भारत की तलाश

 
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Thursday, August 13, 2009

रेलवे की नौकरी के लिए परीक्षा का प्रश्नपत्र हिन्दी में नहीं होगा!!

भई वाह! रेलवे की नौकरी के लिए परीक्षा हो और उसका प्रश्नपत्र हिन्दी में न हो, क्या ऐसा संभव है? अभी तक तो नहीं था, लेकिन स्वतंत्रता दिवस के दो दिन पहले यह खबर है कि रेल मंत्रालय ऐसा करने की तैयारी में है। खबरें बताती हैं कि रेलमंत्री ममता बनर्जी ने मंत्रालय संभालने के बाद यह नोटिस जारी किया कि रेलवे की परीक्षाएँ अँगरेजी या क्षेत्रीय भाषा में कराई जाएँ।


अभी तक रेलवे में भर्ती के लिए ग्रुप-डी की परीक्षाएँ अँगरेजी, हिन्दी और क्षेत्रीय भाषा में होती हैं। ग्रुप-सी की परीक्षाएँ अँगरेजी और हिन्दी में होती हैं। इसमें क्षेत्रीय भाषाओं को भी शामिल करने की बात लंबे समय से हो रही थी। इससे किसी को असहमति नहीं थी, पर हिन्दी को दरकिनार किए जाने की कोशिशों से हड़कंप मचा हुआ है। परीक्षाओं में क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने और हिन्दी को बाहर का रास्ता दिखाने या किनारे करने के लिए मंत्रालय ने बाकायदा एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। जब रेल मंत्रालय से आधिकारिक राय जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने बस इतना माना कि एक कमेटी का गठन हुआ है।

अधिकारियों ने इतना कहा कि ऐसा होने पर नीतिगत बयान आएगा और फिर उसकी मंजूरी मंत्रिमंडल से लेना पड़ेगी। दिलचस्प यह है कि ऐसी किसी पहल से उन्होंने इनकार भी नहीं किया। हालाँकि एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने माना कि ऐसी कोशिश हो रही है। इसे क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने के नाम पर किया जा रहा है।

इस अधिकारी ने बताया कि अभी यह समझदारी बनी है कि जिन राज्यों में हिन्दी बोली जाती है, वहाँ तो हिन्दी में परीक्षा होगी, लेकिन उन राज्यों के बाहर सिर्फ अँगरेजी या क्षेत्रीय भाषा में ही परीक्षाएँ हों। इसकी सुगबुगाहट तभी शुरू हुई थी, जब रेलमंत्री ने क्षेत्रीय जोनों की भर्ती में वहाँ के निवासियों के लिए विशेष प्रावधान की घोषणा की थी।

सवाल है कि जो हिन्दी हमारी राष्ट्रीय भाषा है, उसकी क्या इस तरह उपेक्षा की जा सकती है?

Monday, July 28, 2008

जुए की लत ने इंजीनियर को बैग चोर बनाया

68 साल के फर्स्ट क्लास इंजीनियर रमेश कृष्णाजी को नवी मुंबई की पनवेल रेलवे पुलिस ने पनवेल रेलवे स्टेशन पर एक यात्री का बैग चुराते वक्त गिरफ्तार किया। 'मटका' की लत के चलते करीब 37 साल पहले वह ग्रैजुएट इंजीनियर, बैग चोर बन बैठा था। इसी बुरी लत के चलते उसके माता-पिता ने उसका साथ छोड़ दिया। करीब 22 बार जेल की हवा खाने के बाद भी वह बैग चुराने की आदत नहीं छोड़ पा रहा है।

नवभारत टाईम्स की ख़बर है कि सतारा जिले के कराड इंजीनियरिंग कॉलिज से 1963 में इंजीनियरिंग करने वाले रमेश कदम ने कुर्ला स्थित प्रसिद्ध प्रीमियर ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी भी की। नौकरी के दौरान ही उसे 'मटका' खेलने की बुरी लत लग गई। तत्कालीन मटका किंग रतन खत्री से प्रभावित कदम ने 1978 तक कंपनी में नौकरी की और बाद में मटके की दुनिया में नसीब आजमाने लगा। मटके की आदत के चलते वह इंजीनियर से रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर यात्रियों के बैगों को चुराने वाला चोर बन बैठा।

Saturday, May 10, 2008

चपरासी की नौकरी भी चलेगी, वेट लिफ्टिंग के राष्ट्रीय खिलाडी को

उसने, पुलिस महानिदेशक रंजीव दलाल के सामने जब बीस से अधिक मैडल और प्रमाण-पत्र रखकर नौकरी मांगी तो एक बारगी डीजीपी भी सोचने को मजबूर हो गए। 'सर.. ये मैडल और प्रमाण-पत्र खाने को नहीं देते। ..पेट तो रोटी से भरता है। मुझे नौकरी पर रख लो.. चाहे चपरासी ही रख लो..।’ ये कहना था वेट लिफ्टिंग में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी श्रीनिवास का।

दैनिक भास्कर के समाचार अनुसार भारोत्तोलन में राज्य स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीत चुका श्रीनिवास पुत्र रूलिया राम मूल रूप से महम का रहने वाला है। राष्ट्रीय स्तर की भी कई प्रतियोगिताओं में उसने भाग लिया है लेकिन अब रोजी-रोटी का कोई स्थायी साधन नहीं होने के कारण अभ्यास छूट चुका है। चार बेटियां का पिता श्रीनिवास कहता है, ‘जल्दी ही कोई नौकरी नहीं मिली तो उम्र भी निकल जाएगी। इन मैडल से पेट नहीं भरता। जहाँ जाता हूं..मैडल देखते हैं पर नौकरी कोई नहीं देता। अब तो चपरासी की नौकरी मिल जाए तो वह भी कर लूंगा।’

चंडीगढ़ से आए समाचार में यह भी बताया गया है कि डीजीपी से मिलते समय श्रीनिवास सफेद कुर्ते-पायजामे में था। जब वह चतुर्थ श्रेणी स्तर की नौकरी मांग रहा था तो एक पुलिस अधिकारी बोला, ‘कम से कम इस खादी का तो लिहाज कर। यह बहुत बड़ी चीज है। खादी पहनने वाले को इतनी छोटी नौकरी हम नहीं दे सकते।’ डीजीपी रंजीव दलाल ने श्रीनिवास को भरोसा दिलाया कि वह उसके लिए प्रयास करेंगे। पता करेंगे कि कहां इस श्रेणी का खाली पद है। पद मिला तो नौकरी दिलवाने की कोशिश करेंगे।