नकली नोट से भारतीय अर्थव्यवस्था को तहस नहस करने की साजिश रचने वालों के दिन शायद खत्म होने पर आ गये हैं। भारत में बनी आटोमेटिक काउटरफीट करेंसी डिटेक्टर मशीन इसी नवंबर में बाज़ार में उतरने जा रही है। चंडीगढ़ के केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (CSIO) के वैज्ञानिकों द्वारा इस मशीन को बनाया गया है। इसमें छह सेंसर लगे हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि छह सेंसर वाली यह पहली मशीन होगी। इससे पहले एक सेंसर वाली मशीनें बाजार में उपलब्ध हैं।
नवंबर में लांच होने वाली मशीन नोट के विभिन्न पक्षों कागज, छपाई, हस्ताक्षर, फोटो, नंबर व वाटर प्रिंट को एक साथ पढ़ने में सक्षम है। इसमें एक मिनट में एक हजार नोटों की परख एवं गिनती एक साथ की जा सकती है। नकली नोट रखते ही इसमें लगा अलार्म बजने लगता है। अलार्म तब तक बंद नहीं होता जब तक नोट मशीन से बाहर नहीं निकाल लिया जाता। रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक में नई तकनीक के कई सफल परीक्षण भी किए जा चुके है। नई तकनीक यूनाइटेड स्टेट पेटेट एप्लीकेशन पब्लिकेशन और वर्ल्ड इटलैक्चुअल प्रापर्टी आर्गेनाइजेशन-विप्रो से पेटेट भी कराया जा चुका है। सीएसआईओ ट्रेक्नोलाजी ट्रांसफर की प्रक्रिया 26 सितंबर को की जाएगी। सुरक्षा कारणों से अभी कंपनी के नाम की घोषणा नहीं की जा रही है।
सीएसआईओ के वैज्ञानिक एचके सरदाना के मुताबिक नकली नोट पकड़ने वाली इस मशीन में 3+3 की तर्ज पर छह सेंसर लगे है। नकली नोट को गारंटी के साथ पकड़ने में मशीन कामयाब है। उन्होंने बताया कि करीब पांच साल के अनुसंधान के बाद इस तकनीक को ईजाद किया गया है। इस प्रोजेक्ट में अब तक 50 लाख रुपये खर्च हुए है। मशीन का साइज ए4 है और माडल पोर्टेबल, कीमत 45 से 50 हजार रुपये के बीच है।
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