भारतीय लोकतंत्र, चुनावों के करीब आते ही मतदाताओं की हैसियत बदल देता है, नेताओं के लिए मतदाता भगवान हो जाते हैं, वे उनका वोट पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। ऐसा ही कुछ मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह विधानसभा क्षेत्र में हो रहा है। जहां समाजवादी पार्टी (सपा) का उम्मीवार पहले सड़क पर झाडू लगाता है और फिर लोगों से वोट मांगता है। मुरैना जिले के अंबाह विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सुरेन्द्र बाल्मीकि का नाता दलित परिवार से है। उनका परिवार सड़क पर झाडू लगाकर अपना पेट पालता है। सुरेन्द्र जिस भी इलाके का दौरा करते हैं उनके आगे-आगे 10 लोगों का हुजूम चलता है, जिनके हाथों में झाडू होती है। झाडू वालों को देखते ही क्षेत्रवासियो को पता चल जाता है कि सुरेन्द्र बाल्मीकि उनके क्षेत्र में आया हुआ है। ये लोग पहले उस मुहल्ले और गली में झाडू लगाते हैं उसके बाद सुरेन्द्र मतदाताओं के पैर छूकर वोट मांगते हैं। उनकी मतदाता से एक ही गुहार होती है कि उन्हें सेवा करने का अवसर देते रहिए।
भारत की तलाश
Friday, November 7, 2008
झाड़ू लगाकर वोट मांगता है उम्मीदवार
Saturday, August 30, 2008
जनता ने इतिहास दोहराया, जनप्रतिनिधियों को कुर्सी से उतार कर
निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने की बहस के बीच छत्तीसगढ़ के तीन नगर पंचायतों के अध्यक्षों को वापस बुलाकर मतदाताओं ने इतिहास रच दिया था। अब फिर उसी छ्त्तीसगढ़ में फिर इतिहास दोहराया गया। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुसवी पंचायत के मतदाताओं ने 'वोट टू रिकॉल' का इस्तेमाल करते हुए अपने चुने हुए पंचायत अध्यक्ष को वापसी का रास्ता दिखा दिया है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुसवी पंचायत की जनता ने अपने चुने हुए पंचायत अध्यक्ष से नाखुश होकर उन्हें बेदखल करने के लिए मतदान में भाग लेते हुए बड़े पैमाने पर अपने मतों का प्रयोग किया। मतदान के परिणामों की जब गिनती पुरी हुई तो पंचायत अध्यक्ष को वापस जाने का मतदाताओं ने अपना आदेश वोट के माध्यम से भेज दिया था । कुछ समय पहले मतदाताओं ने जिस पंचायत अध्यक्ष को चुनकर भेजा था उसे ही 'वोट टू रिकाल' के तहत हुए मतदान में हराकर एक बड़ा संदेश दिया है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुसवी पंचायत में, वहाँ की जनता ने जो फैसला दिया है उसकी धमक, निश्चित तौर पर, पूरे देश में सुनाई देगी।