इन दिनों मोबाइल उपभोक्ताओं को रोजाना कॉल ड्राप्स होने की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। इस मामले में मोबाइल कंपनियों का कहना है कि स्पेक्ट्रम कम होने की वजह से ऐसा हो रहा है। वहीं, टेलिकॉम विशेषज्ञों का कहना है कि असल में मोबाइल कंपनियां कमाई के लालच में ग्राहकों को दी जाने वाली सेवा से खिलवाड़ कर रही हैं। ऐसा कहा जाता है कि देशभर में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 31 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है और इस समय करीब 25 फीसदी की दर से नए उपभोक्ता जुड़ रहे हैं। ऐसे में उपभोक्तायों को सेवा देने के लिए मोबाइल कंपनियों को दूरसंचार मंत्रालय से मिले स्पेक्ट्रम कम पड़ते जा रहे हैं। परिणाम स्वरूप मोबाइल फोन पर सिग्नल कमजोर होने, न होने और सिग्नल पूरे होने के बावजूद कॉल ड्राप्स होने की समस्याएं बढ़ रही हैं।
स्पेक्ट्रम कम होने की बात को जानते हुए भी कमाई के लालच में रोजाना नए उपभोक्ता जोड़ने में लगी हैं। इस बात का पता कंपनियों को भी है कि मंत्रालय की ओर से जनवरी में 3-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी होने वाली है। इसके बावजूद वे ग्राहकों को अच्छी सुविधा मुहैया कराने के लिए थोड़ा इंतजार करने को तैयार नहीं है। इसके अलावा जब से एक कंपनी के मोबाइल टावरों को दूसरी कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जाने की छूट मिली है तब से भी समस्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। इससे कंपनियां उन स्थानों पर नए टावर लगाने पर कम ध्यान दे रही हैं जहां नेटवर्क कमजोर रहते हैं। इस कारण अधिकतर मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क में समस्या होने लगी है।
(विभिन्न माध्यमों से संकलित)
भारत की तलाश
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Saturday, October 25, 2008
मोबाइल कंपनियां कमाई के लालच में खिलवाड़ कर रही
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