भारत की तलाश

 
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Sunday, May 18, 2008

खेतिहर मजदूर के बेटे को NASA से न्यौता

महाराष्ट्र के कोल्हापुर के १७ साल के श्रीधर की कहानी बस चमत्कारिक है। दलित परिवार के इस लड़के की किस्मत खुली शोध प्रतियोगिता से। आकाशगंगा पर श्रीधर के सिद्धांत को न सिर्फ इनाम मिला बल्कि नासा के दरवाजे खुल गए। खेत में काम करने वाले मजदूर के बेटे को नासा ने बतौर जूनियर साइंटिस्ट काम करने का न्यौता दिया है।

श्रीधर अभी नासा तो नहीं पहुंचा है, लेकिन उसके गांव में लोग काफी खुश हैं। उसे न सिर्फ नासा से बल्कि कोलोरैडो यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन की पढ़ाई के लिए बुलावा आया है। लेकिन यह सब इतना आसान नहीं होगा। पहले 2 साल का खर्च श्रीधर को वहन करना पड़ेगा। जिसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने ५० लाख की सहायता का आश्वासन दिया है। तीसरे साल से नासा से १००० डॉलर मासिक छात्रवृति मिलेगी।

Friday, March 28, 2008

ढाई माह के बच्चे को गोद में लेकर मां दे रही परीक्षा

बूली बर्मन ने ढाई माह के गोद के बच्चे को लेकर उच्च माध्यमिक परीक्षा दे कर सबको हैरत में डाल दिया है। पश्चिम बंगाल में गोसानीमारी उच्च विद्यालय से परीक्षा दे रही दिनहाटा (कूचबिहार) महकमा के गोसानीमारी की निवासीबूली बर्मन बुधवार को गोपाल नगर एमएसएस हाईस्कूल में राजनीति विज्ञान की परीक्षा देने के लिए अपने नन्हे बच्चे को साथ लेकर परीक्षा केंद्र आयी थी।

करीब चार साल पहले पेटला की मूल निवासी बूली की शादी गोसानीमारी के निताई राय के साथ हुयी थी। सिर्फ ढाई माह पहले ही उसने पुत्र संतान को जन्म दिया है। अपने अबोध बच्चे को संभालते हुए बूली ने परीक्षा की तैयारी भी बखूबी कर ली थी। इसमें उसके पति ने भी उसका भरपूर साथ दिया। परीक्षा केंद्र में उसके साथ उसकी मां आती है जो बाहर बच्चे को संभालती है। परीक्षा के बीच में बच्चे के रोने पर उसे अक्सर परीक्षा हाल से बाहर आना पड़ता है। गोपालनगर एमएसएस हाईस्कूल के प्रधान शिक्षक नारायण देव ने बताया कि बूली के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गयी थी लेकिन वह उस पर राजी नहीं हुई।

अपनी तमाम मुश्किलों के बीच परीक्षा देने का हौसला रखने वाली बूली सचमुच तारीफ के काबिल है। उसका यह साहसिक प्रयास अन्य गृहिणियों के लिए मिसाल बन सकता है। गौरतलब है कि अक्सर गृहिणियां अपने घर के काम व बच्चों के बोझ का हवाला देकर पढ़ाई नहीं करना चाहती हैं। इनके लिए बूली प्रेरणा का स्रोत साबित हो सकती हैं।