सुना है कि आज माँ का दिन है, याने कि मदर्स डे! इसी की पूर्व संध्या पर दिल को हिला देने वाली एक घटना में 4 साल के एक बच्चे की मौत उस समय हो गई जब कथित तौर पर उसकी मां ने यहां सैंट्रल मुंबई की एक बिल्डिंग की चौथी मंजिल से उसे नीचे फेंक दिया। पुलिस ने बताया कि मां ने जिस समय यह कदम उठाया उस समय वह शराब के नशे में थी। पुलिस ने कहा कि 4 वर्षीय फुल्ली को उसकी मां दयानदा उर्फ अनीता फुल्ली (23) ने अपने पति के साथ बहस के बाद पकड़ा और वर्ली स्थित बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर ले गई।
वर्ली थाने के एक सीनियर ऑफिसर ने कहा, ' अनीता शराब के नशे में थी और उसने चौथी मंजिल से बच्चे को नीचे फेंक दिया। कुछ पड़ोसियों द्वारा को निकट के केईएम हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया। ' पुलिस ने पहले दुर्घटना का मामला दर्ज किया था लेकिन उसकी मौत के बाद घटना का चश्मदीद होने की दावा करने वाली उसकी रिश्तेदार सामने आई और आज उसने मामला दर्ज कराया।
भारत की तलाश
Sunday, May 11, 2008
मदर्स डे पर, मां ने 4 साल के बेटे को चौथी मंजिल से फेंका
Friday, March 28, 2008
ढाई माह के बच्चे को गोद में लेकर मां दे रही परीक्षा
बूली बर्मन ने ढाई माह के गोद के बच्चे को लेकर उच्च माध्यमिक परीक्षा दे कर सबको हैरत में डाल दिया है। पश्चिम बंगाल में गोसानीमारी उच्च विद्यालय से परीक्षा दे रही दिनहाटा (कूचबिहार) महकमा के गोसानीमारी की निवासीबूली बर्मन बुधवार को गोपाल नगर एमएसएस हाईस्कूल में राजनीति विज्ञान की परीक्षा देने के लिए अपने नन्हे बच्चे को साथ लेकर परीक्षा केंद्र आयी थी।
करीब चार साल पहले पेटला की मूल निवासी बूली की शादी गोसानीमारी के निताई राय के साथ हुयी थी। सिर्फ ढाई माह पहले ही उसने पुत्र संतान को जन्म दिया है। अपने अबोध बच्चे को संभालते हुए बूली ने परीक्षा की तैयारी भी बखूबी कर ली थी। इसमें उसके पति ने भी उसका भरपूर साथ दिया। परीक्षा केंद्र में उसके साथ उसकी मां आती है जो बाहर बच्चे को संभालती है। परीक्षा के बीच में बच्चे के रोने पर उसे अक्सर परीक्षा हाल से बाहर आना पड़ता है। गोपालनगर एमएसएस हाईस्कूल के प्रधान शिक्षक नारायण देव ने बताया कि बूली के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गयी थी लेकिन वह उस पर राजी नहीं हुई।
अपनी तमाम मुश्किलों के बीच परीक्षा देने का हौसला रखने वाली बूली सचमुच तारीफ के काबिल है। उसका यह साहसिक प्रयास अन्य गृहिणियों के लिए मिसाल बन सकता है। गौरतलब है कि अक्सर गृहिणियां अपने घर के काम व बच्चों के बोझ का हवाला देकर पढ़ाई नहीं करना चाहती हैं। इनके लिए बूली प्रेरणा का स्रोत साबित हो सकती हैं।