भारत की तलाश

 

Tuesday, September 30, 2008

वो, बाढ़ पीड़ितों तक दवा पहुंचाने के लिए रोज 25 किमी. पैदल चलती है

उड़ीसा के चार जिले बाढ़ से तबाह हो चुके हैं लेकिन इस प्राकृतिक आपदा के दरम्यान ही यहां ऐसी साहसी महिला सामने आई है जो बाढ़ प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए किसी भी बाधा की परवाह नहीं करती है। यह हैं 35 वर्षीय संध्यारानी पंडा यानी संध्या दीदी जो यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं। सप्ताह पहले जब से यह पंचायत इलाका बाढ़ के पानी में डूबा है, तब से संध्यारानी पीड़ितों को आवश्यक दवाएं मुहैया कराने के लिए दिन भर में 25 किमी से अधिक दूरी पैदल तय करती हैं। संध्यारानी के पैरों में तकलीफ है और वह ठीक से चल नहीं पाती हैं। इसके बावजूद पत्कुरा ग्राम पंचायत में चित्रोत्पला नदी के बाएं तटबंध पर तीन स्थानों में दरार आने के बाद से उन्होंने बिल्कुल आराम नहीं किया है।

वह 20 सितंबर से मैं बाढ़ प्रभावितों को आवश्यक दवाएं बांट रही हूं। नदी के तट पर या जलमग्न हो चुके गांव में, हर दिन वह कम से कम 100 मरीजों से मिलती हैं। कई बार संध्यारानी को मरीजों तक दवा पहुंचाने के लिए घुटने तक पानी में लंबी दूरी तक चलना पड़ता है। मकान पानी में डूबे होने के कारण मरीज बाहर नहीं आ पाते हैं। साधारण कपड़े पहनने वाली संध्यारानी के कंधे पर थैला रहता है। इसमें बुखार, जुकाम, खांसी, पेचिश और अन्य बीमारियों के लिए दवाएं रहती हैं। ज्यादातर लोगों को बाढ़ के दौरान अधिक समय तक पानी में रहने की वजह से जुकाम और बुखार हो गया है। उन्होंने बताया कि पहले दिन मैंने 73 मरीजों को दवाइयां दीं। बाढ़ का प्रकोप बढ़ने के साथ साथ मरीजों की संख्या भी बढ़ती गई।

पैर की तकलीफ (एथलीट फुट) के बारे में वह कहती हैं कि मनुष्य होने के नाते मैं भी आराम चाहती हूं लेकिन मेरी अंतरात्मा कहती है कि लोगों की परेशानी को देखते हुए फिलहाल यह संभव नहीं है। संध्यारानी मरीजों को दवाइयां देने का दायित्व नि:स्वार्थ भाव से पूरा कर रही हैं लेकिन खुद उनके पास एथलीट फुट के इलाज की एकमात्र दवा पोटेशियम परमैगनेट नहीं है।
(राष्ट्रीय सहारा के समाचार पर आधारित)

Sunday, September 28, 2008

हेलिकॉप्टर पर सवार होकर आने वाला दूल्हा, सड़क का लुटेरा था!

3 साल पहले हेलिकॉप्टर पर सवार होकर ब्याह रचाने वाला वह दूल्हा, दरअसल सड़क का लुटेरा था। नोएडा फेज-2 पुलिस ने उसके गैंग का भंडाफोड़ कर 6 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। रोडरेज के सहारे यह गैंग लूटपाट को अंजाम देता था और पिछले एक महीने में 8 वारदातें कर चुका था। इन बदमाशों के पास से पुलिस ने एक स्कोडा कार, 2 वैगन आर, एक पिस्टल, 3 तमंचे समेत भारी मात्रा में लूट का सामान बरामद किया है। खास बात यह है कि गैंग का सरगना विनीत भाटी, बीबीए द्वितीय वर्ष का छात्र है।

पुलिस को एक्सप्रेस वे के आसपास वारदात करने वाले इस गैंग की कब से तलाश थी। नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार, ये पहले चलती कार में टक्कर मारते, कहासुनी करते-करते कार सवारों को हथियारों के बल पर बंधक बनाकर लूट लेते। सितंबर की 3 तारीख को इस गैंग का शिकार बने सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर कृष्णानू दत्ता के घर लगे सीसीटीवी के जरिए पुलिस को इनके हुलिए का सुराग लगा और शुक्रवार दोपहर पुलिस ने एक्सप्रेस वे पर वारदात की फिराक में घूम रहे इस गैंग को दबोच लिया। एसएसपी आर.के. चतुर्वेदी ने बताया कि विनीत की पत्नी ने उसकी इन्हीं हरकतों की वजह से एक हफ्ते पहले खुदकुशी करने की कोशिश की थी।

Saturday, September 27, 2008

सफाई कर्मी से टिकट कंडेक्टर बनी शकुन्तला

रेल्वे जंक्शन इटारसी के प्लेटफार्म और रेल्वे कालोनी की सड़कों पर झाडू लगाने वाली सफाई कर्मी महिला अब रेल यात्रियों से कहेगी टिकट प्लीज। सफाई का काम करने वाली यह दलित महिला अब कुछ दिन की ट्रेनिंग के बाद ट्रेन कंडक्टर (TC) बन जायेगी। यह संभव हुआ है इटारसी के नरेन्द्र नगर में रहने वाली महिला सफाई कर्मचारी शकुन्तला सारवान की मेहनत और लगन के कारण। उनके हाथों में झाडू नही अब कलम होगी और शरीर पर काला कोट। उनका चयन रेल्वे के विभागीय परीक्षा के बाद ट्रेन कंडक्टर (TC) के पद पर हुआ है।

नाम मात्र की पढ़ाई लिखाई करने वाली शकुन्तला सारवान बाल बच्चों वाली उम्र दराज अनुसूचित जाति की महिला है। सन् 1983-84 से केजुअल सफाई कर्मी के रूप में भारतीय रेल में सेवा दे रही है यह महिला 1990 में परमानेंट हुई। इसी बीच विगत अप्रैल माह में पार्सल क्लर्क, पाइन्ट्समेंन और टी.सी.सहित रेल्वे के अन्य पदों के लिये विभागीय वेकेन्सी निकली तो शकुनतला भी इसमें शामिल हुई और लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के उपरांत टी.सी के पद के लिये चयनित हो गई। अब वह आगामी 5 अक्टूबर को 51 दिन की ट्रेनिंग के लिये जोनल ट्रेनिंग सेंटर भुसावल जा रही है। ट्रेनिंग  में सब कुछ ठीक रहा तो उसकी पोस्टिंग भी हो जायेगी।

शकुंतला संभवत: देश की पहली महिला सफाई कर्मी है जो लीक से हटकर अपनी लगन और मेहनत के बल पर अपने हाथों के झाडू से पल्ला झाड़ा है और ट्रेन कंडक्टर (TC) बनी है। उनकी इस उपलब्धि के कारण ट्रेनिंग के पहले ही इटारसी रेल्वे के स्टेशन अधिक्षक ने उन्हें झाडू लगाने के काम से पृथक कर लिखा-पढ़ी के काम पर लगा दिया है। यह चतुर्थ श्रेणी सफाई कर्मचारी समाज के लिये मिसाल बन गई है। उनकी इस सफलता पर न सिर्फ उनके घर परिवार में बच्चों का लालन पालन ठीक से हो पायेगा बल्कि समाज में भी उसे तिरस्कार नही सहना पड़ेगा। सफाई कुनबे वाले बाल्मिक समाज इसे अनुकरणीय मान रहे है तथा पूरे समाज में उत्साह दिखाई देने लगा है।

शकुन्तला को जानने पहचानने वाले उनकी इस कामियाबी का बखान करते नही थकते। इनकी उपलब्धियों से विपरीत परिस्थितियों में भी हौसलामंद रहकर कामयाबी तक पहँचने की सीख मिलती है। 

Thursday, September 25, 2008

आईये, आईये, सुंदर युवतियाँ व महिलायें किराए पर भी उपलब्ध

डिजाइनर कपड़े और गहने किराए पर मिलना आम बात है, लेकिन अब सुंदर महिला साथी भी किराए पर उपलब्ध है। वो भी 10 से 15 हजार रुपए प्रति शाम के हिसाब से। ये पूरा कारोबार फिलहाल गरबा से जुड़ा है। नवरात्रि शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में मनपंसद गरबा मंडल में जाने के लिए युवकों को निराश नहीं होना पड़ेगा। 

अमीर लेकिन अकेले युवकों की महिला साथी की तलाश पूरी करती हैं, 20 से 26 साल की युवतियां। दैनिक भास्कर में निजा शाह की रिपोर्ट है कि, स्वयं को ‘फीमेल एस्कार्ट’ कहलाना पसंद करने वाली ये युवतियां सूरत, पुणे और मुंबई से आती हैं। इनमें कुछ विदेशी खासकर रूसी युवतियां भी यहां सुंदर महिला साथी की चाहत वाले युवकों के साथ गरबा करने के लिए उपलब्ध रहती हैं। 

गरबा के दौरान सुंदर महिला साथी की चाहत रखने वालों को उसके नाज-नखरे भी उठाने पड़ते हैं। मसलन, उन्हें इन युवतियों के आने-जाने, रहने, मोबाइल, गहने, परफ्यूम आदि का खर्च वहन करना पड़ता है। इसके अलावा, उन्हें कुछ बख्शीश भी देनी पड़ सकती है।

Monday, September 22, 2008

पंक्चर बनाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही

बीस वर्ष तक गृहिणी का जीवन जीने वाली झारखंड निवासी मगदाली ने ऐसा व्यवसाय अपनाया है जिस पर पुरुषों का एकाधिकार माना जाता है। वह साइकिल के पंक्चर बनाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। रांची में रहने वाली मगदाली का जीवन आज से पांच वर्ष पहले तक किसी आम घरेलू औरत की तरह अपने परिवार तक सिमटा हुआ था। उसी समय पंक्चर की दुकान चलाने वाले उनके पति की मौत हो गई। तीन बच्चों के साथ जिंदगी से जूझ रही मगदाली ने अपने पति के व्यवसाय को अपनाने का फैसला किया।

मगदाली ने आईएएनएस को बताया, ''पति की मौत के बाद मेरे परिवार के भूखों मरने की नौबत आ गई थी। तभी मैंने अपने पति की तरह पंक्चर बनाने का निर्णय लिया। सारा समान तो पहले से ही घर में था, बस मैंने काम सीखना शुरू कर दिया। अब मैं आराम से काम कर लेती हूं।'' मगदाली ने बताया कि शुरू में लोग मेरी ओर घूर कर देखते थे। उन्हें आश्चर्य होता था कि एक महिला पंक्चर बनाने का काम करती है। उनके पास दिन में 10 से 15 ग्राहक आते हैं और वह 50 से 150 रुपये प्रतिदिन कमा लेती है। मगदाली ने बताया कि उन्होंने अपनी बचत से दो वर्ष पूर्व अपनी बेटी की शादी भी की।

मगदाली को एक ही दुख है कि कमाई कम होने की वजह से वह अपने दोनों बेटों को पढ़ा नहीं पाई। अब उनकी इच्छा है कि वह बैंक से कर्ज लेकर अपने काम को साइकिल से मोटरसाइकिल और कार तक विस्तार दे।

Wednesday, September 17, 2008

बैग बना 'बम'! पति पत्नी की लड़ाई में!!

नोएडा के अट्टा गांव में रविवार देर रात एक वाकया हुआ। अट्टा गांव के चक्की वाली गली में किराए पर रहने वाले नवविवाहित जोड़े के बीच रात करीब साढ़े 11 बजे मामूली बात को लेकर आपस में कहासुनी हो गई। यह कहासुनी इस कदर बढ़ी कि बेचारे पति को घर से बाहर निकलने की नौबत आ गई। रूठे पति तुरंत अपना बैग लेकर घर से बाहर निकल आए। उनकी बीवी भी कम नहीं थीं, पति के घर से बाहर निकलने के बाद भी वह ताने मारने से बाज नहीं आईं। फिर क्या था पति ने गुस्से में बैग को गली में ही छोड़ दिया और तेजी से आंखों से ओझल हो गए। पत्नी भी घर में दुबक गई। इसके बाद वहां से गुजर रहे लोगों ने लावारिस बैग को ही बम समझ लिया और फिर कुछ देर में कोहराम मच गया।

बैग में बम होने की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए और पुलिस चौकी में इसकी सूचना दी। नवभारत टाइम्स में सुनील मौर्य की रिपोर्ट है कि आनन फानन में पुलिस की तीन जिप्सियां मौके पर पहुंचीं। लावारिस बैग देखकर पुलिसकर्मियों के भी पसीने छूटने लगे। करीब आधे घंटे तक पुलिस और पब्लिक लावारिस बैग को लेकर असमंजस की स्थिति में रही। पुलिस ने गाजियाबाद स्थित बम निरोधक दस्ते को भी सूचना दे दी। लोगों में दहशत देख दस्ते को गाजियाबाद से नोएडा तक आने का इंतजार नहीं किया जा सकता था। आखिरकार कोतवाली सेक्टर-20 में तैनात एक पुलिसकर्मी ने हिम्मत दिखाई और बैग की जांच की। बैग का जब राज खुला तो पुलिस व जनता हैरान रह गई और राहत की सांस ली।

मगर पुलिस अधिकारी देर रात गली में लावारिस बैग को छोड़े जाने को लेकर परेशान थे। बैग में कपड़ों की जांच और आसपास के लोगों से पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि यह बैग मूल रूप से उत्तरांचल के रहने वाले मुकेश (बदला हुआ नाम) का है। पुलिस ने जब मुकेश की पत्नी से पूछताछ की तो उसने पति से हुई झड़प की कहानी सुनाई। उसने बताया कि लोगों ने जब बैग को ही बम समझ लिया और अफरातफरी मच गई तो मैं यह सोचकर डर गई कि पुलिस मुझे गिरफ्तार कर लेगी। यही सोचकर कमरे में दुबक गई थी। इससे पूछताछ करने के बाद पुलिस ने मुकेश को भी ढूंढ निकाला और भविष्य में इस तरीके से आपस में नहीं झगड़ने की सलाह देकर छोड़ दिया।

राज्य मंत्री का भाई चोरी करते पकड़ा गया

उत्तर प्रदेश में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त मदन लाल बिन्द के सगे भाई शिवशंकर बिन्द को मंगलवार की सुबह कोतवाली क्षेत्र में लोगों ने चोरी करते वक्त पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी। बाद में उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस ने बताया कि शिवशंकर अपने 2 शातिर चोर साथियों के साथ एक दुकान का ताला तोड़कर समान मारुति कार में भर रहा थे, तभी लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी। शिवशंकर के 2 अन्य साथी भाग निकले।