एक लोमहर्षक घटनाक्रम में पूर्व मध्य रेलवे के मुगलसराय रेलमंडल में सासाराम-सय्यद राजा स्टेशन के बीच चलती ट्रेन से टीटी ने एक दम्पति को बाहर फ़ेंक दिया जिससे पति की मौके पर ही मौत हो गयी। पुलिस सूत्रों के अनुसार उत्तरप्रदेश के चंदौली जिला के धीना थाना क्षेत्र के शिव शंकर और उसकी पत्नी संध्या देवी ने उत्तर प्रदेश के चंदौली जाने के लिए साधारण टिकट लेकर सासाराम रेलवे स्टेशन से हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस पकड़ा था। दोनों साधारण डिब्बे में की बजाय आरक्षित डिब्बे में चढ़ गए।
जब टीटीई ने उन्हें पकड़ा तो आरक्षित टिकट बनाने के लिए अतिरिक्त रुपये की मांग की लेकिन दंपति ने और रुपये देने से इंकार कर दिया। इससे नाराज होकर टीटीई ने उन्हें लालपुर रेलवे गुमटी के पास चलती ट्रेन से बाहर फ़ेंक दिया। श्री बारी की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गयी।
भारत की तलाश
Sunday, March 21, 2010
चलती ट्रेन से टीटी ने एक दम्पति को बाहर फ़ेंक दिया
दिल्ली पाकिस्तान में! कोलकाता बंगाल की खाडी में!!
सरकारी कामकाज किस तरह होते हैं, एक नमूना देखिए। पूर्वी रेलवे ने 20 मार्च को कोलकाता तथा दिल्ली के बीच चलने वाली लग्जरी गाड़ी महाराजा एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह के बारे में प्रमुख समाचार पत्रों में एक विज्ञापन दिया। विज्ञापन में एक नक्शे के जरिए रेलगाडी का मार्ग समझाते हुए दिल्ली को पाकिस्तान में तथा कोलकाता को बंगाल की खाडी में बताया गया। गाडी कोलकाता से नई दिल्ली जाएगी तथा इसमें गया, वाराणसी, खजुराहो, ग्वालियर के राज्य ही बदल दिए गए हैं।
विज्ञापन एजेंसी को विज्ञापन देने वाली पूर्वी रेलवे ने हालांकि इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है तथा दोष विज्ञापन तैयार करने वाली निजी एजेंसी के मत्थे मढ़ दिया है। पूर्वी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि जब यह विज्ञापन एजेंसी ने रेलवे को दिखाया था तो उसमें भारत का नक्शा ठीक था लेकिन बाद में कैसे उलट-पुलट गया। उन्हें समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि फिर भी उत्तर रेलवे इस गलती के लिए क्षमा प्रार्थी है। एडोनिक 76 विज्ञापन एजेंसी ने यह विज्ञापन बनाया था तथा भारत के नक्शे में शहरों के स्थान गलत दिखाना उनकी भारी गलती थी। इस विज्ञापन एजेंसी को काली सूची में डाल दिया गया है तथा उसे अब रेलवे का कोई काम नहीं सौंपा जाएगा।
गौरतलब है कि इस वर्ष जनवरी में महिला तथा बाल कल्याण मंत्रालय ने एक विज्ञापन छापा था जिसमें विभाग के विज्ञापन में पाकिस्तान के पूर्व वायुसेना प्रमुख तनवीर अहमद का चित्र भारत के विशिष्ट सपूतों वीरेन्द्र सहवाग, कपिल देव व अमजद अली के साथ दिखाए गए थे।
Saturday, March 20, 2010
मोबाईल के सहारे, सड़क या खेतों में बिना ड्राइवर के ट्रैक्टर चलेंगे
अब सड़क या खेतों में बिना ड्राइवर के ट्रैक्टर दौड़ता हुआ दिखाई दे तो चौंकियेगा नहीं, तकनीकी के इस दौर में यह संभव कर दिखाया है मोगा, पंजाब के लाला लाजपत राय पॉलीटेक्निक कॉलेज अजितवाल के दो छात्रों ने। उन्होंने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है जो मोबाइल फोन के माध्यम से ट्रैक्टर को नियंत्रित करता है। मोबाइल फोन से ही ट्रैक्टर को स्टार्ट और बंद किया जा सकेगा और इसे सड़क या खेतों में दौड़ाया जा सकता है। 19 मार्च को कॉलेज परिसर में पवित्र सिंह और गुरदित्त सिंह ने तैयार किए गए उपकरण का प्रदर्शन कर सबको हैरान कर दिया।
दैनिक भास्कर में दीपक सिंगला की दिलचस्प रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रैक्टर को इन दोनों छात्रों ने मोबाइल की थ्री जी सेवा के साथ जोडा़ है। एक मोबाइल उपकरण ट्रैक्टर पर लगाया है जिसके कैमरे से ट्रैक्टर आगे की दिशा निर्धारित कर आगे बढ़ता है। ट्रैक्टर में भी गीयर और रेस, ब्रेक भी अपने आप ही लगते हैं।
मोबाइल फोन के माध्यम से ट्रैक्टर की पल-पल की स्थिति का भी पता लग सकेगा। दूसरे मोबाइल फोन से इस ट्रैक्टर को दुनिया के किसी भी स्थान पर बैठकर चलाया जा सकता है। इस प्रणाली को तैयार करने पर 95000 रुपये का खर्च आया है। दिलचस्प बात यह है कि अगर चलते हुए ट्रैक्टर के आगे कुछ दूरी तक कोई भी वस्तु आ जाती है तो वह वहीं रुक जाएगा। यह सेंसर के माध्यम से संभव हुआ है। सेंसर ट्रैक्टर के अगले हिस्से में फिट किए गए हैं।
इसे तैयार करने में तीन माह का समय लगा है। अभी 3 जी नेटर्वक सभी देश में सभी जगह उपलब्ध न होने के कारण कुछ मुश्किलें आ रही हैं लेकिन आने वाले समय में इसका लाभ कोई भी उठा सकेगा।
Tuesday, March 9, 2010
क्या इस युवती के लिए शाबासी और तालियाँ ही बहुत हैं?
खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है? शायद यह पंक्तियां कल्पना सरोज जैसी महिला के लिए ही लिखी गई हैं, जो उस बीमार कंपनी को नया जीवन देने का प्रयास कर रही हैं जिसे हाथ लगाने से बड़े-बड़े उद्योगपति भी डर रहे थे।
बंद पड़ चुकी कमानी टयूब्स लिमिटेड। उस पर 116 करोड़ रुपयों का कर्ज। 120 से ज्यादा मुकदमे। 500 से ज्यादा कर्मचारियों के बकाया देय। और दो यूनियनें। इनमें से एक कर्मचारी संगठन एक बार बीआईएफआर से कंपनी की कमान संभालकर असफल भी हो चुका था। दूसरी ओर कल्पना को कंपनी चलाने का कोई अनुभव नहीं। इसके बावजूद हिम्मत बांध ली। क्योंकि सवाल खुद के लिए पैसा कमाने का नहीं, बल्कि कंपनी बंद होने से बदहाल हो रहे कर्मचारियों के भविष्य का था।
Friday, March 5, 2010
केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय का दफ़्तर एक ड्राईवर चला रहा!!
मैं तो इसे अनूठा मामला नहीं मानता। ऐसा देश के कई हिस्सों में हो रहा होगा। बात हो रही है केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय के अमृतसर स्थित कार्यालय की जिसे विभाग का एक ड्राइवर संभाल रहा है। यह ड्राइवर 'साहिब' गाड़ी ही नहीं दफ्तर भी चला रहे हैं। 1960 में आरंभ हुए कार्यालय में इस समय न स्टाफ है और न ही पर्याप्त सुविधाएं। एक मेज व चार कुर्सियों के सहारे ही मंत्रालय का कार्यालय चल रहा है। दो गाड़िया तो हैं, लेकिन दोनों बेकार। वर्षो से इमारत का रंग रोगन तक नहीं हुआ है।
दैनिक जागरण में रमेश शुक्ला सफर की एक दिलचस्प रिपोर्ट आई है कि इस कार्यालय का एडिशनल चार्ज गगनदीप कौर के पास है, लेकिन जालंधर के साथ कई और शहरों की जिम्मेवारी होने के चलते वह अमृतसर कार्यालय में कम ही मिलती हैं। कार्यालय का दायित्व केंद्र सरकार की रोजगार, ग्रामीण विकास, बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गो के लिए नई योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है। लेकिन आजकल यह कार्यालय खुद परिचय का मोहताज हो गया है। आम लोगों को शायद ही पता हो कि रानी बाग के पास केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय भी है।
दैनिक जागरण के संवाददाता ने जब उक्त कार्यालय का दौरा किया तो देखा कि कार्यालय में बैठे ड्राइवर बलदेव शर्मा रजिस्टर में कुछ लिख पढ़ रहे थे। उनसे जब पूछा गया कि आफिस का स्टाफ क्या छुट्टी पर है तो वह कहने लगे, काहे का स्टाफ। यहा न तो क्लर्क हैं और न स्थायी अधिकारी। पानी पिलाने के लिए एक स्टाफ था वह भी रिटायर हो चुका है। मैं तो ड्राइवर हूं। सुबह नौ बजे कार्यालय खोलता हूं, शाम पाच बजे बंद करता हूं। हालाकि एफपीओ [फील्ड पब्लिसिटी अफसर] गगनदीप कौर हैं, लेकिन उनके पास इस कार्यालय का एडिशनल चार्ज है वह जालंधर कार्यालय भी देखती हैं। कार्यालय में लोगों के लिए पूछताछ के लिए एक फोन है, लेकिन कोई फोन आता ही नहीं।
इस बाबत गगनदीप कौर ने जागरण को बताया कि फिलहाल वह अमृतसर में ही होती हैं, जालंधर का भी चार्ज है ऐसे में एक-एक सप्ताह वह दोनों स्टेशनों को कवर करती हैं। चूंकि उनका अधिकाश काम ग्रामीण क्षेत्रों में होता है इसलिए आफिस में बैठने की फुर्सत नहीं मिलती!
Saturday, February 27, 2010
दिल्ली के बदरपुर साई बाबा मंदिर में वेश्यावृत्ति: प्रमुख एयरलाईंस की दो एयरहोस्टेस पकड़ाईं
दिल्ली पुलिस ने मंदिर में वेश्यावृत्ति कराने का एक रैकेट पकड़ा है। इस मामले में दो एयरहॉस्टेस समेत छह लड़कियों और एक कथित स्वामी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए दो कथित दलालों में एक शिवमूरत द्विवेदी (39)उर्फ इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंदजी महाराज चित्रकूटवाले ने साउथ दिल्ली के खानपुर इलाके में एक मंदिर बनवाया था। जो छह लड़कियां गिरफ्तार हुई हैं उनमें दो एयरहॉस्टेस और एक एमबीए स्टूडेंट है।
यह रैकेट पकड़ में तब आया जब 25 फरवरी को पुलिस को जानकारी मिली कि कुछ कॉलगर्ल और दलाल पीवीआर साकेत आने वाले हैं। पुलिस ने जाल बिछाया और फर्जी ग्राहक बन कर पुलिस अधिकारियों ने इनसे संपर्क किया। फर्जी सौदा हुआ और पूरी गैंग पुलिस की गिरफ्त में आ गया। दोनों एयर हॉस्टेस प्रमुख एयरलाइंस में काम करती हैं और साउथ दिल्ली के पॉश इलाकों में बड़े अपार्टमेंट्स में रहती हैं।
डीसीपी (साउथ)एच.जी.एस. धालीवाल ने बताया कि अपनी करतूतों को छिपाने के लिए द्विवेदी ने अपना नाम बदल लिया और खुद को साई बाबा का शिष्य घोषित कर दिया। उसने बदरपुर में साई बाबा मंदिर शुरू किया और मंदिर के अहाते में ही वेश्यावृत्ति का धंधा शुरू कर दिया। उसने खानपुर में भी एक मंदिर बनवाया। वह सतसंग आयोजित करता था और प्रवचन भी देता था। उसने चित्रकूट में 200 बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी बनवाया।
पुलिस के मुताबिक द्विवेदी चित्रकूट का है और 1988 में दिल्ली आया। वह पहले नेहरू प्लेस के एक 5 स्टार होटल में वाचमैन था, फिर उसने लाजपतनगर के एक मसाज पार्लर में भी काम किया। वह वेश्यावृत्ति के मामले में 1997 में और चोरी की संपत्ति रखने के मामले में 1998 में गिरफ्तार हो चुका है।
Saturday, January 9, 2010
गुंडों ने सब-इंस्पेक्टर की टाँग काट दी: 70 कारों वाले काफिले में दो मंत्री देखते रहे, मदद किसी ने नहीं की
तमिलनाडु के तिरुनलवली में बदमाशों ने एक पुलिस सब इंस्पेक्टर की बेरहमी से हत्या कर दी। बदमाशों ने न सिर्फ सब इंस्पेक्टर को बुरी तरह मारा-पीटा बल्कि उसकी एक टांग भी काट दी। हैरत की बात ये है कि दिल को दहला देने वाली ये घटना तमिलनाडु के दो मंत्रियों के सामने हुई। दोनों मंत्री पनीरसेल्वम और मोहिदीन खान तमाशबीन बने रहे और किसी ने भी उसे बचाने की कोशिश नहीं की। इन दोनों मंत्रियों के साथ करीब 70 कारों का काफिला था। उनमें से भी कोई शख्स सब इंस्पेक्टर की मदद के लिए सामने नहीं आया।
हुआ यूँ कि कुछ गुंडों ने तमिलनाडु पुलिस के एक इंस्पेक्टर आर. वेट्रीवेल (44) के पैर काट कर उसे तड़पते हुए सड़क पर छोड़ दिया। उसी सड़क से राज्य के दो मंत्री- स्वास्थ्य मंत्री एमआरके पनीरसेल्वम तथा पर्यावरण एवं खेल मंत्री थिरु टीपीएम मोहिद्दीन खान गुजर रहे थे। उनके साथ नौकरशाही का काफिला भी था। काफिला रुका। लेकिन मंत्रियों ने अपनी कार से उतरना मुनासिब नहीं माना। हाँ, वे मदद के लिए तड़पते पुलिसकर्मी को घूरते अवश्य रहे।
आखिरकार काफिले के साथ चल रहे एक कलेक्टर एम. जयरामन झिझकते हुए करीब आठ मिनट बाद कार से उतरे। साथ में स्वास्थ्य सचिव भी थे। लेकिन किसी ने भी पैर कटे इंस्पेक्टर को तत्काल अस्पताल पहुँचाने की जहमत नहीं उठाई। फिर जयरामन ने ही एम्बुलेंस के लिए फोन किया, जो समय पर नहीं आई। करीब 20 मिनट बाद काफिले की एक कार में उसे लाया गया। फिर भी मंत्रीजी का दिल नहीं पिघला और उन्होंने अपनी कार नहीं छोड़ी। अंततः तड़पते पुलिसकर्मी की पुकार मौत ने ही सुनी और अस्पताल ले जाने के रास्ते में ही वह चल बसा।
चश्मदीदों के मुताबिक अगर वक्त पर मदद मिल जाती और सब इंस्पेक्टर को अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। मारे गए सब इंस्पेक्टर का नाम आर वेत्रिवेल था। बताया जा रहा है बदमाशों का ये गैंग किसी और पुलिसवाले को मारने आया था लेकिन उसका शिकार बन गए सब इंस्पेक्टर आर वेत्रिवेल। इस घटना से पूरे तमिलनाडु में सनसनी फैल गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया जा रहा है कि दो मंत्री मौके पर मौजूद थे। पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद था लेकिन कोई तड़प रहे एसआई के पास नहीं गया। सब उसे दूर से देखते रहे और एंबुलेंस के आने का इंतजार करते रहे। नतीजा यह हुआ कि ज्यादा खून बह जाने से उनकी मौत हो गई