एक टीटीई ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए महज 12 साल के एक छोटे बच्चे को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। बच्चे को बाहर फेंकने की एक मात्र वजह सिर्फ 50 रुपए थी। बच्चे को काफी गहरी चोट आई है। चलती ट्रेन से बाहर फेंके जाने पर उसका दाहिना हांथ और दाहिना पैर दोनो ही बुरी तरह से खराब हो गया है। अब उसके पास सिर्फ एक हांथ, पैर का ही सहारा रहेगा।
शंकर सिंह जो मात्र 12 साल का बच्चा है, अपना पेट पालने के लिए रेलगाड़ियों के डिब्बों की सफाई करता है। हर रोज की तरह बच्चा बेखौफ होकर ट्रेन के डिब्बे में घुस गया और सीट के नीचे साफ-सफाई करने लगा। सफाई के दरमियान उसे सीट के नीचे ही एक 50 रुपए का नोट मिला। बस इसी नोट को लेकर उसे अपने शरीर को अपंग बनाना पड़ा। इस नोट को टीटीई ने उससे मांगा लेकिन शंकर ने तुरंत ही मना कर दिया, इसके बाद धीरे-धीरे साधारण सी बातचीत झगड़े में बदल गई और टीटीई ने सारी हदें पार करते हुए उसे चलती गाड़ी से नीचे फेंक दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टीटीई ने उसे जोर-जोर के थप्पड़ भी लगाए, लोगों के मना करने पर भी उसने किसी की एक न सुनी और उसे चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया। शंकर के एक साथी ने घटना के बाद जीआरपी में केस दर्ज करा दिया है। बुरी तरह से घायल बच्चे को इस्पात जनरल अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार अब उसकी हालात पहले से ठीक बताई गई है।
भारत की तलाश
Friday, July 4, 2008
बच्चे को चलती ट्रेन से फेंका
Wednesday, May 14, 2008
बरस रहे हैं नोट, मोबाईल हो रहे रिचार्ज, बिना मांगे!?
आजकल विभिन्न बोर्ड की दसवीं और बारहवीं के इम्तिहानों की उत्तर पुस्तिकाएं रुपये उगल रही हैं। केन्द्रीय मूल्यांकन केन्द्रों पर ये नजारे दिख रहे हैं। कॉपी जांचने में लगे परीक्षकों के लिए रुपये आकर्षण पैदा किए हुए हैं। परीक्षक उत्तर पुस्तिका जांचने से पहले नोट तलाशते हैं। इस बार कड़ी व्यवस्था और नकल विरोधी अभियान ने जहां नकलची छात्रों को निराश किया है, वहीं उन्होंने पास होने के लिए टीचरों तक सीधे घूस पहुंचाने की नई तरकीब निकाली है। परीक्षा मूल्यांकन केन्द्रों पर बड़े पैमाने पर 100-50 व 10 रु. के नोट मिल रहे हैं। इनके साथ स्टूडेंट्स की छोटी सी और रोचक अपील भी है।
परीक्षकों के मुताबिक इस बार मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री और अंग्रेजी के पेपरों में छात्र बुरी तरह से फेल हो रहे हैं। एक परीक्षक ने बताया कि उसे 70 उत्तर पुस्तिकायों का एक बंडल जांचने के लिए मिला था। सभी में 100 से 200 रु. तक के करेंसी नोट लगे थे। इस प्रकार एक बंडल ने करीब 10 हजार के नोट एक ही दिन में उगल दिए। नियम के मुताबिकउत्तर पुस्तिका में नोट लगाना व इसे सीधे परीक्षकों द्वारा हजम कर जाना दोनों ही आपराधिक काम हैं और दंडनीय अपराध भी। पर फिलहाल इस मामले को संजीदगी से नहीं लिया जा रहा है।
एक और तरीका भी देखने में आ रहा है, जिसमें उत्तर पुस्तिका में लिखे गए मोबाईल नंबर पर जब कोई जांचकर्ता रिंग करता है तो थोड़ी ही देर में उसके मोबाईल पर ५०० या १००० रूपयों के रिचार्ज होने का एसएमएस आ जाता है!