उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में गणित के आसान से सवालों का जवाब न दे सकने वाले सरकारी स्कूल के 15 अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग ने राज्य सरकार से सिफारिश की है। जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने 9 सितम्बर को आईएएनएस को बताया कि विगत दो दिनों के दौरान जिले के प्राथमिक स्कूलों में अध्यापन मूल्यांकन के लिए हुए औचक निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों के अध्यापक आसान से गणित के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार से इन अध्यापकों की वेतनवृद्धि पर रोक और वेतन में कटौती की सिफारिश की गई है।
उन्होंने बताया कि अध्यापकों का इस तरह के सवालों का जवाब देने में असमर्थ होना उनके लिए चौंकाने वाला था। जिस स्कूल के अध्यापक इतने आसान सवालों का जवाब नहीं दे सकते हैं तो वहां के छात्रों से बेहतर प्रदशर्न की उम्मीद कैसे की जा सकती है। अधिकारियों के मुताबिक अध्यापकों से पूछे जाने वाले सवाल गणित पर आधारित और बेहद सरल थे, लेकिन कुछ अध्यापक उनका जवाब देने में असमर्थ रहे तो, कुछ ने गलत जवाब दिया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ स्कूल के अध्यापक तो 10 और 20 का पहाड़ा तक पूरा नहीं सुना पाये।
भारत की तलाश
Thursday, September 10, 2009
कानपुर में शिक्षक 10 का पहाड़ा नहीं सुना पाये!! बुलंदशहर में अश्लील क्लिपिंग देखते-दिखाते मिले, क्लास में!!
Monday, August 4, 2008
जेल में बंद सांसद शहाबुद्दीन, आईएसआई और कश्मीरी आतंकवादियों के लगातार संपर्क में
37 मोबाइल, 10 अतिरिक्त मोबाइल सिम, 19 मोबाइल बैट्री चार्जर,सात अतिरिक्त मोबाइल बैट्री, एक अवैध पंखा, आठ धारदार हथियार, चाबुक, 15 टेलीफोन डायरी, अन्य अभिलेख, एक हेडफोन एवं सात विदेशी परफ्यूम की बोतलों के अतिरिक्त गुटखा के पैकेट! यह सब बरामद हुया जिलाधिकारी वंदना प्रियदर्शी व पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार के नेतृत्व में रविवार को पूर्वाह्न साढ़े चार बजे, बिहार के सिवान जिला जेल में की गयी छापेमारी में। डीएम ने बताया कि छापेमारी में सांसद शहाबुद्दीन के पास से ही सात मोबाइल फोन के अतिरिक्त सात मोबाइल चार्जर बरामद किए गए। जब शहाबुद्दीन की जेल बैरक पर छापा मारा गया तो उसने जेल कर्मचारियों की मदद से ही अपने मोबाईल और सिम कार्ड छिपाने की कोशिश की मगर इन कोशिशों में वह कामयाब नहीं हो सका।
साढ़े चार घंटे तक चली कार्रवाई में जेल के सभी 27 वार्डो से दर्जनों मोबाइल फोन अतिरिक्त सिम कार्ड, टेलीफोन डायरी और उनमें दर्ज सैकड़ों लोगों के नम्बर तथा विदेशी परफ्यूम के अलावा कई अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद हुए। रईस खां के कमरे से दो, जितेन्द्र स्वामी के पास से चार मोबाइल व आठ अतिरिक्त सिम बरामद किये गये। उन्होंने कहा कि बरामद आपत्तिजनक सामानों के बारे में जेल मैनुअल के तहत कानूनी कार्रवाई का आदेश दे दिया गया है। जेल में छापामारी के कार्यक्रम पूरी तरह गुप्त रखा गया था जिससे जेल में इस दल के पहुंचते ही कैदियों में हड़कंप मच गया। सीवान की जिला कलेक्टर वंदना प्रियदर्शी के अनुसार, शहाबुद्दीन ने पुलिस अधिकारियों को अपनी बैरक में घुसने से रोका और कमाल की बात यह है कि बैरक के तालों की चाभियां भी उसके पास रखी थी।
जेल बैरक से बरामद बारह सिम कार्ड और सात मोबाइल फोन जांच के लिए दिल्ली भेजे गए तो उनसे बहुत सनसनीखेज जानकारियां बाहर आई। सिम कार्डो की पड़ताल से पता लगा है कि शहाबुद्दीन जेल के भीतर से अपना माफिया संसार तो चला ही रहा था, आईएसआई और कई कश्मीरी आतंकवादियों के भी लगातार संपर्क में था। सिम कार्डो की प्रारंभिक पड़ताल पटना पुलिस की साइबर शाखा ने कर ली है और इससे मिले सारे विवरण बताते हैं कि शहाबुद्दीन लगातार आतंकवादियों के संपर्क में था।
Sunday, June 29, 2008
भारत में निकाल लिया ब्रिटेन के ग्रामीणों का पैसा
ब्रिटेन के वर्सेस्टरशायर के एक गांव के आधे से ज्यादा लोग क्रेडिट कार्ड की अंतरराष्ट्रीय जालसाजी का शिकार हुए हैं। इनके खातों से भारत में पैसा निकाला जा रहा है। शिकायतों के बाद जांच में पता चला कि ब्रिटेन के उपभोक्तायों के खातों से चेन्नै और मुंबई सहित भारत के कई शहरों पैसा निकाला गया है। वर्सेस्टरशायर के ग्राम वीचबोल्ड में 700 घर हैं और इनमें से 400 परिवारों के खातों से धन विदेशों में निकाला गया है।
लोकल पुलिस का मानना है कि ई मेल की जानकारी के अनुसार विदेशों में उनके खातों से 50 से 100 पौंड निकाले गए हैं। मई में बोर्नमाउथ के ' डेली इको ' के एक पत्रकार ने पाया कि उनके खाते से चेन्नै में पैसा निकाला गया है। उनके इलाके के 500 और लोग भी इसी तरह की समस्या से जूझ रहे हैं। ब्रिटेन के सुरक्षा अधिकारी कार्ड की नकल पर काबू करने की कोशिश कर रहे हैं। चेन्नै में रहने वाले बी. कॉम थर्ड ईयर के एक स्टूडेंट को कई देशों के लोगों के क्रेडिट कार्ड्स की डिटेल्स हासिल कर उससे इलेक्ट्रॉनिक सामानों की ऑनलाइन खरीदारी करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। इससे साइबरस्पेस में धोखाधड़ी की अंधेरी दुनिया का सच सामने आया है।
हैकरों की कम्यूनिटी के एक सदस्य टी. भारथ्वाज पुरोहित (20) पर आरोप है कि उसने इस अप्रैल महीने से अब तक लोगों के क्रेडिट कार्ड्स का ऑनलाइन इस्तेमाल कर ढेर सारे इलेक्ट्रॉनिक आइटमों की खरीदारी की। पुलिस ने पुरोहित के पास से इलेक्ट्रॉनिक गिटार, पिंटर, एलसीडी टीवी, डिजिटल कैमरा, भार मापने का स्केल, मोबाइल, लैपटॉप (जिन सभी की कीमत तीन लाख रुपये बैठती है) और 38,000 रुपये कैश बरामद किए। बताया जाता है कि पुरोहित का मुंबई के मुलुंड निवासी अजय और अहमदाबाद निवासी संजय से ऑनलाइन संपर्क हुआ। अजय और संजय ने पुरोहित का हैकर्स कम्यूनिटी के सदस्यों से परिचय करवाया और खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स दिए। अजय और संजय की सलाह पर पुरोहित ने उनके द्वारा मुहैया कराए गए डेटा का इस्तेमाल कर एक महंगा मोबाइल सेट और आईपॉड बुक कराने की कोशिश की।
पुरोहित के आश्चर्य का उस वक्त ठिकाना नहीं रहा, जब उसे ये आइटम ऑर्डर देने के महज एक हफ्ते के अंदर मिल गए। उसने कुरियर के मार्फत कुछ कीमती आइटम अजय और संजय को गिफ्ट कर दिए। पुरोहित ने इसके बाद एक ऑक्शन वेबसाइट से और सामानों की खरीदारी शुरू की। डीसीपी बी. विजया कुमारी ने यह जानकारी दी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अमेरिका स्थित चार वेबसाइटें लोगों के क्रेडिट कार्ड्स से जुड़ी डिटेल बेचने का काम करती रही हैं। ये वेबसाइटें अमेरिका, कनाडा और रूस के लाखों क्रेडिट कार्ड्स यूजर के क्रेडिट वैल्यू वेरिफिकेशन नंबर बेहद कम कीमत पर उपलब्ध करा देती हैं। पुरोहित के ऑनलाइन क्राइम पार्टनर अजय और संजय ने इन वेबसाइटों से लोगों के क्रेडिट कार्डों से जुड़ी सूचनाएं इकट्ठा कर रखी थीं।
सीसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि पुरोहित ने हमें इन वेबसाइटों के बारे में बताया है और हम इसकी पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं। पुरोहित ने केवल मनोरंजन के लिए अजय और संजय से ऑनलाइन चैटिंग शुरू की थी लेकिन वह साइबर क्राइम की दलदल में जा फंसा। अजय-संजय ने, जिनकी उम्र 16 साल के करीब है, पुरोहित को अपने पास पैसे भेजने को कहा था और इसके बदले मुफ्त खरीदारी के लिए दूसरों के क्रेडिट कार्ड डिटेल्स देने की पेशकश की। पुरोहित शुरू में तो झिझका पर बाद में लालच में पड़ गया।
Wednesday, May 14, 2008
बरस रहे हैं नोट, मोबाईल हो रहे रिचार्ज, बिना मांगे!?
आजकल विभिन्न बोर्ड की दसवीं और बारहवीं के इम्तिहानों की उत्तर पुस्तिकाएं रुपये उगल रही हैं। केन्द्रीय मूल्यांकन केन्द्रों पर ये नजारे दिख रहे हैं। कॉपी जांचने में लगे परीक्षकों के लिए रुपये आकर्षण पैदा किए हुए हैं। परीक्षक उत्तर पुस्तिका जांचने से पहले नोट तलाशते हैं। इस बार कड़ी व्यवस्था और नकल विरोधी अभियान ने जहां नकलची छात्रों को निराश किया है, वहीं उन्होंने पास होने के लिए टीचरों तक सीधे घूस पहुंचाने की नई तरकीब निकाली है। परीक्षा मूल्यांकन केन्द्रों पर बड़े पैमाने पर 100-50 व 10 रु. के नोट मिल रहे हैं। इनके साथ स्टूडेंट्स की छोटी सी और रोचक अपील भी है।
परीक्षकों के मुताबिक इस बार मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री और अंग्रेजी के पेपरों में छात्र बुरी तरह से फेल हो रहे हैं। एक परीक्षक ने बताया कि उसे 70 उत्तर पुस्तिकायों का एक बंडल जांचने के लिए मिला था। सभी में 100 से 200 रु. तक के करेंसी नोट लगे थे। इस प्रकार एक बंडल ने करीब 10 हजार के नोट एक ही दिन में उगल दिए। नियम के मुताबिकउत्तर पुस्तिका में नोट लगाना व इसे सीधे परीक्षकों द्वारा हजम कर जाना दोनों ही आपराधिक काम हैं और दंडनीय अपराध भी। पर फिलहाल इस मामले को संजीदगी से नहीं लिया जा रहा है।
एक और तरीका भी देखने में आ रहा है, जिसमें उत्तर पुस्तिका में लिखे गए मोबाईल नंबर पर जब कोई जांचकर्ता रिंग करता है तो थोड़ी ही देर में उसके मोबाईल पर ५०० या १००० रूपयों के रिचार्ज होने का एसएमएस आ जाता है!
Thursday, May 8, 2008
लैपटॉप बेचकर गर्ल फ्रेंड को खुश कर रहे हैं छात्र
प्रेमिका (सॉरी, आजकल इन्हें गर्ल फ्रेंड कहते हैं) को फिल्में दिखाना, रेस्तरां में खाना खिलाना और उससे मोबाइल पर घंटों बातें करने का खर्च बाहर से आ कर किसी शहर में पढ़ने वाले छात्रों की जेब पर भारी पड़ रहा है। इसके साथ बाइक का खर्च, दोस्तों के साथ जाम छलकाने और महंगे कपड़े आजकल के 'बच्चों' की दुखती रग बन गए हैं।
घर से मिलने वाले तयशुदा पैसों में यह सारे खर्चे पूरे नहीं हो पाते हैं। इसके लिए इन छात्रों ने कई तरीके निकाल लिए हैं। मोबाइल फोन और लैपटॉप बेचकर, उनकी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराकर वे अपने खर्चे पूरे कर रहे हैं। ऐसे मामले हर रोज सामने आ रहे हैं। कासना थाने में ही इस तरह का मामला हर तीसरे दिन आ जाता है। पुलिस की जांच में यह बात साबित हो गई है कि अपने खर्चे पूरे करने के लिए ये छात्र ऐसा काम कर रहे हैं। वे सामान चोरी होने का बहाना बनाकर घर वालों से पैसा वसूल लेते हैं।
मीडिया में आयी खबरों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के संस्थानों में करीब 40 हजार छात्र हैं। बदलते लाइफस्टाइल ने इनके खर्चे भी बढ़ा दिए हैं। वे सबसे ज्यादा अपनी गर्ल फ्रेंड के ऊपर खर्च करते हैं। बात चाहे उसे मूवी दिखाने की हो या फिर रेस्तरां में खाना खिलाने की हो, सभी कामों में वे खुलकर पैसे खर्च करते हैं। इसके अलावा रात में घंटों मोबाइल फोन पर बातें करने का बिल भी हजारों में आता है। वहीं बाइक से लॉंग ड्राइव पर जाना और दोस्तों के साथ जाम छलकाना भी जेब ढीली कर देता है, लेकिन उनको एक निश्चित रकम ही मिलती है। बढ़े खर्च को पूरा करने के लिए स्टूडेंट्स कुछ अलग रास्ते निकाल रहे हैं।
स्टूडेंट्स ने अपने महंगे मोबाइल फोन और लैपटॉप बेचने शुरू कर दिए हैं। इनको बेचकर वे अपने परिजनों को चोरी की सूचना देते हैं। कुछ छात्रों के पालकों को अपने सपूतों के कारनामों का आभास होता है, ऐसे में ये 'लायक बेटे' सामान की चोरी के सबूत के तौर पर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं। ग्रेटर नोएडा के कासना थाने के इंचार्ज गुलजार अहमद के अनुसार उनके पास हर तीसरे दिन ऐसी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने स्टूडेंट्स आते हैं। चोरी होती है लैपटॉप और महंगे मोबाइल की। उन्होंने बताया कि लैपटॉप चोरी के मामले बढ़ने की जांच की गई, तो आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए। कई स्टूडेंट्स से कड़ी पूछताछ की गई, तो उन्होंने लैपटॉप बेचने की बात स्वीकार कर ली। इसके साथ ही उन्होंने थाना इंचार्ज से प्रार्थना की कि उनके परिजनों को यह बात न बताई जाए।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा कुछ स्टूडेंट्स लूट और चैन स्नैचिंग जैसी वारदात में भी अंजाम देते हैं। करियर को ध्यान में रख पुलिस इनके प्रति नरम रुख अपनाती है, जिसका ये फायदा उठाते हैं।