भारत की तलाश

 
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Sunday, April 20, 2008

अब सच लगता है: करदे मुश्किल जीना, इश्क कमीना

इश्क, प्यार, मुहब्बत। कोई माने या ना माने, इन शब्दों का एक ही मतलब होता है, त्याग। बेशक, तरीका अलग हो सकता है। ऐसे ही एक तरीके में, एक बेटी (!?) ने अपने परिवार के साथ जो किया, उसे देख व सुन शायद, इंसान यही कहने को विवश होगा कि भगवान ऐसी बेटी को किसी के घर जन्म ही न दे। इश्क, किसी परिवार के एक नहीं बल्कि सभी सात सदस्यों के लिए मौत का सबब बन जाएगा, इसकी कल्पना शायद ही कोई करे। ज्योतिबा फूले नगर [अमरोहा] में एक दुर्भाग्यपूर्ण परिवार की लड़की, परिजनों के लाख मना करने के बावजूद वह अपने प्रेमी से प्यार की पींगे बढ़ाती रही और आखिर में अपना प्यार परवान न चढ़ते देख प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिजनों के लिए यमराज बन बैठी। हैवान बनकर केवल अपने प्रेमी को पाने की खातिर माता-पिता व छोटे भाई-बहनों की जिंदगी अपने ही हाथों से छीन ली। इस बेहद वीभत्स व दर्दनाक वाकये को अंजाम देने से पहले उस लड़की का दिल अपने माता-पिता व छोटे भाई-बहनों की जिंदगी के लिए तनिक भी नहीं पसीजा और अपने परिवार का समूल ही मिटा दिया। ऐसा करके उसने खून के रिश्ते, इंसानियत, मानवता आदि का ही गला नहीं घोटा बल्कि मानवीय समाज की सभी वर्जनाओं को भी तार-तार करके रख दिया।

एक ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में पुलिस ने शबनम और सलीम को गिरफ्तार कर इस हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा किया। इस हत्याकांड में 24 वर्षीय शबनम ही एक मात्र जीवित बची थी क्योंकि वह छत पर सो रही थी। यह हत्याकांड हसनपुर थाना क्षेत्र के बावनखेड़ी गांव में हुआ था। जल्दी ही पुलिस को शबनम पर शक होने लगा और इसका आधार था घर का मजबूत लोहे का दरवाजा, जिसे तोड़कर अंदर आना संभव नहीं था। पुलिस यही मानकर चली कि दरवाजे को अंदर से ही खोला गया है। मारे गए सभी लोगों के शवों से भी पता चलता था कि ये सभी मूर्छित अवस्था में थे और प्रतिरोध किए जाने के कोई लक्षण नहीं मिले। शबनम के मोबाइल का विवरण प्राप्त करने के बाद पुलिस के हाथ महत्वपूर्ण सूत्र लगे। तीन महीने में 900 से ज्यादा बार उसकी बात उसी गांव में आरा मशीन चलाने वाले सलीम पुत्र अब्दुल रऊफ से हुई थी। दोनों के बीच गहरा इश्क था।

पुलिस महानिदेशक के अनुसार शबनम का परिवार हर दृष्टि से सलीम के परिवार से संपन्न था और शबनम स्वयं शिक्षा मित्र के रूप में कार्यरत थी। पारिवारिक रुतबे में बराबरी न होने के कारण शबनम के घरवालों ने दोनों की शादी से इनकार कर दिया था। शादी न करने देने से नाराज प्रेमी ने प्रेमिका के घरवालों को ही साफ करने का इरादा किया और इसमें उसका साथ प्रेमिका ने बखूबी निभाया। शबनम ने परिवार के सभी सदस्यो को नशीली दवा खाने में मिलाकर दे दी और जब वे बेहोश हो गए तो पूर्व निर्धारित योजनानुसार सलीम को फोन से बुलवा लिया।

उन्होंने बताया कि दोनो ने टार्च की रोशनी में परिवार के छह सदस्यों के गले काट दिए, जबकि एक बच्चे को गला घोटकर मार दिया। उन्होंने बताया कि तलाशी मे शबनम के घर से उसका रक्त रंजित सलवार कुर्ता और बायापोज की गोलियों का रैपर भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि सलीम और शबनम ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।