संसद के दोनों सदनों में 17 अक्तूबर को अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला जब दिवंगत सदस्यों और देश में हुई विभिन्न घटनाओं में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए मौन रखा जा रहा था तब कुछ सदस्यों ने कुछ अन्य घटनाओं के शिकार लोगों का उल्लेख नहीं किये जाने के विरोध में आवाज उठायी। राज्यसभा में सभापति हामिद अंसारी ने जब विभिन्न घटनाओं में मारे गये लोगों और सदन के दिवंगत पूर्व सदस्यों के सम्मान में सदस्यों से कुछ क्षणों का मौन रखने को कहा तब माकपा ने हाल के साम्प्रदायिक दंगों में मारे गये लोगों को भी इसमें शामिल करने की मांग को लेकर विरोध करना शुरू कर दिया जिस पर विपक्षी राजग ने आपत्ति जतायी।
इस पर सभापति ने कहा कि ऐसे मौकों पर इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए लेकिन जब विरोध जारी रहा तो उन्होंने कहा कि सभी तरह की हिंसा में मारे गये निर्दोष लोगों के प्रति सदन शोक प्रकट करता है।
लोकसभा में भी इसी तरह का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला जब दिवंगत सदस्यों और पूर्व सदस्यों के अलावा आतंकवादी और कुछ अन्य घटनाओं में मारे गये लोगों के सम्मान में मौन रखने के लिए सदस्यों के खड़े होने पर असम के निर्दलीय सदस्य एस के विश्वमुतियारी ने अपने राज्य में हुई हिंसा का उल्लेख नहीं किये जाने का विरोध किया। सदन में मौन रखे जाने की पूरी अवधि के दौरान वह अपनी बात कहते रहे। इस तरह की घटना सदन में संभवत: पहली बार हुई।
भारत की तलाश
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Monday, October 20, 2008
श्रद्धांजलि के लिए मौन रखे जाने के समय भी बोलते रहे संसद सदस्य
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