मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में एक शख्स खुद ही मानव बम बन गया। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के रहने वाले मुलायम सिंह ने अपने बदन पर बम बांधकर अपनी बीवी के साथ खुद को उड़ा लिया। मुलायम सिंह की तो दुर्घटना स्थल पर ही मौत हो गई लेकिन उसकी बीवी नीलू सिंह बच गई। वो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
आईबीएन-7 के मुताबिक हुआ यह कि मुलायम सिंह की बीवी नीलू रक्षाबंधन पर अपने मायके गई हुई थी। मुलायम सिंह कई बार अपनी बीवी को लेने अपनी ससुराल गया लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी। इस घटना वाले दिन से एक दिन पहले भी वो पत्नी को लेने ससुराल गया था। चश्मदीदों के मुताबिक, जिस दिन वो दोबारा ससुराल पहुंचा लेकिन इस बार उसके इरादे बहुत ही खतरनाक थे। उस दिन मुलायम सिंह मानव बम बनकर आया था। उसने अपनी बीवी को बाहर बुलाया और उसे अपने साथ चलने के लिए कहा। जब पत्नी ने मना कर दिया तो मुलायम ने पेट में बंधे बम के ट्रिगर को दबा दिया। मुलायम सिंह ने अपने पेट में जो बम बांधा हुआ था उसे उसने डिटोनेटर के जरिए उड़ाया था।
भारत की तलाश
Wednesday, September 10, 2008
बदन पर बम बांधकर बीवी के साथ खुद को उड़ा लिया
शराब पीकर नाच रहा था क्रिकेटर, पुलिस उपाधीक्षक और उसकी आईपीएस पत्नी के साथ!?
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक शॉपिंग मॉल में स्थित डिस्कोथेक में कुछ वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तथा एक अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेटर द्वारा कथित रुप से शराब पीकर डांस करने के मामले की रिपोर्ट मंगाई है। पुलिस महानिदेशक द्वारा मंगाई गई इस रिपोर्ट के साथ अपेक्षा की गई है कि सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी हरकतें नहीं होनी चाहिए।
उच्च पदस्थ पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस महानिदेशक ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया। उन्होंने इस मामले में कैमरे में कैद तस्वीरों का भी संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के लिए यह और शर्म की बात है कि केन्द्र में प्रतिनियुक्ति, लेकिन यहां तैनात एक पुलिस उपाधीक्षक और उसकी आईपीएस पत्नी भी इसमें शामिल थी। 'वार्ता' की ख़बर है कि भारतीय क्रिकेट टीम का एक तेज गेंदबाज भी इस “एल्कोहल पार्टी” में शामिल था।
इस मामले में पड़े छापे का नेतृत्व करने वाले सहायक पुलिस अधीक्षक सुभाष चन्द्र दुबे ने ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि छापे के दौरान वहां मौजूद लोगों के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि उन्होंने कोई कानून तोड़ा था या इस डिस्कोथेक में शराब परोसे जाने का समय क्या है।
Friday, September 5, 2008
बूढ़ी माँ को जंगल में छोड़ दिया बेटे ने, पहचानने से भी किया इंकार
अपने समय में रेडियो स्टेशन पर गीत गाने वाली यह 75 वर्षीय वृद्धा अब अपने बेटों की याद में रोती रहती हैं। अमेरिका और दुबई की सैर कर चुकी यह महिला आज दो जून की रोटी के लिए दूसरों की मोहताज़ हो गई है। बुढ़ापे ने भले ही उनकी आंखों की रोशनी और कानों के सुनने की ताकत कम कर दी हो, लेकिन उनकी आंखें सिर्फ अपने बेटों का ही इंतज़ार करती रहती हैं। अपने पति को बरसों पहले खो चुकी जिस मां ने बेटों को ऊंची तालीम दिलाने के साथ पाल-पोस कर इस काबिल बनाया कि वे बेहतर जीवन जी सकें, उन्हीं बेटों ने बूढ़ी होने पर मां का साथ छोड़ दिया।
मूल रूप से रोहिणी की रहने वाली इस वृद्धा को उसका छोटा बेटा यह कहकर घर से लेकर चला था कि वह उन्हें हरिद्वार ले जाएगा। लेकिन वह उन्हें मोदीनगर के जंगल में छोड़ कर चला गया। कई दिनों तक भूखी प्यासी भटकने के बाद जब उस पर एक राहगीर की नज़र पड़ी, तो उसने उन्हें गाजियाबाद छोड़ दिया। अब यह महिला पिछले एक सप्ताह से गाजियाबाद के एक गुरुद्वारे में रह रही हैं। दिल्ली के रोहिणी इलाके की रहने वाली शारदा रानी ने बताया कि उनका बड़ा बेटा हरियाणा के करनाल में रहता है, जबकि छोटा बेटा रोहिणी में ही रहता है। पति की मौत के बाद उन्होंने ही दोनों की परवरिश की थी। दिल्ली के एक समृद्ध परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस 75 वर्षीय वृद्धा ने बताया कि वह अपने ज़माने में रेडियो स्टेशन पर फिल्मी गीत गाती थीं और परिवार के साथ अमेरिका, दुबई की सैर भी कर चुकी हैं। लेकिन बुढ़ापे ने उनसे सारी खुशियां छीन लीं। जिन बच्चों को उन्होंने पाल-पोस कर बड़ा किया, उन बच्चों को ही अब वह बोझ लगने लगी है। करनाल में रहने वाले बड़े बेटे ने तो ऐसा मुंह मोड़ा कि कई बरसों तक शक्ल ही नहीं दिखाई और जिस छोटे बेटे के पास दिल्ली में वह रह रहीं थी, वह काफी दिन पहले वह उन्हें देर रात को अपनी कार में यह कहकर लेकर चला था कि वह उन्हें हरिद्वार लेकर जा रहा है। लेकिन मोदीनगर आते ही बहाना बनाकर नीचे उतारा और कार लेकर चला गया। कई दिनों तक वह भूखी-प्यासी जंगल में भटकती रहीं। कुछ दिन बाद सड़क से गुज़र रहे एक स्कूटर सवार व्यक्ति ने उन्हें बेसुध अवस्था में पड़े देखा। वह उन्हें गाज़ियाबाद में छोड़कर चला गया। यहां एक रिक्शा चालक उन्हें बजरिया स्थित संतपुरा गुरुद्वारे के बाहर छोड़कर चला गया। तब से वह यहीं रह रही हैं।
स्थानीय निवासियों द्वारा महिला के बताए गए एक नंबर पर फोन किया गया, तो उस पर वही व्यक्ति मिला, जिसका उन्होंने नाम लिया था। लेकिन जब उन्होंने उस व्यक्ति से वृद्धा को ले जाने का आग्रह किया, तो उन्होंने आने की बात कहकर फोन काट दिया। इसके कुछ दिन बाद जब उन्होंने उसी नंबर पर फिर से फोन किया, तो उस व्यक्ति ने शारदा को पहचानने तक से इनकार कर दिया।
(नवभारत टाइम्स से साभार)
Wednesday, September 3, 2008
विदेशी चैनल बेबस भारत की तस्वीर दिखा रहे
दुनिया भर में 'असहाय भारत' की तस्वीर पेश किए जाने से आहत सेना ने कहा है कि बिहार में राष्ट्रीय आपदा के बावजूद सशस्त्र सैन्य बलों का स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण है और वह बचाव कार्य करने में सक्षम है। कोसी की प्रलयंकारी बाढ़ के बावजूद सेना अब तक लाखों लोगों को सुरक्षित निकाल चुकी है, पर विदेशी न्यूज चैनल ऐसी तस्वीर पेश कर रहे हैं, मानो भारत ऐसी आपदाओं से निपटने में पूरी तरह अक्षम है। दुनिया भर के रक्षा अटैची सेना से पूछ रहे हैं कि आखिर भारत में इतनी खराब स्थिति क्यों है?
दैनिक जागरण में जरनैल सिंह लिखते हैं कि इसी तरह की स्थिति से विदेश मंत्रालय को भी दो-चार होना पड़ रहा है। विदेश मंत्रालय यही समझाने में जुटा है कि भारत अपने यहां आई इस आपदा से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। गलत तस्वीर पेश किए जाने के बाद ही रक्षा मंत्री ए।के। एंटनी ने सेना के राहत व बचाव अभियान के बारे में मीडिया को ब्रीफ करने को कहा। सेना का कहना है कि सीएनएन, बीबीसी व अन्य विदेशी चैनल जान-बूझ कर भारत की भ्रामक छवि पेश कर रहे हैं। एक सैन्य अधिकारी का कहना था कि विदेशी चैनल किसी फंसे हुए व्यक्ति या जान-माल का नुकसान उठा चुके व्यक्ति का दुख-दर्द तो दिखा रहे हैं, पर इतने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव कार्य की एक फुटेज तक नहीं दिखाई जा रही। विदेशी चैनलों के इस रवैये से सेना इसलिए भी आहत महसूस कर रही है क्योंकि इससे उसके दुनिया की बड़ी सैन्य ताकत के तौर पर उभरने की छवि को धक्का लगता है।
सुनामी जैसी आपदा के वक्त जहां भारत ने इंडोनेशिया, श्रीलंका और मालदीव को भी अपने युद्धपोत अमेरिका से पहले भेज दिए थे, वहीं चीन में भूकंप और म्यांमार में तूफान के बाद भी इस क्षेत्र की एक बड़ी ताकत के तौर पर व्यवहार करते हुए सहायता दी थी। लेकिन विदेशी चैनल भारत को एक ऐसे देश के तौर पर दिखा रहे हैं जो अपने यहां बाढ़ की आपदा से भी निपट पाने में अक्षम है।
Tuesday, September 2, 2008
माँ ने नहर में बहा दिया, सांप ने बचा लिया!
जन्म देने वाली जननी ने जिगर के टुकड़े की जान लेने के लिए उसे नहर में बहा दिया था, लेकिन शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था। इसीलिए उस नवजात को सांप ने बचा लिया। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि नहर में एक सांप ने उसे अपने शरीर में लपेट कर डूबने से तब तक बचाए रखा जब तक लोगों की निगाह उस पर नहीं पड़ गई। और फिर एक जांबांज ने नहर में छलांग लगा कर बच्ची को बचा लिया तथा खुद उसकी परवरिश करने की पेशकश भी पुलिस से कर दी है।
पानीपत में हुयी यह घटना, रविवार दोपहर की है। पैरलल बड़ी नहर में पॉलीथिन के थैले में बंद एक नवजात बच्ची बही जा रही थी। उसके रोने की एक महिला ने सुनी। महिला के मुताबिक उसने देखा की थैली को एक सांप लपेटे हुए था। वहां से गुजर रहे कालोनी के प्रॉपर्टी डीलर सुरेश नहर में कूद गए। ऐसा देख सांप ने थैली को फन से हौले से छुआ, मानो बच्ची का माथा चूम रहा हो और पानी में गायब हो गया।
सुरेश पॉलीथिन बाहर निकाल लाए। इसे खोल कपड़ों में लिपटी नवजात को निकाला और घर पहुंचे। दाई को बुलाकर उसकी गर्भनाल कटवाकर गुनगुने पानी से नहलाया। पुलिस को सूचना दी। फिर अस्पताल ले जाकर उसे जन्म के समय लगने वाले टीके लगवाए। सुरेश व उसकी पत्नी दीपू बच्ची को पाकर काफी खुश हैं।
राहत में जुटने से पहले,छह दिन तक सरकारी आदेश का इंतजार करती रही सेना
बाढ़ की त्रासदी झेल रहे बिहार के लाखों लोगों को बचाने के लिए पटना पहुंची सेना को राहत कार्यों में जुटने से पहले तब तक इंतज़ार करना पड़ा जब तक उन्हें सरकारी आदेश नहीं मिला। उन्हें सरकारी आदेश मिलने तक छह दिन का इंतजार करना पड़ा। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह खुलासा करते हुए कहा कि छह दिन के इंतजार के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सेना की औपचारिक तैनाती के आदेश दिए गए। उक्त अधिकारी ने कहा कि सेना की तैनाती में यदि इतनी देरी नहीं की जाती तो कई जानें बचाई जा सकती थी।
नाम न छापने की शर्त पर इस अधिकारी ने इंडो-एशियन न्यूज सर्विस को बताया, 'सेना को छह दिनों तक सरकारी आदेश के लिए पटना में इंतजार करना पड़ा। इन छह दिनों में न जाने कितने का नुकसान हो गया।' इस अधिकारी ने कहा, 'बिहार सरकार ने सेना की तैनाती के संबंध में तब तक आदेश नहीं दिए जब तक कि दिल्ली स्थित उसके आवासीय आयुक्त ने केंद्रीय सचिव से मुलाकात नहीं कर ली।'
उल्लेखनीय है कि राहत कार्यों के लिए औपचारिक आदेश 26 अगस्त को दिए गए थे जबकि सेना 20 अगस्त को पटना पहुंच गई थी। पटना पहुंचने के बाद भी सेना को राहत कार्यों में नहीं लगाया गया।
Monday, September 1, 2008
प्रेम विवाह कर, दहेज में 15 लाख मांगे, न मिलने पर पत्नी को छत से फेंका
दहेज लोभी पति ने दहेज में पंद्रह लाख रुपये न मिलने पर पत्नी को घर की छत से फेंक दिया। इस समय उसकी पत्नी अस्पताल में जिंदगी व मौत से जूझ रही है। चार महीने पहले दोनों ने प्रेम विवाह किया था। अमृतसर के राकेश खन्ना शॉल व्यापारी है। उनकी बेटी गोपिका ने घर के सामने ही रहने वाले इंद्रजीत सिंह बल्ल के साथ प्रेम विवाह किया है। उनका दामाद इंद्रजीत कोई काम नहीं करता। शादी के एक महीने के बाद इंद्रजीत ने उनकी बेटी को कहा कि वह व्यापार करना चाहता है। इसलिए वह अपने मायके से पंद्रह लाख रुपये लेकर आए। उनकी बेटी ने पंद्रह लाख रुपये लाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद इंद्रजीत बल्ल ने दूसरी शर्त उनकी बेटी के समक्ष रखी कि वह अपने पिता के व्यापार में उसको सांझेदार बनाए। उनकी बेटी ने उसकी यह शर्त भी नामंजूर कर दी। इंद्रजीत और उसकी मां अमरीक कौर पंद्रह लाख रुपये मांगने की जिद जारी रखी। 29 अगस्त की रात, इंद्रजीत बल्ल, उसका पिता बलदेव सिंह, मां अमरीक कौर व गोपिका चारों घर की छत पर बैठे हुए थे। इसी दौरान पंद्रह लाख रुपये लाने की बात की चर्चा शुरू हो गयी। उनकी बेटी ने इससे इनकार किया तो इंद्रजीत ने उनकी बेटी को पीटना शुरू कर दिया। घर की छत पर खड़ी उनकी बेटी ने जोर-जोर से उनको आवाजें लगानी शुरू कर दी। इससे पहले कि वह अपनी बेटी की आवाज सुन पाते। उनके दामाद ने उनकी बेटी को छत से धक्का देकर नीचे फेंक दिया। उनकी बेटी के शरीर की हड्डियां कई जगह से टूट गयी हैं।