भारत की तलाश

 
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Monday, March 2, 2009

कुंवारों में नसबंदी कराने का चलन शुरू

अब भारत के कुंवारों में नसबंदी कराने का चलन शुरू हो चुका है। कुंवारों द्वारा नसबंदी कराने के मामले प्रकाश में आने के बाद अब सख्ती का फैसला हुआ है। नसबंदी अब तभी होगी जबकि पति-पत्नी साथ आएंगे या लड़के के साथ मां या पिता होंगे। पता चलने पर कुंवारों को भगा दिया जाता है, लेकिन कोई झूठ ही बोले तो कुछ नहीं हो सकता। चूंकि नसबंदी खुल जाती है, इसलिए लोग डरते नहीं। डाक्टरों के अनुसार पुरुष नसबंदी में 15 मिनट का समय लगता है, जबकि खुलवाने में 3 घंटे लगते हैं। नसबंदी खुलवाने के लिए परिवार की रजामंदी जरूरी है।

कुछ लोग नसबंदी के बदले मिलने वाले रुपये के लिए आपरेशन करा रहे हैं तो कुछ ऐसे कुंवारे भी आपरेशन कराने पहुंच रहे हैं जिन्हें अपनी महिला दोस्त के साथ शारीरिक संबंध बनाने हैं लेकिन दोस्त तैयार नहीं और पहले आपरेशन का सुबूत चाहती है। चौंक गए ना? दिल्ली के अस्पतालों में आए दिन दूसरे शहरों के लड़के भी आपरेशन कराने पहुंच रहे हैं। ऐसे ही हैं 21 साल के राहुल सामंत जो अच्छे परिवार से हैं, बड़ी कंपनी में काम करते हैं लेकिन अपनी दोस्त के कहने पर लोकनायक अस्पताल पहुंच गए नसबंदी कराने। डाक्टर ने पूछा तो लापरवाह जवाब था, बाद में खुल जाएगी। 

संजय गांधी अस्पताल में पिछले ही महीने 20 वर्षीय प्रदीप कुमार ने आपरेशन करा लिया था। घर वालों को पता चला तो अस्पताल भागे और मां के कहने पर डाक्टरों को नसबंदी खोलनी पड़ी। जागरण में सुनील पाण्डेय लिखते हैं कि अस्पतालों में नसबंदी कराने आने वालों का चूंकि घरेलू रिकार्ड नहीं मांगा जाता, इसलिए कुंवारे इसका फायदा उठा लेते हैं।

कुछ प्रतिक्रियांयें भी देखिये:
 
प्रोफेसर प्रो. एनके चड्ढा, मनोविज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय: नसबंदी करवाने वाले कुंवारे 'साइकोपैथ' हैं।

समाजशास्त्री विजय लक्ष्मी दीवान, कमला नेहरू कालेज: महिला दोस्त के कहने पर नसबंदी कराने की बात नई है। यह हमारी ढहती सामाजिक व्यवस्था का नमूना है। 

केटीएस तुलसी, वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट: जो बालिग है, वह स्वतंत्र है। वह नसबंदी करा रहा है, कोई अपराध नहीं। इस पर आपत्ति क्यों?

डा. राजेश सागर, मनोवैज्ञानिक, एम्स: युवा पीढ़ी शादी को बंधन मानती है। इसीलिए शादी और बच्चा पैदा करने का चलन घट रहा है। 

Sunday, March 30, 2008

दारू पीने के लिए गूंगे-बहरे दोस्त की नसबंदी करवाई!

शराब पीने के लिए जब उनको पैसों की जरूरत पड़ी, तो दोस्तों ने मिलकर गूंगे दोस्त की नसबंदी (स्टरलाइजेशन) करवा दी। गूंगे की अभी शादी भी नहीं हुई है। स्टरलाइजेशन की 1,100 सौ रुपये की राशि लेकर दोस्त दारू पी गए। इस संबंध में गूंगे इंद्रकुमार के परिजनों ने पुलिस में शिकायत की है। पुलिस ने उसका मेडिकल कराया, तो उसमें स्टरलाइजेशन किए जाने की पुष्टि हुई है। सिविल हॉस्पिटल के एमएस असरुद्दीन के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।

गुड़गांव अर्जुन नगर कैंप में रहने वाले 30 साल के इंद्रकुमार के दोस्तों ने उसके गूंगे होने का फायदा उठाया। इंद्र के मामा ओमप्रकाश गाबा के मुताबिक, उसके दोस्त गुरुवार को उसे सिविल हॉस्पिटल ले गए, जहां उसका स्टरलाइजेशन करा दिया गया। इस संबंध में जब परिजनों को भनक लगी, तो पता लगा कि कॉलोनी के कुछ आवारा लड़कों ने दारू पीने के लिए उसका ऑपरेशन करवा दिया। इसके बाद मिले 1,100 रुपये की वे शराब पी गए। गौरतलब है कि नसबंदी करवाने वाले पुरुषों को 1,100 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। पुलिस को मामले में अशोक व अन्य लड़कों की तलाश है।

उधर, इस तरह का मामला प्रकाश में आने से सिविल हॉस्पिटल में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन कर रहे दो डॉक्टरों में से एक ने इंद्र को पहचाना नहीं, जबकि दूसरा डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो सका। हॉस्पिटल रजिस्टर में इंद्र नाम से कोई इंट्री नहीं है। हालांकि मेडिकल जांच में नसबंदी होना पाया गया है। ओमप्रकाश गाबा के अनुसार, वह जन्मजात गूंगा-बहरा है। कॉलोनी के लड़कों ने इसका फायदा उठाया है। पढ़ा लिखा नहीं होने से उसका अंगूठा लगवाया गया है। हॉस्पिटल प्रबंधन अब अंगूठे का मिलान करने की तैयारी में है।