भारत की तलाश

 
Showing posts with label बोरिंग. Show all posts
Showing posts with label बोरिंग. Show all posts

Friday, June 20, 2008

पानी के लिए काटा पहाड़: बिना बिज़ली के सात सौ एकड़ खेतों में पूरे साल सिंचाई

उन्होंने जल आपूर्ति का ऐसा सिस्टम बनाया है कि अच्छे से अच्छा विशेषज्ञ भी देखकर अचरज में पड़ जाए। कैलोद करताल के किसान गुलाब सिंह पटेल ने ऐसा भगीरथी प्रयास किया है कि बारिश के बाद पूरे गांव की तस्वीर ही बदल जाएगी। खास बात यह है कि यह काम उन्होंने बगैर किसी सरकारी मदद के खुद के बूते पर किया। उन्होंने दो लाख रुपए खर्च कर ऐसा तालाब बनाया है जो पहाड़ी पर से बह जाने वाले पानी से भरेगा और केवल गर्मी में गांव वालों की प्यास बुझाएगा बल्कि खेतों को भी तृप्त कर हरा-भरा कर देगा। गांव के कुछ अन्य लोगों ने दो लाख और खर्च कर अपने खेत भी हरे-भरे करने की व्यवस्था कर ली।

गांव में इस समय पानी का स्तर छह सौ फीट नीचे है। इतनी गहराई तक बोरिंग कराने के बाद भी ज्यादा पानी नहीं मिलता। बकौल गुलाब पटेल, एक दिन खेत में लेटे-लेटे सती टेकरी से पानी उतारने और पाइप लाइन खेत तक लाने का ख्याल आया। अगले ही दिन गांव के कुछ साथियों को योजना बताने के बाद 25 मई से काम शुरू कर दिया। 23 दिन में तालाब बन गया और पाइप लाइन बिछ गई। सात दिन का काम और बाकी है। एक महीने की मशक्कत के बाद सिस्टम आकाश से बरसने वाले अमृत को समेटने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।

गुलाबसिंह की पूरी योजना में बिजली का कोई काम नहीं है। सालभर सिंचाई कुआं भरने का काम बिना बिजली के ही होगा। केवल कुएं से पानी खींचने में कुछ बिजली लगेगी लेकिन यह भी सामान्य रूप से लगने वाली बिजली की तुलना में 10 फीसदी भी नहीं होगी। तालाब से प्रत्येक खेत में भी पाइप लाइन का एक कनेक्शन दिया गया है। जब भी सिंचाई की जरूरत होगी, पानी मिल सकेगा। यही नहीं, गांव से चार किमी दूर पर भी कुछ खेत हैं। गांव वालों ने मिलकर करीब दो लाख रु. में एक पाइप लाइन वहाँ तक बिछवा ली। यानी इसी तालाब से चार किलोमीटर दूर तक के खेतों में भी सिंचाई हो सकेगी। दो-तीन जोरदार बारिश में ही गुलाब सिंह का तालाब व कुआं लबालब हो जाएगा और गांव वालों के सात सौ एकड़ खेतों में वर्षभर भरपूर पानी मिलेगा। अभी गांव वाले साल में दो फसल भी ठीक से नहीं ले पाते लेकिन इसके बाद कैलोद करताल के खेत साल में तीन बार लहलहाते नजर आएंगे।