लगता है कि आधुनिकता की चकाचौंध और भाग दौड़ की जिंदगी से पाश्चात्य देशों के लोग अब उबने लगे हैं। तभी तो वाराणसी घूमने आने वाले कई देशों के लोग न सिर्फ यहीं पर शान्ति की तलाश में जीवन गुजार रहे हैं, बल्कि कई तो साधू के भेष में गंगा और शिव की पूजा भी कर रहे हैं। वैसे वाराणसी के गंगा घाट तो हमेशा से देश ही नहीं बल्कि विदेशी लोगों के आकर्षण के केन्द्र रहे हैं। लेकिन आजकल यह आकर्षण शान्ति और भक्ति की तलाश में कुछ ज्यादा ही दिख रहा है।
माथे पर लाल चंदन और शरीर पर गेरुआ वस्त्र पहने शिवानी कैलिफोर्निया से तीन साल पहले वाराणसी आई तो थी घूमने, लेकिन काशी नगरी उसे इतनी भायी कि वह अब यहीं की होकर रह गई है। शिवानी सुबह चार बजे उठती है, गंगा स्नान करती है, उसके बाद बाबा विश्वनाथ का दर्शन करके अपने शिव मंदिर में पूजा करती है। शिवानी कहती हैं कि मैं यहीं पर गंगा और शिव की पूजा करते हुए मर जाना चाहती हूं। शिवानी अपना असली नाम बताने से मना करती है। वह नहीं चाहती है कि उसे शिवानी के अलावा किसी नाम से कोई पुकारे। अस्सी घाट के किनारे का ही घर अब उसका आशियाना है जहां खर्च के लिए वह छोटा सा रेस्तरां भी चलाती है। लेकिन ध्यान हर वक्त उस शिव में लगा रहता है, जिसके लिए वो शिवानी बन चुकी हैं।
शिवानी अकेली ऐसी विदेशी नहीं है, जो इस शिव की नगरी में शान्ति की तलाश कर रही है। जर्मनी का क्रिस्टोफर जो अब केदार बन चुका है, को तो वनारस ऐसा भाया कि उसने यहां न सिर्फ संस्कृत भाषा सीखी, बल्कि हिंदू रीति रिवाज से इटली की जुली से शादी कर यहीं घर भी बसा लिया है। आज केदार धोती कुर्ता पहनता है और उसकी पत्नी साड़ी। प्रतिदिन सुबह पति पत्नी दोनों गंगा स्नान करते हैं और चंदन टीका लगाकर शिव की पूजा करते हैं। केदार (क्रिस्टोफर) संस्कृत में बताते हैं कि कश्यान मरडान मुक्ति (काशी में मरने से मुक्ति मिलती है) इसलिए मैंने काशी को चुना है। अमेरिका के योगानंद तो लोगों को अब संस्कृत में प्रवचन भी देने लगे हैं। उनका दावा है है कि काशी जैसा शहर विश्व में दूसरा नहीं है, क्योंकि पौराणिक मान्यता है कि काशी शंकर के त्रिशूल पर बसी है जिसका कभी विनाश नहीं होता है, इसलिए यहां जो ऊर्जा मिलती है वहीं कहीं नहीं मिलेगी।
वाराणसी के घाटों पर गंगा की गोद से निकलने वाली धर्म और संस्कृति की धारा में गोता लगाने से हम भारतीय भले ही कतराने लगे हों, लेकिन इन विदेशियों को तो इसी में अब शांति दिखाई देने लगी है लिए वे सात समुन्दर पार से खींचे चले आते हैं।
(सौजन्य: इंडो-एशियन न्यूज सर्विस)
भारत की तलाश
Wednesday, May 7, 2008
गंगा की गोद में जीवन बिताना चाहती है कैलिफोर्निया की शिवानी
नहीं चाहिए ऐसा पुरस्कार
सन 2004 की मई में वरुणा नदी में चार बच्चों को डूबने से बचाने पर 2008 में राष्ट्रपति का 'उत्तम जीवन रक्षा पदक' पाने वाली मंजुमा इकबाल पुरस्कार राशि लौटाने जा रही हैं। मंजुमा और उसके परिवार का कहना है कि बिना किसी पदक अथवा सम्मान समारोह के पुरस्कार राशि दिया जाना ''सम्मान, नहीं अपमान '' है।
उल्लेखनीय है कि उस घटना के दौरान मंजुमा को अपने बेटे शाहिद की जान से हाथ धोना पड़ा था। मंजुमा ने आईएएनएस को बताया, ''उस घटना के चार वर्ष बाद जब मुझे पता चला कि मुझे यह पुरस्कार मिलने वाला है, तो कुछ सांत्वना मिली थी। लेकिन जिस तरीके से यह पुरस्कार दिया गया, उससे मुझे बहुत दुख हुआ ।'' उन्होंने बताया कि उन्हें जिला न्यायाधीश के कार्यालय में बुलाकर 45 हजार रुपए का ड्राफ्ट पकड़ा दिया गया था।
मंजुमा के पति इकबाल के अनुसार, ''मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। अपने बच्चे की जान की कीमत पर चार अन्य बच्चों को बचाने वाली औरत की बहादुरी का इस तरीके से सम्मान किया जाना बहुत शर्मनाक है।''
मंजुमा और उनके पति के अनुसार 24 फरवरी को पुरस्कार मिलने के बाद से वह अपना विरोध दर्ज कराने के लिए जगह-जगह भटक रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वह राष्ट्रपति को भी दो बार याचिका भी दे चुके हैं, लेकिन उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला। अपने बेटे को याद करती हुई मंजुमा रूंधे गले से कहती हैं, ''मैं उसे न बचा पाने के कारण उससे कई बार माफी मांग चुकी हूं।''
Tuesday, May 6, 2008
सरकार के फैसले को लागू करवाने को अर्जी दी, समय से पहले तबादला मिला
अभी अभी तो ख़बर आयी थी अनाथालय की जमीन पर अस्सी अरब में बन रहे आशियाने की। अब खबर आयी है कि इस आशियाने के मालिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी, के कब्जे वाली इस जमीन की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका दाखिल करने वाले महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड के सीईओ एआर शेख का तबादला ग्रामीण विकास विभाग में कर दिया गया है।
दैनिक भास्कर में समाचार है कि सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका की सुनवाई के एक दिन बाद ही शेख का तबादला कर दिया गया। शेख ने फोन पर कहा कि 3 मई को उन्हें स्थानांतरण आदेश मिले हैं और वे जल्द ही वे अपने अभिभावक विभाग में हाजिरी देंगे। हालांकि उन्होंने इन खबरों पर प्रतिक्रिया नहीं दी जिनमें कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की वजह से उनका तबादला किया गया है।
मामला यह है कि अंबानी की कंपनी एंटीलिया कमर्शियल प्राइवेट लि. ने अल्टामाउंट रोड पर 4532 वर्गमीटर का यह प्लॉट छह साल पहले एक अनाथालय से सार्वजनिक नीलामी के दौरान 21 करोड़ रुपए से ज्यादा में खरीदा था। इस सौदे को अवैध करार देते हुए सरकार ने पिछले साल जुलाई में बोर्ड से प्लॉट का कब्जा लेने को कहा था।
इसके बाद शेख ने एंटीलिया को वक्फ एक्ट के सेक्शन 52 के तहत नोटिस जारी कर वक्फ संपत्ति बोर्ड को सौंपने को कहा था। शेख ने इस प्लॉट को एंटीलिया के नाम किए जाने का भी विरोध किया था। अब शेख से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उनका तबादला इसलिए किया गया है क्योंकि उन्होंने गड़बड़ियों पर ऐतराज जताया और एंटीलिया को राहत देने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली।
राजस्व और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि हाई कोर्ट में एक याचिका है जिसमें शेख को बतौर बोर्ड का सीईओ नियुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। इस याचिका का परीक्षण किए जाने के बाद शेख के तबादले का निर्णय लिया गया है। अंबानी प्लॉट डील से शेख के तबादले का कोई संबंध नहीं है।
शेख ने सीईओ की भूमिका में बोर्ड में डेप्यूटेशन पर 3 नवंबर 2006 को पदभार संभाला था। इससे पहले वे विदर्भ में वाशिम में ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत थे। सामान्य रूप से डेप्यूटेशन तीन साल के लिए होता है लेकिन शेख के मामले में डेढ़ साल में ही तबादला किया गया है।
Monday, May 5, 2008
अंग्रेजों की धरती पर भारत का बोलबाला
कभी हम पर राज करने वाले ब्रिटेन के औद्योगिक साम्राज्य पर अब भारतीयों की छाप है।
कोरस और जगुआर-लैंड रोवर का अधिग्रहण कर टाटा समूह ब्रिटेन के औद्योगिक नक्शे पर पहले से ही विराजमान है। अनिवासी भारतीय उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल यहां के सर्वाधिक अमीर व्यक्ति हैं। हिंदुजा व स्वराज पाल भी यहां के प्रमुख उद्योगपतियों में शुमार किए जाते हैं। वोडाफोन के सीईओ अरुण सरीन यहां के सर्वाधिक प्रभावशाली टेलीकाम व्यवसायी हैं। अब इस सूची में संजय पटेल का नाम जुड़ गया है। दुनिया की प्रमुख निवेश फर्म गोल्डमैन सैश के सीनियर एक्जीक्यूटिव पटेल को ब्रिटेन के 20 सबसे प्रभावशाली फंड मैनेजरों में शुमार किया गया है।
ब्रिटेन के प्रमुख अखबार डेली टेलीग्राफ द्वारा तैयार हेज फंड के क्षेत्र में कार्यरत 100 प्रमुख लोगों की सूची में पटेल का नंबर 19वां है। गोल्डमैन सैश में अपनी दूसरी पारी में काम कर रहे पटेल कंपनी की यूरोपीय पीई और भारतीय पूंजी इक्विटी कारोबार के सह प्रमुख हैं। सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट इक्विटी [पीई] समूहों में से एक पर्मिरा के चेयरमैन डैमोन बफिनी इस सूची में शीर्ष पर हैं।
डेली टेलीग्राफ ने कारोबार के 10 विभिन्न क्षेत्रों के हजार सबसे प्रभावशाली लोगों पर आधारित अलग-अलग सूचियां तैयार की हैं। अगले दो हफ्ते के दौरान इनमें से हर क्षेत्र के 100 सर्वश्रेष्ठ लोगों की सूची प्रकाशित की जाएगी। अब तक खुदरा व खाद्य उद्योग, ऊर्जा एवं यूटिलिटी बैंकिंग, बीमा, मीडिया तथा मनोरंजन, टेक्नोलाजी, टेलीकाम, फंड मैनेजमेंट एवं प्रापर्टी क्षेत्र की सूची प्रकाशित की गई है।
पिछले हफ्ते प्रकाशित टेक्नोलाजी क्षेत्र की सूची में प्रमुख इंटरनेट सर्च इंजन गूगल के यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीकी परिचालन के भारतीय मूल के अध्यक्ष निकेश अरोड़ा का स्थान चौथा है। इसी तरह बैंकिंग एवं बीमा क्षेत्र में अंशु जैन को ब्रिटेन का तीसरा प्रभावशाली व्यक्ति करार दिया गया है। जैन जर्मनी के ड्यूश बैंक के ग्लोबल बाजार विभाग के प्रमुख हैं।
Sunday, May 4, 2008
अस्सी अरब में बन रहा है आशियाना, अनाथालय की जमीन पर
दुनिया के गिने चुने सबसे अमीरों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी अपने परिवार के लिए लगभग 80 अरब रूपए की लागत से एक शीशमहल बनवा रहे हैं। इसमें वह अपनी पत्नी नीता अंबानी और तीन बच्चों के साथ रहेंगे। उनका अन्टिला नामक यह शीशमहल मुम्बई में मलाबार हिल के अल्टामाउंट रोड पर निर्माणाधीन है जिसके अगामी जनवरी तक पूरी हो जाने की संभावना है। चार लाख वर्ग फीट क्षेत्रफल में फैले इस 27 माले की आलीशान बिल्डिंग की ऊंचाई 550 फीट है।
अंबानी का यह शीशमहल दुनिया के महंगे और आलीशान बिल्डिंगों में गिना जाएगा। अन्टिला की डिजाइन अंतरराष्ट्रीय स्तर के आर्किटेक्ट ने वास्तु को ध्यान में रखकर की है। इसकी खासियत यह है कि इसके सबसे ऊपरी मंजिल पर हैलीपैड होगा। इसमें लीविंग क्वाट्र्स हैं और लॉबी में आने के लिए नौ एलिवेटरों की सुविधा है। 43 अरब डॉलर के मालिक अंबानी के अन्टिला की हर मंजिल अलग है। किसी भी माले को एक तरह से नहीं बनाया जा रहा है। इसमें एक हॉल ऐसा है जिसके छत का 80 फीसदी हिस्सा हीरे-जवाहरात से बने झूमर से सजा होगा। दो माले की सीढ़ियों को चांदी से बनाए जा रहे हैं।
ऊपरी मंजिल को मनोरंजन के लिए रखा गया है जहां अंबानी कभी-कभी अपने मेहमानों के साथ व्यवसायिक चर्चा करेंगे। यहां से अंबानी अरेबियन सागर का भी आनंद लेंगे। चौथे तल पर खुला बगीचा होगा। इसके छठवें तल को पार्किंग के लिए सुरक्षित रखा गया है। कहा जाता है कि नीता अंबानी की इच्छा के मुताबिक नवीं मंजिल की डिजाइन की गई है और लकड़ी, मेटल और क्रिस्टल लगाए गए हैं। वैसे यह अन्टिला बिल्डिंग, वक्फ बोर्ड की विवादास्पद अनाथालय की बेची गई जमीन पर खड़ी हो रही है। यह मामला बांबे हाई कोर्ट में विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर दखल देने से इनकार कर दिया है।
दुनिया की इस सबसे महंगी बिल्डिंग के बारे में विस्तृत जानकारी आप यहाँ पा सकते हैं।
ट्रक ड्राइवर के बेटे ने जीता अमेरिकी टैलंट हंट
फिल्म 'नमस्ते लंदन' में तो अक्षय कुमार ने विरोधी पक्ष के छक्के छुड़ा दिए थे, बेसबाल के खेल में। वास्तविकता के धरातल पर उत्तर प्रदेश के ट्रक ड्राइवर के बेटे और अंग्रेजी न बोल सकने वाले रिंकू ब्रह्मादीन सिंह ने बेसबाल के एक Talent Hunt में ऐसा जोश दिखाया कि उन्होंने न सिर्फ इस प्रतियोगिता को जीता, बल्कि इस खेल की बारीकियों की बेहतर समझ के लिए वह अमेरिका रवाना हो रहे हैं।
एक अमेरिकी खेल कंपनी ने भारत के 30 शहरों में टैलंट हंट कराकर 30 हजार युवाओं के बीच से रिंकू और दिनेश कुमार पटेल को चुना है। दोनों युवा खिलाड़ियों को सैन फ्रैंसिस्को के जानेमाने प्रशिक्षकों से एक साल की ट्रेनिंग दी जाएगी। अगर इन्होंने ट्रेनिंग के दौरान उम्दा प्रदर्शन किया तो 2009 के सत्र में इन्हें मेजर बेसबॉल टीम में शामिल होने का मौका मिल सकता है।
मिलियन डॉलर आर्म हंट में रिंकू ने 89 मील प्रति घंटे की रफ्तार से बेसबॉल थ्रो करके सबसे तेज थ्रोअर के रूप में पहचान बनाई और एक लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 40 लाख रु.) का पुरस्कार भी जीता। इस हंट में दिनेश दूसरे नंबर पर रहे। अमेरिकी राजदूत डेविड सी. मलफर्ड ने इनके चयन पर बधाई देते हुए कहा कि इन दोनों युवा खिलाड़ियों के लिए यह सुनहरा मौका तो है ही, Major Leauge Baseball के लिए भी यह अनोखा मौका है। इस लीग में दुनियाभर के कई खिलाड़ी चुने जाते हैं, लेकिन भारत से कोई खिलाड़ी इसमें हिस्सा नहीं ले रहा था।
शारीरिक अपंगता, नेत्रहीनता? वो क्या होती है !?
दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा और जुनून हो, तो तमाम मुश्किलों को घुटने टेकने पड़ते हैं। भले ही यह मुश्किल शारीरिक अपंगता के रूप में ही क्यों न हो! नेत्रहीनता जैसी एक ऐसी ही मुश्किल अहमदाबाद के गगनबीर सिंह छाबड़ा की ताल पर भांगडा करती नजर आई, जब उन्होंने CAT के गले में घंटी बांध दी। गगनबीर देख नहीं सकते, इसके बावजूद 2007-08 की 'कैट' परीक्षा में उन्होंने 94 परसेंटाइल हासिल किया। उन्हें 5 आईआईएम से कॉल आईं। IIM बेंगलुरु और IIM कोलकाता ने गगन की हिम्मत को सलाम करते हुए उन्हें एडमिशन का ऑफर भी कर दिया है।
आईआईएम की डिग्री को आमतौर पर मोटी तनख्वाह की गारंटी माना जाता है, लेकिन गगन की निगाहें कहीं और हैं। अपनी पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद गगन कॉरपोरेट जगत का हिस्सा नहीं बनना चाहते, बल्कि सरकारी और अर्द्धसरकारी संस्थानों में रहकर कुछ अनुभव हासिल करना चाहते हैं। उनके लक्ष्य भी बेहद साफ हैं। वह साफ शब्दों में कहते हैं कि आज से 10 साल बाद मैं भारत का बेस्ट मानव संसाधक प्रबंधक बनना चाहता हूं।
नवभारत टाइम्स की ख़बर है कि जन्म से ही नेत्रहीनता (लगभग १५ से २० प्रतिशत की दृष्टि), Retinitis Pigmentosa की समस्या से जूझ रहे २२ वर्षीय गगनबीर का आईआईएम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। नेत्रहीनता के चलते आने वाली समस्याओं और लोगों के कमेंट्स ने गगनबीर के उत्साह को कदम-कदम पर तोड़ने की कोशिश की, लेकिन अपनी मां की प्रेरणा से आईआईएम का ख्वाब संजोने वाले इस शख्स ने आखिर में अपने सभी आलोचकों को गलत साबित कर दिया। गौरतलब है कि Human Resource Management की पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने टॉप रैंक हासिल की थी। कामयाबी का पूरा श्रेय मां स्वर्गीय हरिंदर कौर को देने वाले गगनबीर को किसी से कोई शिकायत नहीं है, बस एक दुख जरूर है। वह यह कि शानदार कामयाबी के इन लम्हों में काश! आज उनकी मां उनके साथ होतीं।