनों तक तो पेशी होती रही लेकिन कुछ दिनों बाद इसकी फाइल खो गई। फिर तो प्रभुनाथ का वजूद भी जेल में खो गया। आखिरकार पुरानी फाइलों की निपटाने के दौरान किसी के हाथ प्रभुनाथ की फाइल भी लग गई। बात अदालत तक पहुंची और प्रभुनाथ को रिहा करने का आदेश दिया गया। यही नहीं अदालत ने प्रशासन को यह आदेश भी दिया कि प्रभुनाथ का घर ढूंढकर उसे उसके परिवार से मिलाया जाए। लेकिन ये काम पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया, क्योंकि प्रभुनाथ अब सिर्फ एक ही शब्द बोलता है ‘बस्ती’। बहरहाल राजस्थान पुलिस ने पुरानी फाइलों के आधार पर प्रभुनाथ का घर ढूंढना शुरु कर दिया है।
लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है जितना पुलिस समझ रही थी। बस्ती जिला बंटकर तीन जिलों में बदल गया है। बहुत से थानों के नाम बदल चुके हैं। शायद गांवों के नाम भी अब वो नहीं रहे।