मध्यप्रदेश में मानसून को दस्तक दिए एक माह से अधिक का वक्त गुजर गया है मगर बैतूल के बहुत बडे हिस्से में अब तक बारिश नहीं हुई है इसके चलते फसलों के बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। आठनेर विकास खंड और उसके आसपास के गांवों के लोगों को लगता है कि इन्द्र देवता उनसे नाराज हैं, इसीलिए इस इलाके पर उनकी कृपा नहीं हो रही है।
रूठे इन्द्र देव को मनाने के लिए मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के सातनेर गांव के लोगों ने अनोखा तरीका अपनाया है। वे 30 फुट गहरे सूखे कुएं में बैठकर अखंड रामायण का पाठ कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इन्द्र देव उनकी आवाज सुनेंगे और वर्षा होगी। देवराम बताते हैं कि सातनेर गांव के लोगों ने इन्द्र देवता को मनाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने का निर्णय लिया। दैनिक देशबन्धु के अनुसार सभी ने तय किया कि गौडीढाना रामनगर स्थित तीस फुट गहरे कुएं में रामायण कराई जाए। लगभग एक सप्ताह से कुएं में रामायण का दौर जारी है। इन ग्रामीण इलाकों के लोगों को उम्मीद है कि इन्द्र देव एक दिन जरूर उनकी आराधना से प्रसन्न होंगे और उन्हें अवर्षा के दौर से मुक्ति मिलेगी।
भारत की तलाश
Thursday, July 31, 2008
रूठे इन्द्र देव को मनाने, तीस फुट गहरे कुएं में रामायण
Monday, July 28, 2008
जुए की लत ने इंजीनियर को बैग चोर बनाया
नवभारत टाईम्स की ख़बर है कि सतारा जिले के कराड इंजीनियरिंग कॉलिज से 1963 में इंजीनियरिंग करने वाले रमेश कदम ने कुर्ला स्थित प्रसिद्ध प्रीमियर ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी भी की। नौकरी के दौरान ही उसे 'मटका' खेलने की बुरी लत लग गई। तत्कालीन मटका किंग रतन खत्री से प्रभावित कदम ने 1978 तक कंपनी में नौकरी की और बाद में मटके की दुनिया में नसीब आजमाने लगा। मटके की आदत के चलते वह इंजीनियर से रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर यात्रियों के बैगों को चुराने वाला चोर बन बैठा।
Sunday, July 27, 2008
एक बेटा बटाला में, दूसरा अमेरिका में, पोता CID इंसपेक्टर: माँ गुरूद्वारे में, अधमरी, बेसहारा
उसने दोनों बेटों की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों बेटों को नौ-नौ महीने कोख में रखा, जन्म दिया, उंगली पकड़कर चलना सिखाया। लेकिन उन्हीं बेटों ने उसे दर-दर की ठोकरें खाने के लिए बेघर कर दिया। आज ये माँ खुद को भी ठीक से नहीं संभाल सकती। वक्त और उम्र की मार ने तो केवल उसके शरीर को कमजोर किया, लेकिन उसका कलेजा छलनी किया उसके दोनों बेटों के व्यवहार ने। आजकल ये माँ, फीनो, तख्त श्री केसगढ़ साहिब में सेवादारों के रहमोकरम पर जी रही है।
फीनो के नाम अमृतसर में कई एकड़ जमीन थी, लेकिन बेटों ने सारी जमीन अपने नाम करवाकर फीनो को घर से निकाल दिया। फीनो का एक बेटा बटाला में और दूसरा अमेरिका में रहता है। फीनो का एक पोता तरसेम सिंह अजनाला में सीआईडी इंस्पेक्टर है। घर से निकाले जाने के बाद फीनो इधर-उधर भटकती रही। कई माह पहले जालंधर रेलवे स्टेशन पर अधमरी हालत में पड़ी फीनो पर एक दिन हेल्प लाइन संस्था की नजर पड़ी। इस संस्था की सदस्य बीबी राजिंदर कौर ने बताया कि हेल्प लाइन संस्था ने फीनो की सेवा की व उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। उसका पूरी तरह इलाज करवाया। जब समाचार पत्रों में फीनो के बारे में खबर छपी तो उसका पोता उसे अपने घर ले गया। लेकिन कुछ समय बाद ही उसे फिर घर से निकाल दिया गया।
जागरण में आयी ख़बर के मुताबिक, हाल ही में तख्त श्री केसगढ़ साहिब माथा टेकने आई बीबी राजिंदर कौर ने जब फीनो को यहां देखा तो वह हैरान रह गई। उन्हें पता चला कि फीनो यहां कई सप्ताह से रह रही है। तख्त श्री केसगढ़ साहिब के मैनेजर ने बताया कि यह औरत अपने आप को भी नहीं संभाल पाती है और जगह-जगह गंदगी फैला देती है। औरत होने के नाते सेवादारों को भी उसकी देखभाल करने में मुश्किलें पेश आती हैं। हालांकि सेवादार अपने तरफ से उसका पूरा खयाल रखते हैं, लेकिन फीनो को अपनों का साथ नहीं मिला और उम्र के इस पड़ाव पर वह अपनी जिंदगी इसी बदहाली में गुजारने पर मजबूर है। तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी त्रिलोचन सिंह ,समेत अनेक गणमान्यों ने कहा कि जन्म देने वाली मां के साथ इस तरह का बर्ताव करने वाले कुपुत्रों का सामाजिक बायकाट कर देना चाहिए।
Friday, July 18, 2008
मौत ने सर झुकाया, जीने की चाह के आगे
सुप्रतिम दत्ता की जिंदगी एम्स के डॉक्टरों ने 6 घंटे चले लंबे ऑपरेशन के बाद बचा ली है जो चिकित्सा जगत में एक बड़ा ऑपरेशन माना जा रहा है। सुप्रतिम दत्ता की गाड़ी का दिल्ली की एम जी रोड के पास एक्सीडेंट हो गया था और लोहे की एक लंबी रॉड उसके सीने के आर पार हो गई थी लेकिन यहां सुप्रतिम ने बिना घबराए अपने आप को संभाला और घटना के बारें में अपने घर पर सूचना दी। उसके बाद उसे एम्स लाया गया जहां एम्स के डॉक्टरों ने अपने हाथों का कौशल दिखाते हुए ऑपरेशन कर सुप्रतिम की जिंदगी बचा ली है। एक्सीडेंट जिस तरह से हुआ है और जो सुप्रतिम की हालात थी उसे देखते हुए वे इसे कुदरत का करिश्मा मान रहें है।
23 साल के सुप्रितम दत्ता ऑफिस जाने के लिए ऑफिस की कैब से निकले थे लेकिन रास्ते में ही उनका एक्सीडेंट हो गया और 5 फुट 2 इंच की लंबी रॉड सीने के आर पार हो गई। एक्सीडेंट होने के बाद सुप्रतिम दत्ता ने हिम्मत दिखाते हुए अपने मोबाइल के द्वारा अपनी मां को सूचना दी कि कि उनका एक्सीडेंट हो गया है और वह गंभीर रुप से घायल है और शायद उनकीं जिंदगी न बचें। इसके साथ ही उसने तत्काल अपने दोस्तो को भी घटना की जानकारी दी। स्थानिय लोंगो ने भी उसकी मदद की और इन सभी की दुआओ और मदद की बदौलत एम्स के डॉक्टरो ने सफल ऑपरेशन कर बचा लिया ।
सुप्रतिम दत्ता ने 5 फुट 2 इंच की रॉड अपने शरीर के अंदर जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अपना होश नहीं खोया और अपनी जिंदगी की रक्षा के लिए जो कुछ कर सकते थे किया। 5 फुट 2 इंज की लोहे की रॉड जब काटी जा रहीं थी तो उन्होंने असहनीय दर्द सहा और 6 घंटे चले लंबे ऑपरेशन में मौत को मात देते हुए जिंदगी की लड़ाई जीत ली।
Saturday, July 12, 2008
मौसम पूर्वानुमान
जब मानसून ने दस्तक दे ही दी है तो लोगों के चेहरों में खुशी आना लाजमी है। मौसम का मिजाज भांपने का अपना नुस्खा है। हजारों साल से तमाम जाति, नस्ल और प्रांतों के लोग इस लौकिक ज्ञान को अपनी आने वाली पीढ़ियों में पहुंचाते रहे है। यह ज्ञान कितना पुख्ता है इसका उदाहरण इसी से मिल जाएगा कि जब मौसम विज्ञानी बुंदेलखंड में सन 2002 का मानसून ठीक ठाक बता रहे थे तो वहां दे देशी मौसम विज्ञानियों ने मानसून के धोखा देने की घोषणा कर दी थी। हुआ भी वही। यहां मान्यता है कि जब सूखा पड़ता है तब झड़बेरी और महुआ की फसल बहुत अच्छी होती है और उस साल इन पेड़ों में खूब फल हुए थे। दुनियाभर के लोक साहित्यों में मानसून के पूर्वानुमान पर तमाम नुस्खे हैं।
- कुत्ता घास खाना शुरू कर देता है
- चीटियां अपने अण्डें नीचे से ऊपर रखना शुरू कर देती हैं।
- चिड़िया धूल में नहाती है।
- बतख तैरते समय पीछे पंख मिलाकर फड़फड़ाने लगे
- मच्छर जमीन के बहुत नजदीक उड़ने लगें।
- शाम से मुर्गा दरवाजे पर बांग दें।
- गिलहरी चीखने लगे तो 24 घंटे के अंदर भयंकर बरसात होगी।
Wednesday, July 9, 2008
भीख में मिले पैसों को गिनते-गिनते बैंक स्टाफ को पूरा दिन लग गया
कोलकाता के एक बैंक के कर्मचारियों का पूरा सोमवार एक भिखारिन के पैसे गिनते-गिनते निकल गया। किस्सा यह है कि लक्ष्मी 16 साल की उम्र से ही उत्तरी कोलकाता के व्यस्त हतीबागान इलाक़े में भीख माँगती है। उसने भीख में मिले अपने सारे सिक्के श्यामबाज़ार चौराहे के पास अपनी खोली में जमा किए थे। इसके लिए उसने लोहे की टोकरियों का इस्तेमाल किया और एक बोरे से अच्छी तरह ढक कर रखा। मिलीजुली रेज़गारी की अब तक उसके पास चार भरी हुई टोकरियां हैं। इनमे से कुछ सिक्के तो 1961 के बने हुए हैं और अब चलन में भी नही हैं।
बैंक खाता खुलने का सिलसिला उस समय शुरू हुआ जब पिछले सप्ताह कुछ बच्चे खेलते हुए उसकी खोली में घुस गए और उनकी एक टोकरी पर ठोकर मार दी जिससे लक्ष्मी सचेत हुई। मामला पुलिस की जानकारी में आया तो लक्ष्मी की मदद करने के लिए वो उसके सिक्कों को अपने साथ ले गए। बाद में इन सिक्कों को सैंट्रल बैंक की मानिकतला शाखा में खाता खुलवाने के लिए ले जाया गया। 50 साल की लक्ष्मी देवी के जीवन भर की बचत तीन बाल्टियों में आई। बाल्टियों में 10, 20 और 25 पैसे के सिक्के भरे थे। बैंक का करीब सारा स्टाफ सुबह 10 बजे जो लगा तो शाम 5 बजे बैंक के बंद होने के कुछ मिनट पहले ही यह काम ख़त्म हो सका।
सैंट्रल बैंक के शांतनु नियोगी का कहना “चूँकि वो ग़रीब है और उन्हे हमारी मदद चाहिए इसलिए हम पुराने सिक्कों को भी स्वीकार करेंगे।” रिज़र्व बैंक के निर्देशानुसार चलन से बाहर हो चुके सिक्कों के बदले जमाकर्ता को उनके बराबर रक़म का भुगतान किया जाना चाहिए।
एक महिला के नाम 901 राशन कार्ड, लेकिन उसे मालूम नहीं
आप मानें या ना मानें, लेकिन दक्षिण दिल्ली के बदरपुर इलाके में रहने वाली एक महिला के नाम 901 राशन कार्ड हैं। इतना ही नहीं, इन सभी राशन कार्डों पर उसका नाम और पता भी एक ही है। जबकि उसे खुद भी नहीं पता कि उसके नाम पर इतने राशन कार्ड बने हुए हैं। जसोला गांव की मंजू अकेली नहीं है जिसके नाम पर कई-कई राशन कार्ड हैं। पते का मिलान करना शुरू दिल्ली सरकार के खाद्यान्न और आपूर्ति विभाग के सामने हाल ही में ऐसे कई मामले आए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 257 करोड़ का राशन कार्ड घोटाला सामने आया है। इसलिए अब विभाग ने राशन कार्ड धारकों की सूची में मौजूद हर नाम और पते का मिलान करना शुरू कर दिया है।
आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद ने इस संबंध में दस्तावेजों को जारी करते हुए कहा कि 1,70,598 राशन कार्ड फर्जी पाए गए हैं। इनमें से 1,41, 978 राशन कार्ड गरीबी की रेखा से ऊपर (एपीएल) वालों के हैं। दूसरी ओर, केवल 28,620 फर्जी राशन कार्ड ही गरीबी की रेखा (बीपीएल) के नीचे और अंतोदय कार्ड हैं। पिछले चार साल में इन फर्जी राशन कार्डों से मिलने वाली सब्सिडी के रूप में सरकार को 257 करोड़ का चूना लगाया गया है।