भारत की तलाश

 
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Friday, November 7, 2008

झाड़ू लगाकर वोट मांगता है उम्मीदवार

भारतीय लोकतंत्र,  चुनावों के करीब आते ही मतदाताओं की हैसियत बदल देता है, नेताओं के लिए मतदाता भगवान हो जाते हैं,  वे उनका वोट पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। ऐसा ही कुछ मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह विधानसभा क्षेत्र में हो रहा है। जहां समाजवादी पार्टी (सपा) का उम्मीवार पहले सड़क पर झाडू लगाता है और फिर लोगों से वोट मांगता है।  मुरैना जिले के अंबाह विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सुरेन्द्र बाल्मीकि का नाता दलित परिवार से है। उनका परिवार सड़क पर झाडू लगाकर अपना पेट पालता है। सुरेन्द्र जिस भी इलाके का दौरा करते हैं उनके आगे-आगे 10 लोगों का हुजूम चलता है, जिनके हाथों में झाडू होती है। झाडू वालों को देखते ही क्षेत्रवासियो को पता चल जाता है कि सुरेन्द्र बाल्मीकि उनके क्षेत्र में आया हुआ है। ये लोग पहले उस मुहल्ले और गली में झाडू लगाते हैं उसके बाद सुरेन्द्र मतदाताओं के पैर छूकर वोट मांगते हैं। उनकी मतदाता से एक ही गुहार होती है कि उन्हें सेवा करने का अवसर देते रहिए।


सुरेन्द्र कहते हैं कि वे और उनका परिवार जनता की वर्षों से सेवा करता आ रहा है। वे विधायक बनकर जनता की तकलीफों का हरण करना चाहते हैं। सेवा उनका धर्म है इसलिए वे जनता को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि जो उन्होंने अभी तक किया है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। सुरेन्द्र विधान सभा पहुंचकर गरीब जनता की तकलीफों का खात्मा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि चुनाव आते ही उन्होंने इस तरह का अभियान शुरू नहीं किया है बल्कि वे कई वर्षो से इस क्रम को जारी रखे हुए हैं। वे जहां भी जाते हैं उनके साथी पहले उस इलाके में झाडू लगाते हैं। ऐसा करने के पीछे सेवा भाव के साथ यह संदेश भी छुपा हुआ है कि वे सेवक है राजा नहीं। 

Saturday, August 30, 2008

जनता ने इतिहास दोहराया, जनप्रतिनिधियों को कुर्सी से उतार कर

निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने की बहस के बीच छत्तीसगढ़ के तीन नगर पंचायतों के अध्यक्षों को वापस बुलाकर मतदाताओं ने इतिहास रच दिया था। अब फिर उसी छ्त्तीसगढ़ में फिर इतिहास दोहराया गया। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुसवी पंचायत के मतदाताओं ने 'वोट टू रिकॉल' का इस्तेमाल करते हुए अपने चुने हुए पंचायत अध्यक्ष को वापसी का रास्ता दिखा दिया है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुसवी पंचायत की जनता ने अपने चुने हुए पंचायत अध्यक्ष से नाखुश होकर उन्हें बेदखल करने के लिए मतदान में भाग लेते हुए बड़े पैमाने पर अपने मतों का प्रयोग किया। मतदान के परिणामों की जब गिनती पुरी हुई तो पंचायत अध्यक्ष को वापस जाने का मतदाताओं ने अपना आदेश वोट के माध्यम से भेज दिया था । कुछ समय पहले मतदाताओं ने जिस पंचायत अध्यक्ष को चुनकर भेजा था उसे ही 'वोट टू रिकाल' के तहत हुए मतदान में हराकर एक बड़ा संदेश दिया है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुसवी पंचायत में, वहाँ की जनता ने जो फैसला दिया है उसकी धमक, निश्चित तौर पर, पूरे देश में सुनाई देगी।